Old Testament
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1 तीमुथियुस 3:3 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
पियक्कड़ या मार पीट करनेवाला न हो; वरन् कोमल हो, और न झगड़ालू, और न धन का लोभी हो।
1 तीमुथियुस 3:3 पद-दर-पद बाइबल टीका
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1 तीमुथियुस 3:3 समानांतर पद और संबंधित वचन
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तीतुस 1:7 (HINIRV) »
क्योंकि अध्यक्ष को परमेश्वर का भण्डारी होने के कारण निर्दोष होना चाहिए; न हठी, न क्रोधी, न पियक्कड़, न मार पीट करनेवाला, और न नीच कमाई का लोभी।

तीतुस 3:2 (HINIRV) »
किसी को बदनाम न करें*; झगड़ालू न हों; पर कोमल स्वभाव के हों, और सब मनुष्यों के साथ बड़ी नम्रता के साथ रहें।

यशायाह 28:7 (HINIRV) »
ये भी दाखमधु के कारण डगमगाते और मदिरा से लड़खड़ाते हैं; याजक और नबी भी मदिरा के कारण डगमगाते हैं, दाखमधु ने उनको भुला दिया है, वे मदिरा के कारण लड़खड़ाते और दर्शन पाते हुए भटके जाते, और न्याय में भूल करते हैं।
अर्थ का प्रत्यक्ष सार
1 तीमुथियुस 3:3 में प्रकट निर्देश स्पष्ट है: राष्ट्रीय पात्रता के लिए संरक्षक कोमल और दयालु बने, न कि पियक्कड़, मार-पीट करनेवाला, झगड़ालू या धन से लोभी। इसका मतलब है कि ईश्वरीय सेवा में नियुक्त व्यक्ति का स्वभाव विनम्र, संयमी और आत्म-नियंत्रण रखने वाला होना चाहिए, ताकि वह सार्थक उदाहरण बन सके और विश्वास परिवार में शांति का मार्ग प्रशस्त कर सके।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यहोवा-ईश्वरीय योजना के अनुसार कृपित सेवक-आचार संहिता में प्रत्येक गुरु-चयनित को एक जैसे मानक दिए गए हैं। यह पद प्राचीन चर्च के लिए संरक्षक की शारीरिक, नैतिक और आध्यात्मिक प्रति-छवि के रूप में है—जो समुदाय के विश्वासिक जीवन को निर्देशित और संरक्षित करे। पंचांग/धर्म-जीवन में ऐसे गुण एक उदाहरण-संकेत हैं कि कैसे एक संरक्षक अपने प्रभाव से पीलापन, अन्याय और दुर्व्यवहार से दूर रहे।
व्याख्यात्मक अवलोकन
थीमेटिक संकेत (संक्षेप)
संबद्ध पदों से संलग्न अनुमान
चर्च-गुरुओं के नमूनों पर विचार करते समय, अन्य उद्धरण यह संकेत देते हैं कि संयम और नम्रता विश्वास-जीवन की नींव हैं (उदा. पवित्र व्यवहार, प्रेमपूर्ण संबंध)। याद रखें, यहाँ व्यक्तिगत दोषों पर नहीं, बल्कि संरक्षक के सार्वजनिक आचरण की बात है ताकि विश्वास-समुदाय में दृष्य-उदाहरण बने रहें।
क्रॉस-रेफरेंसेज़ और उनके स्पष्टीकरण
• तीतुस 1:7-8 - संरक्षक के गुणों में आत्म-नियंत्रण और संतोष का स्थान, ताकि वह "दुष्ट प्रवृत्तियों" से दूर रहे और "परमेश्वर के मनोनित सेवक" बने।
• 1 पतरस 5:2-3 - मत-ख़तरे, दायित्व-आचरण और नम्र नेतृत्व के सिद्धांत; एक संरक्षक अपने अभिभावक-रूप में विश्वास समुदाय के लिए मिसाल हो।
• Titus 2:6-7 - युवाओं के प्रति नीतिगत अनुशासन और उपदेशों के साथ व्यवहार का संयम; वास्तविक उदाहरण से प्रेरणा मिलती है।
व्यावहारिक takeaway
यदि कोई संरक्षक बनना चाहता है, तो पहले अपने आचरण में संतुलन और नम्रता विकसित करें—शराब से दूरी, अहंकार से विरक्ति, हिंसा-झगड़े से परहेज़, और धन-लालित से आत्म-नियंत्रण। इन गुणों से समुदाय में विश्वास-युग्म का निर्माण होता है और नेतृत्व-उदाहरण बनता है।
महत्वपूर्ण उद्धरण (पोषक टिप्पणियाँ)
यदि आप Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के समान्य-आउटपुट से उद्धरण चाहते हैं:
• “A bishop must be not given to wine" — Henry के विश्लेषण में संयम की महत्ता स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।
• “Not given to wine, nor striker, nor thief” — Barnes के निष्कर्ष में यह गुण-स्तर गुणवत्ता और नियंत्रण पर केंद्रित है।
• “Not given to filthy lucre” — Clarke के शब्दों में धन-लोभ पर स्पष्ट सावधानी दिखाई देती है।