Old Testament
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1 तीमुथियुस 3:10 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
और ये भी पहले परखे जाएँ, तब यदि निर्दोष निकलें तो सेवक का काम करें।
1 तीमुथियुस 3:10 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
1 तीमुथियुस 3:10 समानांतर पद और संबंधित वचन
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1 तीमुथियुस 3:13 (HINIRV) »
क्योंकि जो सेवक का काम अच्छी तरह से कर सकते हैं, वे अपने लिये अच्छा पद और उस विश्वास में, जो मसीह यीशु पर है, बड़ा साहस प्राप्त करते हैं।

1 तीमुथियुस 5:22 (HINIRV) »
किसी पर शीघ्र हाथ न रखना* और दूसरों के पापों में भागी न होना; अपने आपको पवित्र बनाए रख।

प्रेरितों के काम 6:1 (HINIRV) »
उन दिनों में जब चेलों की संख्या बहुत बढ़ने लगी, तब यूनानी भाषा बोलनेवाले इब्रानियों पर कुड़कुड़ाने लगे, कि प्रतिदिन की सेवकाई में हमारी विधवाओं की सुधि नहीं ली जाती।
अर्थ का प्रत्यक्ष सार
1 तीमुथियुस 3:10 में कहा गया है कि सेवक (या प्रधान-सेवक) के चयन से पहले उनका क्रमबद्ध परीक्षण किया जाए ताकि निर्दोष पाया जा सके; फिर वे सेवक के पद पर नियुक्त हों।
संदर्भ-विवेक्षा
यह पंक्ति प्रथम पत्री तीमुथियुस की पत्री में उन निर्देशों का भाग है जो पापित व्यवस्थाओं और पंथीय संगठनों के ठाठ-तरह को ठीक रखने के लिए मसीह की चर्चा में एक सुव्यवस्थित, नैतिक-उत्कृष्टता वाले मानदंड सुझाते हैं। चर्च के अधिकारी, विशेषकर ईश्वर के भरोसेमंद सेवक, के लिए यह मानक है कि वे पहले स्वतंत्र रूप से परीक्षण से गुजरें ताकि उनकी विश्वसनीयता और व्यवहार उनके पद की जिम्मेदारियों के अनुरूप हो।
व्याख्यात्मक अवलोकन
- पहले परख: यह केवल सिद्ध-धर्म और आध्यात्मिक गुणों का आकलन नहीं है, बल्कि व्यवहारिक जीवन के प्रमाण भी मांगे जाते हैं। जाँच से आश्वासन मिलता है कि व्यक्ति पत्नी-परिवार, कार्य-परंपरा, और समर्पण में संतुलित है।
- निर्दोष होना: यहाँ ‘निर्दोष’ का आशय न मानवीय श्रेष्ठता से है, बल्कि आचरण, निष्कपटता, और चर्च-संप्रदाय के नियमों के अनुरूप जीवन से है। यह परीक्षण प्रायः जैसे परिवार-परिवार नियमन, प्रवृत्ति की कठोरता आदि को शामिल करता है।
- सेवक का काम: एक निष्कपट, समर्थ और ईश्वर-निष्ठ सेवक से अपेक्षा है कि वह विश्वास के मार्ग में स्थिर, नम्र, दयालु और अनुशासित रहे।
पूर्ववर्ती नीतिगत संकेत (Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के प्रकाश में)
यद्यपि ये विद्वान प्राचीन-चरित्रों से हैं, परन्तु उनके विचार इस वाक्य के साथ संगत रहते हैं: वे संकेत देते हैं कि मानक कठोर हो सकता है, पर उद्देश्य पवित्रता और विश्वस्त-सेवकों की स्थापना है।
थीमेटिक सार
क्रॉस-रेफरेंसेस और संक्षिप्त स्पष्टीकरण
1) तीतुस 1:6-9 — सत्यापित उपदेशकों के गुण: आत्म-नियंत्रण, अप्रिय-व्यवहार से बचना, और धर्म-निष्ठा में दृढ़ता।
2) तीतुस 2:3-5 — पितामह-सम्पादन और युवाओं के लिए नम्रता, शील-पालन, और पवित्र-जीवन की प्रेरणा।
3) 1 पतरस 5:2-3 — चरित्र-आयाम: सहानुभूति, निःस्वार्थता, और कर्म-नियोजन के साथ सेवा करना।
संक्षिप्त व्यवहारिक takeaway
चर्च के लिए जो नेतृत्व चयन होता है, वह केवल प्रभाव-शक्ति नहीं बल्कि आचरण-आधार पर होता है। परीक्षण से गुजरकर ही उपयुक्तता पाई जाती है ताकि विश्वास-समुदाय स्थिर और नम्र नेतृत्व पाकर सुस्पष्ट मार्ग पर चले।