Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
नीतिवचन 1 नीतिवचन 2 नीतिवचन 3 नीतिवचन 4 नीतिवचन 5 नीतिवचन 6 नीतिवचन 7 नीतिवचन 8 नीतिवचन 9 नीतिवचन 10 नीतिवचन 11 नीतिवचन 12 नीतिवचन 13 नीतिवचन 14 नीतिवचन 15 नीतिवचन 16 नीतिवचन 17 नीतिवचन 18 नीतिवचन 19 नीतिवचन 20 नीतिवचन 21 नीतिवचन 22 नीतिवचन 23 नीतिवचन 24 नीतिवचन 25 नीतिवचन 26 नीतिवचन 27 नीतिवचन 28 नीतिवचन 29 नीतिवचन 30 नीतिवचन 31Verse
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नीतिवचन 3:27 परหลัก interpretive point
जो भलाई के योग्य है उनका भला अवश्य करना, यदि ऐसा करना तेरी शक्ति में है। इस वचन में प्रेरित बोध और व्यावहारिक नैतिकता का मिलन स्पष्ट है: जब भी संभव हो, दूसरों के हित में कर्म करना हमारा दायित्व है। निर्णय का आधार विवेक और प्रेम है, न कि स्वार्थ या विलंब।
पाठक-परिप्रेक्ष्य ( Literary Context )
नीतिवचन सौम्यता, विवेक और धार्मिक जीवन के व्यवहारिक नियमों को संकलित करता है। यहाँ माता-पिता द्वारा सीखाई गई नीतियाँ सामान्य नैतिक आचरण के विधानों में समाहित हैं—किसी के साथ न्याय और दयालुता में बाधा न डालना। पंक्ति का केंद्र यह है कि भलाई करने की इच्छा और क्षमता दोनों मानवीय जीवन का वास्तविक भाग बनना चाहिए; यदि समर्थ हों तो सहायता अवश्य करनी चाहिए।
धर्मशास्त्रीय महत्व ( Theological significance )
यह वाक्य व्यवहारिक धर्म के द्वार खोलता है: सेवा एक नीतिगत कर्तव्य है, न कि केवल विचार या भावना। उपयोगी दान, सहायता-प्रकार के कर्म, और सामाजिक पक्ष में लाभ पहुँचाने की जिम्मेदारी व्यक्ति की आस्तिकता का परीक्षण हैं। साथ ही यह बताता है कि परमेश्वर की कृपा से मिली योग्यताएँ दूसरों के हित में प्रयुक्त होनी चाहिएं; दया एक गतिशील प्रक्रिया है, जो सामाजिक जीवन में ईमानदारी और प्रत्यक्ष सहायता से साक्षात्कार पाती है।
पूर्व-पश्चात स्रोतों के संकेत ( Cross-references )
ये संकेत एक व्यापक नैतिक ढांचे की ओर इशारा करते हैं जहाँ भलाई का कर्तव्य व्यक्तिगत और सामाजिक दोनों स्तरों पर क्रियाशील रहता है।
कथनात्मक प्रश्न ( Questions for reflection )
प्रायः उद्धरण जिन्हें ध्यान में रखना चाहिए ( Brief quotes from classic commentators )
मैथ्यू हेनरी, ऐल्बर्ट बार्न्स, एडम क्लार्क – इन सार्वजनिक-डेरहण टिप्पणीकारों के सतही उद्धरण यहाँ एकत्रित नहीं होते, परंतु उनके विचारों के सार में यह बात स्पष्ट है कि भलाई करने की क्रिया, न केवल इच्छा बल्कि शक्ति के साथ आना चाहिए।
संक्षिप्त निष्कर्ष (Summary and synthesis)
नीतिवचन 3:27 हमें प्रेरित करता है कि भलाई करने का दायित्व हमारे जीवन के प्रमुख उद्देश्य का अंग बने। यदि हमारे पास शक्ति हो, तो अवश्य सहायता करनी चाहिए; यह केवल एक नैतिक आदर्श नहीं, बल्कि एक सक्रिय और निर्धारित धार्मिक जीवन का प्रभाव है। सही समय और अवसर पहचानने की क्षमता भी इसी में सम्मिलित है—हमारी शक्ति और अवसर दोनों मिलकर समाज में राहत और प्रेम फैलाते हैं।