Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
1 कुरिन्थियों 11:1 1 कुरिन्थियों 11:2 1 कुरिन्थियों 11:3 1 कुरिन्थियों 11:4 1 कुरिन्थियों 11:5 1 कुरिन्थियों 11:6 1 कुरिन्थियों 11:7 1 कुरिन्थियों 11:8 1 कुरिन्थियों 11:9 1 कुरिन्थियों 11:10 1 कुरिन्थियों 11:11 1 कुरिन्थियों 11:12 1 कुरिन्थियों 11:13 1 कुरिन्थियों 11:14 1 कुरिन्थियों 11:15 1 कुरिन्थियों 11:16 1 कुरिन्थियों 11:17 1 कुरिन्थियों 11:18 1 कुरिन्थियों 11:19 1 कुरिन्थियों 11:20 1 कुरिन्थियों 11:21 1 कुरिन्थियों 11:22 1 कुरिन्थियों 11:23 1 कुरिन्थियों 11:24 1 कुरिन्थियों 11:25 1 कुरिन्थियों 11:26 1 कुरिन्थियों 11:27 1 कुरिन्थियों 11:28 1 कुरिन्थियों 11:29 1 कुरिन्थियों 11:30 1 कुरिन्थियों 11:31 1 कुरिन्थियों 11:32 1 कुरिन्थियों 11:33 1 कुरिन्थियों 11:34



पदस्तर: 1 कुरिन्थियों 11:30 — इसी कारण तुम में बहुत से निर्बल और रोगी हैं, और बहुत से सो भी गए।
परिचयात्मक सेटिंग
Paul लिखता है एक सेश्न में जो ईश्वरीय आहार-परंपरा (उसी पवित्र रात्रिभोज) से जुड़ा है। Corinth में पवित्र भोज के समय असंयम, द्वेष और अराजकता दिखती है, जिससे कुछ सदस्य परमेश्वर के सामने उपयुक्त स्वरूप में नहीं आ पाते। इस पंक्ति में लेखक स्पष्ट करते हैं कि क्यों अनेक विश्वासियों को शारीरिक और आध्यात्मिक परिणाम भुगतने पड़ते हैं: गलत आयोजन, आत्म-स्वार्थ और पवित्रता के विरुद्ध वास्तविक खतरे।
ईश्वर और विश्वास की पहचान: इस वचन से क्या उजागर होता है
यह पाठ यह बताता है कि पवित्रता का उल्लंघन ईश्वर की कृपा के प्रति अत्यधिक खतरा बन सकता है। प्रभु के सामने भक्ति को आत्म-उन्नति, भाग-भाग और अस्थायी आनंद के बजाय नम्रता, सम्मान और स्पष्टता से देखा जाना चाहिए। जब पवित्र भोज में सम्मान और एकता टूटती है, तब परमेश्वर की महिमा कम पड़ती है और संताप-दोष का समय आता है।
मुख्य शब्दों की स्पष्टता
अनुशासन और सुमति की दिशा
पवित्र भोज के समय सामुदायिक भागीदारी का सही ढंग से होना आवश्यक है। पवित्रता के बिना, आशीर्वाद अवरोधित होता है; इस कारण विश्वासियों को आत्म-नियमन, प्रेमपूर्वक औचित्य के साथ-smearing से बचना चाहिए। यह पवित्रता-प्रथा का सार है—एकता, प्रेम और सम्मान।
अन्य संबंधित आयतें (संकेतित संदर्भ)
- मरकुस 7:20-23: भीतरी पापों पर ध्यान दें जो मनुष्य के भीतर से आते हैं—अन्याय, अभिमान और शत्रुता।
- इब्रानियों 12:14: पवित्रता के लिए प्रयत्न करना और शांति के साथ सभी के साथ रहने की महत्ता।
- रोमियों 15:5-6: ईश्वर की कृपा से एकमत और एक-दूसरे के सहयोग की प्रेरणा।
वर्तमान अनुशासन और जीवंत उपयोग
आज की सच्चाई यह है कि चर्च का हर सदस्य पवित्र भोज के समय आदर और सम्मान के साथ भाग ले। चर्च-समुदाय में कहा गया है कि किसी भी तरह का पक्षपात, असमानता या गड़बड़ी विश्वास की उन्नति रोकती है। सामुदायिक भोज के समय हमें यह याद रखना चाहिए कि यह एकता का प्रतीक है, न कि व्यक्तिगत स्वार्थ का मंच।
संक्षिप्त एकीकृत सार
1 कुरिन्थियों 11:30 हमें सिखाता है कि पवित्रता और सामुदायिक सम्मान के बिना आशीर्वाद अधूरा रहता है। परमेश्वर की गरिमा के अनुरूप जीवन जीना, आत्मसमर्पण और भाइयों के प्रति देखभाल इस वचन की रीढ़ है। यह मगह के समान है—सामुदायिक एकता के लिए स्वयं को न्योछावर करना और पवित्र भोज की मर्यादा का पालन करना।
महत्वपूर्ण उद्धरण (जहाँ उपलब्ध): Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के सार्वजनिक-डायसन टिप्पणीकारों से सीधे शब्दोत्तर उद्धरण इस पाठ के अनुरोध के अनुसार एक साथ समाहित नहीं किए गए हैं; यदि आपकी सुविधा हो तो मैं उनके स्पष्ट छोटे उद्धरणों को स्रोत-संदर्भ के साथ अलग से दे सकता हूँ।