Old Testament
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1 कुरिन्थियों 14:1 1 कुरिन्थियों 14:2 1 कुरिन्थियों 14:3 1 कुरिन्थियों 14:4 1 कुरिन्थियों 14:5 1 कुरिन्थियों 14:6 1 कुरिन्थियों 14:7 1 कुरिन्थियों 14:8 1 कुरिन्थियों 14:9 1 कुरिन्थियों 14:10 1 कुरिन्थियों 14:11 1 कुरिन्थियों 14:12 1 कुरिन्थियों 14:13 1 कुरिन्थियों 14:14 1 कुरिन्थियों 14:15 1 कुरिन्थियों 14:16 1 कुरिन्थियों 14:17 1 कुरिन्थियों 14:18 1 कुरिन्थियों 14:19 1 कुरिन्थियों 14:20 1 कुरिन्थियों 14:21 1 कुरिन्थियों 14:22 1 कुरिन्थियों 14:23 1 कुरिन्थियों 14:24 1 कुरिन्थियों 14:25 1 कुरिन्थियों 14:26 1 कुरिन्थियों 14:27 1 कुरिन्थियों 14:28 1 कुरिन्थियों 14:29 1 कुरिन्थियों 14:30 1 कुरिन्थियों 14:31 1 कुरिन्थियों 14:32 1 कुरिन्थियों 14:33 1 कुरिन्थियों 14:34 1 कुरिन्थियों 14:35 1 कुरिन्थियों 14:36 1 कुरिन्थियों 14:37 1 कुरिन्थियों 14:38 1 कुरिन्थियों 14:39 1 कुरिन्थियों 14:40



1 कुरिन्थियों 14:5 का टिप्पणी-धारणा
पद अध्याय 14 में पौलुस कलीसिया के आवाहन के साथ बहुभाषी-अनुवाद और भविष्यद्वाणी के बीच संतुलन स्थापित करते हैं। यहाँ वे स्पष्ट करते हैं कि उच्चतम लाभ के लिए कलीसिया को भविष्यद्वाणी की सेवा अधिक महत्वपूर्ण लगती है, ताकि सुनने वाले के लिए आत्मिक उन्नति और स्पष्ट शिक्षण हो सके। यह अध्याय चर्च में भाषाओं के सही प्रयोग की दिशा देता है—स्वतः सुख-सामर्थ्य के लिए नहीं, बल्कि समुदाय के लिए उन्नति।
केंद्रीय अर्थ
पवित्र आत्मा के प्रभाव से बहुभाषी बोलना तभी उपयोगी है जब वह कलीसिया की उन्नति के लिए करते हों; अन्यथा अनुवाद और स्पष्टता से लाभ कम रहेगा। भविष्यद्वक्ता की भावना और वाक्यों की स्पष्टता से प्रेरित संदेश सुनने वालों के हृदयों में उत्तेजना, विश्वास और प्रेरणा भरती है।
मुख्य विषय
क्रॉस-रेफरेंसेज (संक्षेप)
- रोमी 12–14 अध्याय में प्रतिभाओं के विविध प्रयोग का संतुलन। भाषा-भाषण और भविष्यद्वाणी के बीच समन्वय की आवश्यकता स्पष्ट होती है।
- हिब्र 13:9-10 जैसी शिक्षाएं स्थिरता और स्पष्टता के महत्व पर बल देती हैं, ताकि विश्वास-समुदाय को भ्रम न हो।
- वापस 1 कुरिन्थियों 12:10 में शब्द-उच्चारण और कलाकारी के स्थान पर प्रार्थना और प्रेम का उद्देश्य उजागर होता है।
विचार-प्रयोग
- समुदाय के लिए उपयोगी भाषा-उन्नति: यदि किसी सदस्य को अन्य भाषा समझ में नहीं आती, तो उसका लाभ कैसे सुनिश्चित किया जाए? संभव है कि भाषाओं के साथ-साथ बहुभाषी संदेशों का स्पष्ट अनुवाद, शिक्षण और प्रोत्साहन का संयोजन आवश्यक हो।
- भविष्यद्वाणी की भूमिका: प्रेरणा, निर्देश और चेतावनी—ये सब एक स्पष्ट, उद्धारक संदेश के रूप में प्रस्तुत हों, ताकि श्रोताओं के उद्धार की दिशा बने।
अनुकरणीय टिप्पणी से प्रेरणा
मैथ्यू हेनरी की धारणा के अनुसार यह संकेतन है कि बोलने की विविधता तब ही फायदेमंद है जब वह प्रेम और सजगता से संचालित हो।
एल्बर्ट बेर्न्स का विचार है कि भाषाओं के साथ स्पष्ट्ता का संतुलन बनना चाहिए; अन्यथा लोग आत्मिक लाभ से चूक जाते हैं।
एडम क्लार्क बताते हैं कि उपदेशक की मुख्य जिम्मेदारी श्रोताओं की धार्मिक उन्नति है, न कि अपने निजी प्रदर्शन की चमक।
संक्षिप्त निष्कर्ष
इस पद का संदेश यह है कि बहुभाषी प्रतीकों का प्रयोग तब ही भरोसेमंद है जब वह कलीसिया की उन्नति के लिए स्पष्ट अनुवाद और लाभकारी शिक्षण के साथ जुड़ा हो। भविष्यद्वाणी की भूमिका, यदि वह सबको समझ में आए, तो कलीसिया के विश्वास-नवीनकरण को सुदृढ़ करती है।
संक्षेप-सार: कलीसिया में मौखिक चमत्कारों का सही उपयोग वही है, जो सुनने वाले के लिए स्पष्ट, प्रेरक और पवित्र आत्मा से संचालित हो।