1 कुरिन्थियों 11:18 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

क्योंकि पहले तो मैं यह सुनता हूँ, कि जब तुम कलीसिया में इकट्ठे होते हो, तो तुम में फूट होती है और मैं कुछ-कुछ विश्वास भी करता हूँ।

1 कुरिन्थियों 11:18 पद-दर-पद बाइबल टीका

1 कुरिन्थियों 11:18 — संदर्भ और अर्थ

पाइलेजुली-समहूँ में इकट्ठे होने पर कलीसिया में फूट की सूचना मिलना यह दर्शाता है कि प्रेरित पौलुष ने चर्च के भीतर विविधता के बावजूद एकता की आवश्यकता को प्रमुख माना है। यहाँ “फूट” से आशय उस नियम और व्यवहार से है जो विश्वासियों के बीच तनाव, मतभेद और विभाजन को जन्म देता है। यह वाक्यांश उनके दायरे में यहूदी-जातीय, सामाजिक या व्यवहारिक भिन्नताओं के कारण उत्पन्न अस्पष्टताओं को इंगित करता है, जिन्हें किस प्रकार संभालना चाहिए, इसका मामला है।

मूल संदेश

कलीसिया के मिलन-स्थल पर जो कुछ होता है, उससे सम्मानजनक एकता दिखनी चाहिए। विभिन्न व्यक्तित्व, मत और परंपराओं के बावजूद वह एक ही प्रभु यीशु में बंधे हैं। फूट के संकेत से पौलुस को तत्काल सचेत होना पड़ता है कि सार्वजनिक उपासना और प्रेम के मंच पर विभाजन उनकी आध्यात्मिक स्थिति पर प्रश्न चिह्न लगाते हैं।

मुख्य विषय

  • चर्च के एकत्व की महत्ता और फूट के खतरे।
  • भाई-बंधुओं के बीच व्यवहार को विनम्रता और प्रेम से संचालित करना।
  • ईश्वर के पदार्थ-प्रकाश के साथ एकता के अनुकूलता का महत्व।

Related passages (संक्षिप्त संदर्भ)

— यासं में एकता और प्रेम की भूमिका के बारे में अन्य प्रेरित लेखन: अतीत के चर्च-समाचार में विभाजन की चर्चा; — क्रियों 2 में अभिव्यक्ति और समुदायिक जीवन का मिलन; — गालातियों 3-4 में आत्मा के फल और सेवकाई के एकत्व की बात। इन से समझ आता है कि व्यक्तिगत भिन्नताएँ भी सार्वजनिक जीवन में कैसे संचालित हों।

कड़ा-व्यवहार और मार्गदृष्टि

पौलुस दूसरों के विश्वास और योगदान को मान्यता देने के लिए कहता है कि प्रत्येक सदस्य के लिए प्रेम, सम्मान और संयम आवश्यक है। क्रिया-व्यवहार में हावभाव, खाने-पीने के आयोजन और मीटिंग-समय की व्यवस्था में भी एकता का चिह्न दिखना चाहिए। यह केवल नीतिगत नियम नहीं, बल्कि आत्मिक स्थिति है — प्रेम जो विश्वास को स्थिर बनाता है।

व्यावहारिक Reflection (व्यावहारिक विचार)

  • क्या मेरी उपस्थिति कलीसिया में प्रेम और सम्मान को बढ़ाती है, या विभाजन को जन्म देती है?
  • क्या मैं दूसरों के विचारों के प्रति नम्रता और समझदारी दिखाता हूँ?
  • कलीसिया के मंच पर इकठ्ठे होने से पहले कौन-सी बातें मेरे हृदय में एकता की राह बनाती हैं?

Cross-references (संक्षिप्त संदर्भ) और उनके अर्थ

— स्तोत्रार्थ से प्रेरणा: प्रेम और भाइचारे के परम आधार को पुष्ट करना।

— एब्राहिमिक समुदाय के उदाहरण: समूह-योजनाओं में एकता कैसे सक्रिय रूप से प्रकट होती है।

— गिनती-गत पाठ: समुदाय की गतिशीलता और सम्मान के लिए आवश्यक नियमों का संकेत।

संक्षिप्त समापन

1 कुरिन्थियों 11:18 हमें याद दिलाता है कि कलीसिया का वास्तविक अवतरण एकता में है। फूट और विभाजन से बचना, प्रेम और सम्मान से एक-दूसरे को गले लगाना—यही प्रभु यीशु के साथ मिलकर सेवा करने की दिशा है। यह संदेश हर स्थानीय चर्च के लिए आज भी लागू है।

नोट: नीचे उद्धृत एकदम स्पष्ट पाठ से सीधे शब्दों में Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के किसी समानार्थी वाक्यों के छोटे अंश उपलब्ध हों तो केवल उन्हीं के संक्षिप्त उद्धरण दिए जाते हैं; अन्यथा मूल विचारों को पुनः प्रस्तुत किया गया है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

1 कुरिन्थियों 11:18 समानांतर पद और संबंधित वचन

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क्योंकि अब तक शारीरिक हो। इसलिए, कि जब तुम में ईर्ष्या और झगड़ा है, तो क्या तुम शारीरिक नहीं? और मनुष्य की रीति पर नहीं चलते?

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यहाँ तक सुनने में आता है, कि तुम में व्यभिचार होता है, वरन् ऐसा व्यभिचार जो अन्यजातियों में भी नहीं होता, कि एक पुरुष अपने पिता की पत्‍नी को रखता है। (लैव्य. 18:8, व्य. 22:30)

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