नीतिवचन 3:25 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

अचानक आनेवाले भय से न डरना, और जब दुष्टों पर विपत्ति आ पड़े, तब न घबराना;

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नीतिवचन 3:25 पद-दर-पद बाइबल टीका

नीतिवचन 3:25 का संदर्भ और अर्थ

नीतिवचन 3:25-26 के आस-पास का संदर्भ सीधे ईश्वर के मार्गदर्शन और भरोसे पर आधारित है। नीतिवचन इस खंड में चेतावनी देता है कि जबतक हम ईश्वर की वजह से ज्ञान और सुरक्षा के स्रोत बने रहते हैं, तब तक भय और विपत्तियाँ तय हैं, परन्तु विश्वास और विवेक के साथ उनसे निबटना संभव है। इस Verse में विशेष रूप से अचानक आने वाले भय और दुष्टों पर विपत्ति के समय घबराहट से दूर रहने की शिक्षा दी गई है।

मूल अभिप्राय और केंद्रीय संदेश

कहने की सरल भाषा में वह कह रहा है: भविष्य की अनिश्चितता के बाबजूद, हर तरह के भय को आपके करामात से बाहर रखने के लिए परमेश्वर की सुरक्षा पर निर्भर बने रहें। अचानक भय आए या दुष्टों पर विपत्ति पड़े, तब भी आपका हृदय कठोर न हो; विश्वास की आदत बने रहने पर भय पर विजय मिलती है।

दो प्रमुख विषय

  • विश्वास बनाम भय: भगवान की सुरक्षा में आत्म-विश्वास रखना और परिस्थितियों के कारण घबराहट से बचना।
  • निर्णय और धैर्य: विपत्तियों के बीच विवेकपूर्ण निर्णय लेना और डर के कारण गलत कदम न उठाना।

संबद्ध पवित्र ग्रंथों के प्रभावी संदर्भ

— प्रेरितों के प्रेरणादायक विश्वास के साथ दूसरा कुरआन या अन्य प्रार्थना-संदेश नहीं; बल्कि यह दिखाता है कि संकट के समय भीतर का भरोसा कैसे बना रहे। नीचे तीन प्रासंगिक cross-references हैं, जो विस्तार से नहीं दिखाते पाठ के पूरे वाक्यों को, बल्कि सार को जोड़ते हैं:

  • यशायाह 41:10 से अनुग्रहपूर्ण सिद्धांत: भय को दूर रखना और परमेश्वर की सहायता पर आश्रय लेना।
  • भजन 56:3-4: भय के समय परमेश्वर में भरोसा रखना और उसकी प्रस्तुत सुरक्षा से शांति पाना।
  • यहोशू 1:9: साहस और धैर्य की exhortation—कमज़ोरी पर भी परमेश्वर की उपस्थिति से सक्षम बनना।

इन संबंधों से स्पष्ट होता है कि संकट के समय विश्वासी व्यक्तित्व के भीतर ईश्वर के साथ समन्वय बना रखना कितना अनिवार्य है।

व्यावहारिक विचार

- शांत शब्दों से प्रार्थना करें और चिंताओं को लिखकर देखें कि कौन से भय वास्तविक हैं और कौन से सोची-समझी गलत धारणाओं से उपजते हैं।

- प्रतिदिन छोटी-छोटी आशीषयों पर ईश्वर की विश्वासयोग्यता की स्मरण-शक्ति बनाए रखें, ताकि अचानक भय आने पर भी दिल शांत रहे।

संक्षिप्त निष्कर्ष

नीतिवचन 3:25 कहता है: अचानक आने वाले भय से न डरना और जब दुष्टों पर विपत्ति आ पड़े, तब न घबराना। इसका अर्थ है—विश्वास, विवेक, और प्रभु के संरक्षण पर निर्भरता, जो संकट के समय भी आत्मा को स्थिर रखती है।

संक्षेप में एकीकृत मार्गदर्शन

यह वाक्य हमें सिखाता है कि भय के समय भी हमें अपनी अंतरात्मा को स्थिर रखना है, परमेश्वर के वचन की सुरक्षा में टिके रहना है, और विपत्तियों से निपटने के लिए धैर्य और विवेक विकसित करना है। ऐसी दृष्टि से जीवन के हर मोड़ पर ईश्वर की सहायता और विश्वासी समुदाय का साथ हमारे लिए सबसे बड़ा संबल बनता है।

नोट: नीचे दिए गए महत्त्वपूर्ण लेखक-उद्धरण केवल संदर्भ के लिए हैं; मूल पाठ से प्रेरित विचारों को समेकित करते हुए एक नए हिन्दी प्रवाह में प्रस्तुत किया गया है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

नीतिवचन 3:25 समानांतर पद और संबंधित वचन

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