Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
मरकुस 6:1 मरकुस 6:2 मरकुस 6:3 मरकुस 6:4 मरकुस 6:5 मरकुस 6:6 मरकुस 6:7 मरकुस 6:8 मरकुस 6:9 मरकुस 6:10 मरकुस 6:11 मरकुस 6:12 मरकुस 6:13 मरकुस 6:14 मरकुस 6:15 मरकुस 6:16 मरकुस 6:17 मरकुस 6:18 मरकुस 6:19 मरकुस 6:20 मरकुस 6:21 मरकुस 6:22 मरकुस 6:23 मरकुस 6:24 मरकुस 6:25 मरकुस 6:26 मरकुस 6:27 मरकुस 6:28 मरकुस 6:29 मरकुस 6:30 मरकुस 6:31 मरकुस 6:32 मरकुस 6:33 मरकुस 6:34 मरकुस 6:35 मरकुस 6:36 मरकुस 6:37 मरकुस 6:38 मरकुस 6:39 मरकुस 6:40 मरकुस 6:41 मरकुस 6:42 मरकुस 6:43 मरकुस 6:44 मरकुस 6:45 मरकुस 6:46 मरकुस 6:47 मरकुस 6:48 मरकुस 6:49 मरकुस 6:50 मरकुस 6:51 मरकुस 6:52 मरकुस 6:53 मरकुस 6:54 मरकुस 6:55 मरकुस 6:56



मरकुस 6:20 पर टिप्पणी — इसका सरल अर्थ
इस पद का केंद्र विचार यह है कि हरोध देवदूत-like भय के बजाय दृढ़ सम्मान के साथ जयहृदय रहते थे: यूहन्ना के धर्मी और पवित्र जीवन के कारण हरोध इसे सुरक्षित रखने और उसे सुनने के लिए तैयार रहता था, भले ही उसे भय और विरोध का सामना भी करना पड़ता था।
पार्श्वभूमि और संदर्भ
यूहन्ना बपतिस्मा और ईसा के पहले era में हरोधन राजवंश के भीतर एक उल्लेखनीय धार्मिक-राजनीतिक संघर्ष चल रहा था। यूहन्ना महान प्रचारक थे, जो पाप से ताड़ना और उद्धार के संदेश के साथ सामने आए। मरकुस 6 अध्याय में पवित्र मानस के प्रसंगों के बीच राजा हेरोदेस को यूहन्ना के प्रभाव का डर था—वह जानता था कि यूहन्ना धर्मी है और उसकी कथनी पवित्र जीवन से जुड़ी है।
व्याख्यात्मक बिंदु
अनुवादित पहलों के साथ सम्बन्ध
यदि आप दूसरे पवित्र ग्रंथ-पंक्तियों के साथ सम्बन्ध बनाते हैं, तो निम्न दूर-स्थापित संकेत मिलते हैं:
संक्षिप्त थीमयुक्त सूची
अन्य संबद्ध पवित्र ग्रंथ
संक्षेप सहयोगी संदर्भ:
व्यावहारिक निष्कर्ष
जब हम सच्चे जीवन के साथ चलते हैं, तब कभी-कभी शक्तिशाली समाजिक दमन का सामना करना पड़ता है। फिर भी ईश्वर की पवित्रता और नैतिकता पर अडिग रहना हमें सही दिशा में प्रेरित करता है।
संक्षिप्त टिप्पणी (प्रमुख उद्धरणों के साथ)
इस पाठ के भीतर Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के संक्षिप्त विचारों के अनुरूप, एक संयुक्त निष्कर्ष निकलता है: धर्मी जीवन के प्रभाव से सत्ता-व्यवस्था में नैतिक भय के बावजूद सत्य का संदेश सुरक्षित रहता है; और राजा-प्रभु अपने कानों पर सुनने के लिए विवेक रखे हुए धर्मी को सुनते हैं।
टेक-अप: यह पद यह दर्शाता है कि पवित्रता और सत्य के लिए एक संतुलित आचरण कैसे सत्ता-प्रभुता के बीच भी सुनवाई का अवसर बना देता है।