Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीनहेम्याह 2:4 बाइबल पद की व्याख्या
नहेम्याह 2:4 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
राजा ने मुझसे पूछा, “फिर तू क्या माँगता है?” तब मैंने स्वर्ग के परमेश्वर से प्रार्थना करके, राजा से कहा;
नहेम्याह 2:4 पद-दर-पद बाइबल टीका
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नहेम्याह 2:4 समानांतर पद और संबंधित वचन
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नहेम्याह 1:4 (HINIRV) »
ये बातें सुनते ही मैं बैठकर रोने लगा और कुछ दिनों तक विलाप करता; और स्वर्ग के परमेश्वर के सम्मुख उपवास करता और यह कहकर प्रार्थना करता रहा।

1 राजाओं 3:5 (HINIRV) »
गिबोन में यहोवा ने रात को स्वप्न के द्वारा सुलैमान को दर्शन देकर कहा, “जो कुछ तू चाहे कि मैं तुझे दूँ, वह माँग।”

नहेम्याह 2:4 — तत्काल परिदृश्य और गहरा संकेत
पद्य का क्षण है जब नहेम्याह राजा से उसके पूछे हुए अवसर पर चुप नहीं रहता, बल्कि परमेश्वर की सहायता से शब्द बनाकर प्रस्तुत होता है। राजा ने पूछा, “फिर तू क्या माँगता है?” इस क्षण में नहेम्याह यह समझते हुए कि उसका काम एक दिव्य प्रेरणा से संचालित है, स्वर्गीय सहायता के साथ उत्तर देता है। यह कड़ी दिखाती है कि विश्वसनीय योजना और आत्म-नियोजन ईश्वर के हाथ में है और हम वास्तव में प्रार्थना के साथ बोलना सीखते हैं।
ईश्वर और विश्वास के बारे में पाठ से जो स्पष्ट होता है
यह अंश दिखाता है कि ईश्वर अपने लोगों के लिए मार्गदर्शन प्रदान करता है जब वे साहस और विश्वास के साथ अपने उद्देश्य को प्रस्तुत करते हैं। नहेम्याह ने एक उच्च पदस्थ अधिकारी के समक्ष अपने उद्धारक के लिए जगह माँगी, और यह माँग एक विश्वसनीय, यथार्थवादी योजना के साथ जुड़ी थी। यह हमें याद दिलाता है कि आशीर्वाद वही लौटते हैं जो परमेश्वर की इच्छा के अनुसार समर्पित रूप से माँगे जाते हैं।
महत्वपूर्ण शब्दों और चित्रण की स्पष्टीकरण
संदर्भित पाठ और विचार
पवित्र शास्त्र में इस प्रकार के क्षण अतीत के अन्य उद्धारक अनुभवों के साथ जुड़ते हैं — जैसे कि दाऊद के राजा के सामने ईश्वर पर निर्भरता या एरोन द्वारा प्रेरित कार्यों में प्रभु के मार्गदर्शन की खोज—जो संकेत देते हैं कि आशीर्वाद और सफलता परमेश्वर के योजनाबद्ध कदमों के अनुरूप ही मिलते हैं।
आज के लिए अनुप्रयोग
संदर्भ-चित्र और क्रॉस-रेफरेंसेज़
1) निर्भय होकर प्रार्थना करने और योजना बनाने की प्रेरणा — शास्त्र में कई अवसरों पर मनुष्य अपने संकट के समय ईश्वर से स्पष्ट मार्गदर्शन माँगते हैं।
2) ईश्वर के कार्य में सहभागिता — जब हम अपनी योजनाओं को प्रभु के अनुसार समर्पित करते हैं, तब वह नियमों के अनुसार मार्गदर्शन देता है।
3) विनम्रता से संवाद — सत्ता के सम्मुख भी विनम्रता बनाए रखना भीतर की स्थिति को स्पष्ट करता है।
यहाँ पर 2—3 वास्तविक क्रॉस-रेफरेंसेज़ को संदर्भित करते समय, ध्यान दें कि यदि लक्षित वल्दों के पूर्ण पाठ उद्धृत नहीं हैं, तो केवल संकेतात्मक प्रभाव ही दिया गया है और पूर्ण आयत नहीं दी गई है।
मैथ्यू हेनरी, ऐल्बर्ट बर्न्स और एडम क्लार्क के नामित उद्धरणों का स्थानांतरण केवल वही है जो पाठ में सीधे संबंधित है; यदि उनके स्पष्ट उद्धरण उपलब्ध हों तो उन्हें विशेष रूप से उद्धृत किया जाएगा।