Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
नीतिवचन 1 नीतिवचन 2 नीतिवचन 3 नीतिवचन 4 नीतिवचन 5 नीतिवचन 6 नीतिवचन 7 नीतिवचन 8 नीतिवचन 9 नीतिवचन 10 नीतिवचन 11 नीतिवचन 12 नीतिवचन 13 नीतिवचन 14 नीतिवचन 15 नीतिवचन 16 नीतिवचन 17 नीतिवचन 18 नीतिवचन 19 नीतिवचन 20 नीतिवचन 21 नीतिवचन 22 नीतिवचन 23 नीतिवचन 24 नीतिवचन 25 नीतिवचन 26 नीतिवचन 27 नीतिवचन 28 नीतिवचन 29 नीतिवचन 30 नीतिवचन 31Verse
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नीतिवचन 3:6 (HINIRV): उसी को स्मरण करके सब काम करना, तब वह तेरे लिये सीधा मार्ग निकालेगा।
यह पंक्ति नीतिवचन के एक केंद्रीय सत्य को प्रकट करती है: परमेश्वर की योजना में समर्पण और विश्वास के साथ हर कदम चलते रहना, तब वह जीवन के रास्तों में स्पष्ट और सीधे मार्ग दिखाएगा। यह उद्धरण सीधे जीवन के निर्णयों को ईश्वर के संकेतों के अनुरूप बनाने का आह्वान है—काम-कार्यान्वयन, योजनाओं, और व्यवहार में ईश्वर को स्मरण रखना जरूरी है।
ईश्वर की दिशा: विश्वास का निर्देशक
यह वाक्य बताता है कि परमेश्वर हमारे हर क्रिया-कलाप में मार्गदर्शन करता है जब हम उसे स्मरण करें। इसका आशय है कि हमारी बुद्धि-चिन्तन, निर्णय, और योजनाओं का केंद्र ईश्वर की इच्छा बन जाए। अगर हम हर कार्य में उसके निर्देश को मापदण्ड बनाते हैं, तो वह हमारे लिए “सीधा मार्ग” दर्शाएगा—जो जीवन के विभिन्न मोड़ों पर स्थिर और सुरक्षित दिखाई देगा।
शब्दों की clarification
관련 passages (cross-references)
इन संदर्भों में स्पष्ट है कि वचन-आधारित जीवन में परमेश्वर का मार्गदर्शन निरंतर रहता है, चाहे परिस्थितियाँ कैसी भी हों।
नीतिवचन 3:6 का समेकित व्याख्या
उसी को स्मरण करके—जब हम परमेश्वर के निर्देशों को अपने विचारों, शब्दों और कार्यों की धुरी बनाते हैं—तब वह हमारे लिए “सीधा मार्ग” बनाने का आश्वासन देता है। यह सीधे-सीधे भरोसा और जीवन के निर्णयों में ईश्वर-समर्थन का मिलन है। यह सीख Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke जैसे सार्वजनिक-डायस्पोरामिक विद्वानों के प्रवचनों में भी मिलती है, जहाँ वे बतलाते हैं कि परमेश्वर के नीतिगत संकेत हमारे जीवन के हर क्षेत्र को मार्गदर्शित करते हैं और हम पीछे नहीं हटते तो वह यात्रा के प्रत्येक चरण में सुरक्षा प्रदान करता है।
सीधे शब्दों में यह निष्कर्ष निकलता है: जब आप परमेश्वर को हर कदम पर स्मरण रखें और उसे पहले रखें, तब उसका प्रत्यक्ष मार्ग आपके सम्मुख स्पष्ट होगा और आप विचलित हुए बिना अपने उद्धार-यात्रा में आगे बढ़ सकेंगे।
प्राचीन टीका से संक्षेप
महत्वपूर्ण विचार: परमेश्वर को स्मरण रखना और हर क्रिया में उसकी इच्छा का पालन करना—यह जीवन के कई मोड़ पर आत्म-निर्भरता के बजाय कृपा-निर्भरता की राह देता है।
महत्वपूर्ण उद्धरण: अगर किसी विशेष पंक्ति के छोटे-छोटे शब्द-उद्धरण उपलब्ध हों, वे यहाँ उद्धृत किए जा सकते हैं; अन्यथा पूर्ण पाठ न किया गया है।