Old Testament
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नहेम्याह 2:5 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
“यदि राजा को भाए, और तू अपने दास से प्रसन्न हो, तो मुझे यहूदा और मेरे पुरखाओं की कब्रों के नगर को भेज, ताकि मैं उसे बनाऊँ।”
नहेम्याह 2:5 पद-दर-पद बाइबल टीका
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नहेम्याह 2:5 समानांतर पद और संबंधित वचन
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एज्रा 5:17 (HINIRV) »
अब यदि राजा को अच्छा लगे तो बाबेल के राजभण्डार में इस बात की खोज की जाए, कि राजा कुस्रू ने सचमुच परमेश्वर के भवन के जो यरूशलेम में है बनवाने की आज्ञा दी थी, या नहीं। तब राजा इस विषय में अपनी इच्छा हमको बताए।”

रूत 2:13 (HINIRV) »
उसने कहा, “हे मेरे प्रभु, तेरे अनुग्रह की दृष्टि मुझ पर बनी रहे, क्योंकि यद्यपि मैं तेरी दासियों में से किसी के भी बराबर नहीं हूँ, तो भी तूने अपनी दासी के मन में पैठनेवाली बातें कहकर मुझे शान्ति दी है।”

2 शमूएल 14:22 (HINIRV) »
तब योआब ने भूमि पर मुँह के बल गिर दण्डवत् कर राजा को आशीर्वाद दिया; और योआब कहने लगा, “हे मेरे प्रभु, हे राजा, आज तेरा दास जान गया कि मुझ पर तेरी अनुग्रह की दृष्टि है, क्योंकि राजा ने अपने दास की विनती सुनी है।”
मुख्य interpretive बिंदु
नहेम्याह 2:5 में नहेम्याह राजा के मनोरथ को परमेश्वर की योजना के अनुरूप प्रस्तुत करते हैं। वह यहूदियों के प्राचीन नगर यरूशलेम के खंडहरों के पुनर्निर्माण की इच्छा रखता है और इसे राजकीय अनुमति से संभव बनाते देखना चाहता है। इस वच्न में बंद वर्णन है कि कैसे एक आत्म-निवेदनशील, विश्वास-सम्पन्न उद्देश्य के साथ एक नेता राजा को प्रसन्न करने की भीख मांगता है ताकि परमेश्वर की योजना के अनुसार राज्य-निर्माण हो सके।
पाठ-संगठन (लिटरेरी कॉन्टेक्स्ट)
यह वाक्य नहेम्याह के आधिनामक संवाद का भाग है जिसने यहूदियों के लिए एक संरचनात्मक पुनर्निर्माण की रूपरेखा दी। कहानी में नहेम्याह ने राजा औऱ उसकी प्रशासनिक व्यवस्था के साथ अपने उद्देश्य का स्पष्ट प्रस्ताव रखा: यरूशलेम के नगर-खंडहरों को फिर से बसाने के लिए वैधानिक अनुमति और संसाधन प्राप्त करना। यह प्रयोग दिखाता है कि कैसे एक व्यक्ति अपने साहस, रणनीति और आध्यात्मिक लक्ष्य से प्रेरित होकर राजनीतिक भूमि-परिवर्तन को प्रेरित कर सकता है।
धर्म-गत ज्ञान (थियोलॉजिकल महत्त्व)
परमेश्वर के उद्देश्य के अनुसार राज्य-निर्माण एक सामाजिक-आर्थिक और धार्मिक उद्धार का संकेत है। नहेम्याह की यह दुविधा भक्त-मानवीय कार्रवाई और आध्यात्मिक उद्देश्य के बीच संतुलन बनाती है: राजा की मंजूरी पाकर भी उसका लक्षय यहूदियों की आस्था और उनके शहर की महिमा को लौटाना है। यह उद्धार की दिशा में मानवीय भागीदारी की कुंजी को दर्शाती है—क्योंकि ईश्वर कभी-कभी राजसी नीति का प्रयोग करके अपने लोक के लिए अवसर देता है।
अनुसंग (Cross-references)
इन संदर्भों से स्पष्ट होता है कि विवाद-संरचना और नेतृत्व के निर्णयों में आध्यात्मिक दृष्टिकोण, नीति-निष्ठा और सामाजिक पुनर्निर्माण एक साथ चलते हैं।
विचार-विमर्श के प्रश्न
संक्षिप्त निष्कर्ष
नहेम्याह 2:5 एक नये अध्याय की शुरुआत की संकेत देता है: परमेश्वर के उद्देश्य के अनुरूप नेतृत्व और मार्गदर्शन पाने हेतु राजा की अनुमति और सामर्थ्य प्राप्त करना। यह našezek संदेश है कि स्मारकों की पुनर्निर्मिति केवल भौतिक पुनर्निर्माण नहीं, बल्कि परमेश्वर के लोगों की आस्था, सुरक्षा और सम्मान की पुनःस्थापना है।
प्रमुख उद्धरण ( public-domain commentaries ) — संक्षेप-उद्धरण:
Matthew Henry: “The king's favour is courted, not for earthly trifles, but for the promoting of God's work.”
Albert Barnes: “He seeks leave, that what God purposes to do may be carried on with lawful authority and public consent.”
Adam Clarke: “The request is framed not as a private advantage, but as a public concern for the honour of God and the good of Jerusalem.”
नोट: उपर्युक्त उद्धरण रूपरेखा 19वीं सदी के सार्वजनिक-domain टिप्पणीकारों के सामान्य विचारों के सार ग्रहण हैं; मूल पाठों में संपूर्ण उद्धरण उपलब्ध हो सकता है।