Old Testament
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नहेम्याह 2:18 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
फिर मैंने उनको बताया, कि मेरे परमेश्वर की कृपादृष्टि मुझ पर कैसी हुई और राजा ने मुझसे क्या-क्या बातें कही थीं। तब उन्होंने कहा, “आओ हम कमर बाँधकर बनाने लगें।” और उन्होंने इस भले काम को करने के लिये हियाव बाँध लिया।
नहेम्याह 2:18 पद-दर-पद बाइबल टीका
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नहेम्याह 2:18 समानांतर पद और संबंधित वचन
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2 इतिहास 32:5 (HINIRV) »
फिर हिजकिय्याह ने हियाव बाँधकर शहरपनाह जहाँ कहीं टूटी थी, वहाँ-वहाँ उसको बनवाया, और उसे गुम्मटों के बराबर ऊँचा किया और बाहर एक और शहरपनाह बनवाई, और दाऊदपुर में मिल्लो को दृढ़ किया। और बहुत से हथियार और ढालें भी बनवाईं।

2 शमूएल 2:7 (HINIRV) »
अब हियाव बाँधो, और पुरुषार्थ करो; क्योंकि तुम्हारा प्रभु शाऊल मर गया, और यहूदा के घराने ने अपने ऊपर राजा होने को मेरा अभिषेक किया है।”

1 इतिहास 19:13 (HINIRV) »
तू हियाव बाँध और हम सब अपने लोगों और अपने परमेश्वर के नगरों के निमित्त पुरुषार्थ करें; और यहोवा जैसा उसको अच्छा लगे, वैसा ही करेगा।”
नहेम्याह 2:18 का संदर्भ और उसका अर्थ
यह पंक्ति नहेम्याह के भरोसेमंद नेतृत्व और ईश्वर की कृपा के प्रभाव की स्पष्ट तस्वीर है। जब नहेम्याह ने राजा के सामने अपना vision: jerusalem’s walls restoration का उद्देश्य रखा, तो राजा ने उससे पूछा कि यह योजना कैसे पूरी होगी। नहेम्याह 2:18 में वह बताता है कि परमेश्वर की कृपादृष्टि ने उसे हिम्मत दी और राजा ने भी अपने समर्थन के शब्द दिए। इसके बाद समुदाय ने एक स्वर में कहा, “आओ हम कमर बाँधकर बनाने लगें।” यह अनुभव यह दर्शाता है कि ईश्वर की प्रेरणा से मिलती ऊर्जा और प्रोत्साहन भी समुदायिक प्रयास को वास्तविक बना देता है।
मुख्य भावार्थ
यह पद दिखाता है कि दिव्य कृपा कैसे मानवीय योजना को व्यवहारिक कार्रवाई में बदल देती है। नहेम्याह ने पहले परमेश्वर की सहायता माँगी और प्राप्त की; फिर उसने अपने राजा से आवश्यक सहायता प्राप्त की। अंततः समुदाय ने एकजुट होकर निर्णय किया कि वे मिलकर अपने शहर के नुकसान की मरम्मत करेंगे। इस verses में प्रयत्न, विश्वास, और सामुदायिक भागीदारी मिलकर काम करती है।
तीन प्रमुख थेम्स
संबंधित आयतें (cross-references)
व्यावहारिक चिंतन
हम क्या सीख सकते हैं? पहले, कठिन परिस्थितियों में भी ईश्वर की कृपा पर भरोसा रखें। दूसरे, अपनी योजनाओं को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करें ताकि सहयोगी हिस्सेदार सही दिशा में कदम बढ़ाएं। तीसरे, समुदाय की भागीदारी से कठिन कार्य भी संभव बनता है—छोटे-छोटे कदम भी राष्ट्र-निर्माण की दिशा में योगदान कर सकते हैं।
संक्षिप्त निष्कर्ष
नहेम्याह 2:18 से यह स्पष्ट होता है कि प्रभु की कृपा से प्रेरित नेतृत्व और सामाजिक समर्थन मिलकर, एक कठिन परियोजना को व्यवहार में बदल देते हैं। परमेश्वर की सहायता मिलते ही, सचेत प्रयास और एकजुटता से महान कार्य संभव होते हैं।
नोट आवश्यक उद्धरण
यदि आप Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के स्पष्ट उद्धरण चाहते हैं, तो नीचे दी गई पंक्तियाँ संदर्भ के रूप में उद्धृत हैं:
“The grace of God appearing to him, settles the mind to undertake the business.”
इनमें से तीनों महापुरुषों के विचारों के सार को आप स्रोत-ग्रंथों में खोज सकते हैं; हमने यहाँ संक्षेप में उनके दृष्टिकोणों का सार प्रस्तुत किया है।