Old Testament
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नीतिवचन 1 नीतिवचन 2 नीतिवचन 3 नीतिवचन 4 नीतिवचन 5 नीतिवचन 6 नीतिवचन 7 नीतिवचन 8 नीतिवचन 9 नीतिवचन 10 नीतिवचन 11 नीतिवचन 12 नीतिवचन 13 नीतिवचन 14 नीतिवचन 15 नीतिवचन 16 नीतिवचन 17 नीतिवचन 18 नीतिवचन 19 नीतिवचन 20 नीतिवचन 21 नीतिवचन 22 नीतिवचन 23 नीतिवचन 24 नीतिवचन 25 नीतिवचन 26 नीतिवचन 27 नीतिवचन 28 नीतिवचन 29 नीतिवचन 30 नीतिवचन 31Verse
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नीतिवचन 3:31 का पाठ—Context और सार
नीतिवचन 3:31 में दया और ईमानदारी के मार्ग से विचलित नहीं होने की चेतावनी दी गई है। यह स्पष्ट रूप से कहता है कि उपद्रवी पुरुष के विषय में डाह न करना, न उसकी चाल चलना; इसका तात्पर्य यह है कि हम उन लोगों के प्रभाव में आकर अन्यायपूर्ण आचरण अपनाने से बचें जो गलत रास्ते पर चलते हैं। संदर्भ में यह शिक्षा परमेश्वर के गुणों के अनुरूप आचरण दिखाने के लिए है—धैर्य, चतुराई, और न्यायप्रियता के साथ जीवन जीना।
मुख्य अभिप्राय
इस वचनों में यह सिखाया गया है कि जीवन में हर प्रकार के दुस्साहस, दुष्टता या अन्याय की ओर आकर्षित न हों। अन्यायपूर्ण आचरण के साथ सहानुभूति या 'मित्रता' ढूंढ़ना हमारे अंतःकरण के अनुरूप नहीं है; हमें सत्य और ईमानदारी पर टिके रहना चाहिए, भले ही रास्ते सरल या प्रेरक दिखाई दें।
दो-तीन प्रमुख थीम
संदर्भ-विचार (Related Passages)
1) नीतिवचन 4:14-15— बराय-हाकिम मार्ग से दूर रहने और बुरे रास्तों पर नहीं चलने की admonition की पुष्टि करता है। व्यावहारिक निष्कर्ष: बुरे मार्ग के आकर्षण से बचना शिक्षा का मूल भाग है।
2) भजन 1:1-3— शुभ पुरुष के आचरण और स्थिरता का वर्णन; पौधे की तरह जीवनदायिनी आय पर गर्व न करके सत्य-आचरण पर टिके रहने की प्रेरणा देता है। संकेत: सही संबंध और दैनिक व्यवहार में पवित्रता का फल मिलता है।
3) यिर्मयाह 17:9— मन का भोतिक स्वभाव कितनी बार हमारे निर्णयों को प्रभावित करता है, यह चेतावनी देता है; फिर भी विश्वासयोग्यता से सत्य पर टिकना संभव है। नियम: मन का मार्ग सीधे जीवन के मार्ग को निर्देशित करता है।
व्यावहारिक चिंतन
अपने व्यवहार पर एक छोटा-सा परीक्षण लागू करें: क्या मैं आज ऐसे कदम तो नहीं उठाऊँ जो किसी के विरुद्ध अन्याय दिखाते हों? क्या मैं दबाव में आकर या आकर्षण में आकर दायित्वों से पीछा छुड़ाने के बजाय सत्य और न्याय के रास्ते पर चल रहा हूँ? कठिन समय में भी सत्य मानदंड बनाये रखना एक विश्वसनीय ईमानदार जीवन की निशानी है।
सारांश
नीतिवचन 3:31 हमें स्मरण दिलाता है कि ईमानदारी, संयम और सत्यापन के बिना माया-आकर्षण के झोंकों में नहीं बहना चाहिए। पश्चिमी-समझ के अनुसार “डाह न करना” और “उसकी चाल चलना” का निषेध हमारे भीतर सही निर्णय की प्रेरणा बनकर उभरता है। परमेश्वर के मार्ग पर टिके रहना ही जीवन में स्थिरता और आशीष की कुंजी है।
कई उद्धरणों से संकेत
मार्थे हेनरी, आल्बर्ट बार्न्स और एडम क्लार्क में से छोटे-छोटे विचार अंदरघुम कर आते हैं कि दुष्ट मार्ग के प्रभावों से बचना क्यों आवश्यक है, ताकि हम परमेश्वर के सत्य पर टिके रहें। (इन चारों पब्लिक-डोमेन कमेंटेटरों के स्पष्ट मूल वाक्यांश यहां संक्षेप में उद्धृत नहीं हैं, पर उनके विचार मार्गदर्शक रूप में एकीकृत किए गए हैं।)
क्रॉस-रेफरेंसेस: नीतिवचन 4:14-15; भजन 1:1-3; यिर्मयाह 17:9