Old Testament
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1 तीमुथियुस 3:15 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
कि यदि मेरे आने में देर हो तो तू जान ले कि परमेश्वर के घराने में जो जीविते परमेश्वर की कलीसिया है, और जो सत्य का खम्भा और नींव है; कैसा बर्ताव करना चाहिए।
1 तीमुथियुस 3:15 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
1 तीमुथियुस 3:15 समानांतर पद और संबंधित वचन
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1 पतरस 2:5 (HINIRV) »
तुम भी आप जीविते पत्थरों के समान आत्मिक घर बनते जाते हो, जिससे याजकों का पवित्र समाज बनकर, ऐसे आत्मिक बलिदान चढ़ाओ, जो यीशु मसीह के द्वारा परमेश्वर को ग्रहणयोग्य हो।

मत्ती 16:18 (HINIRV) »
और मैं भी तुझ से कहता हूँ, कि तू पतरस* है, और मैं इस पत्थर पर अपनी कलीसिया बनाऊँगा, और अधोलोक के फाटक उस पर प्रबल न होंगे।

1 तिमुथियुस 3:15 — परमेश्वर के घराने और कलीसिया की मर्यादा
मुख्य interpretive point: यदि मेरे आने में देर हो, तो तू यह जान ले कि परमेश्वर के घराने में जो जीवित परमेश्वर की कलीसिया है, और जो सत्य का खम्भा और नींव है; उसे कैसे ठीक-बुरे बर्ताव के साथ संभाला जाना चाहिए। प्रेरित पौलुस द्वारा यह शब्द कलीसिया की संरचना, आचार-विनय और विश्वास के स्थायित्व की आवश्यकता को दर्शाते हैं।
संदर्भ-वाचनात्मक पृष्ठभूमि
पौलुस का उद्देश्य स्थानीय गुण-संहिता और चुने हुए elder/अधिकारियों की योग्यता को स्पष्ट करना है ताकि कलीसिया भीतर से स्थिर रहे। इस वाक्य से पहले और बाद की पंक्तियाँ वरिष्ठ-उम्र के पुरुषों और महिलाओं की आचरण-विधि, चुनाव-प्रक्रिया और कलीसिया के संचालन के मानक पर प्रकाश डालती हैं। यहाँ “घराने” (household) का अर्थ सामान्य परिवार नहीं, बल्कि विश्वासी समुदाय के एकीकृत समुदाय से है जो ईश्वरीय नियमों के अनुसार एक साथ चलना सीखता है।
वाक्य-गठन और शब्दार्थ
“जीविते परमेश्वर की कलीसिया” से तात्पर्य है वह समुदाय जो व्यवस्थित रूप से परमेश्वर के स्पिरिट से प्रेरित होकर जीवन देता है—न केवल बाहर से दिखावा, बल्कि आंतरिक परिवर्तन द्वारा निर्मित विश्वास और क्रियाओं से। “सत्य का खम्भा और नींव” (breadth: pillar and support) यह दर्शाते हैं कि कलीसिया सत्य पर टिके रहने की अद्वितीय जिम्मेदारी है; सरकार-निर्णय, शिक्षा, उपासना और नैतिक आचरण सभी का केंद्र सत्य है।
ट्रेडिशनल कमेंट्री इनपुट
धर्मशास्त्री Matthew Henry कहते हैं कि कलीसिया के खम्भे की योग्यता और उसकी सच्चाई के बिना विश्वास टिक नहीं सकता; यहां स्पष्ट निर्देश है कि जो लोग अगुवाई करते हैं, उन्हें न केवल धारणा में पक्का होना चाहिए, बल्कि व्यवहार में भी confirming evidence देना चाहिए। Albert Barnes और Adam Clarke जैसे सार्वजनिक-डायस से उद्धृत टिप्पणियाँ इस विचार को सुदृढ़ करती हैं कि कलीसिया का उच्च-स्तर संरचना सत्य और पवित्र जीवन के लिए उत्तरदायी है। यदि उद्धरणित किसी पंक्ति में अस्थायी शब्दावली दिखे, तो ध्यान दें कि यह संदर्भ, नेक नियत, और समुदाय के उत्तम कल्याण के समन्वय पर आधारित है।
कलीसिया से जुड़ी बातें: तीन आयाम
壤Crossings across Scripture
परमेश्वर की कलीसिया का खम्भा-नींव होने का विचार अन्य बाइबिल पक्षों में भी मिलता है: - प्रकाशितवाक्य में ईश्वर की व्यवस्था के साथ समुदाय-जीवन का स्थायित्व; - प्रेरितों के काम में चर्च के रस्से की संरचना का वर्णन; - ईफिसियों 4 और 5 में एकता और आंडरस्टैंडिंग के मार्गदर्शन के मद्देनजर। इन सहसंबंधों से स्पष्ट होता है कि सत्य-आचरण और लोक-धर्म के साथ समुदाय की एकता ללא-परिवर्तन बनी रहे।
स्व-चिंतन के लिए प्रश्न
- क्या मेरे समूह/गृहस्थी में या चर्च-समुदाय में मेरा आचरण सत्य के खम्भे के अनुरूप है?
- क्या मैं नेतृत्व के लिए उपयुक्त गुणों को विकसित कर रहा हूँ: ईमानदारी, नम्रता, संयम और lärm?
- क्या मैं कलीसिया के भीतर एकता, प्रेम और शुद्धाचार की रक्षा के लिए सक्रिय भागीदार हूँ?
संक्षिप्त निष्कर्ष
1 तीमुथियुस 3:15 कलीसिया की स्थिरता के लिए आचार-आदर्श स्थापित करता है। परमेश्वर के घराने के सदस्यों के रूप में, सत्य का खम्भा और नींव बनना, नेतृत्व-योग्यता और व्यवहार-मानदंड के साथ जुड़ा है। चर्च भीतर से सत्य की रोशनी बनाए रखे, और यह सुनिश्चित करे कि हर गतिविधि परमेश्वर की महिमा के लिए हो।
संक्षेपित उद्धरण (यदि संदर्भ उपलब्ध)
Matthew Henry: “...the church of God, and the pillar and ground of truth” (संदर्भ के समान भावार्थ परिप्रेक्ष्य में संक्षेपित). Albert Barnes और Adam Clarke के विश्लेषणों में भी यह तथ्य मिलता है कि कलीसिया की आचरण-नीति का सत्य पर टिकना अनिवार्य है।
पन्ने-आर्कषण
Cross-references: ईफिसियों 2:19-22 (कलीसिया निर्माण की परिकल्पना), क्ह्यू 1 पतरस 2:4-5 (जीवित रImplications), तीतुस 1:5-9 (नेतृत्व-योग्यता के मानक). प्रत्येक संदर्भ कलीसिया की एकता, पवित्र जीवन और सच्चे शिक्षण की रक्षा के लिए मार्गदर्शन देता है.