Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
2 राजाओं 18:1 2 राजाओं 18:2 2 राजाओं 18:3 2 राजाओं 18:4 2 राजाओं 18:5 2 राजाओं 18:6 2 राजाओं 18:7 2 राजाओं 18:8 2 राजाओं 18:9 2 राजाओं 18:10 2 राजाओं 18:11 2 राजाओं 18:12 2 राजाओं 18:13 2 राजाओं 18:14 2 राजाओं 18:15 2 राजाओं 18:16 2 राजाओं 18:17 2 राजाओं 18:18 2 राजाओं 18:19 2 राजाओं 18:20 2 राजाओं 18:21 2 राजाओं 18:22 2 राजाओं 18:23 2 राजाओं 18:24 2 राजाओं 18:25 2 राजाओं 18:26 2 राजाओं 18:27 2 राजाओं 18:28 2 राजाओं 18:29 2 राजाओं 18:30 2 राजाओं 18:31 2 राजाओं 18:32 2 राजाओं 18:33 2 राजाओं 18:34 2 राजाओं 18:35 2 राजाओं 18:36 2 राजाओं 18:37



मुख्य व्याख्या-सार: दाऊद के समानिक आचरण की निष्ठा (2 राजाओं 18:3)
यह पंक्ति इस बात पर प्रकाश डालती है कि राजा ने अपने पूर्वज दाऊद के पवित्र आचरण और यहोवा की दृष्टि में भलाई के मानकों को क्यों अपनाया। यह बताती है कि न्याय और धार्मिक निष्ठा राजा के शासन के केंद्र में रहे, ठीक वैसे ही जैसे दाऊद ने किया था।
साहित्यिक संदर्भ
किंग्स (2 राजाओं) में पाठ-परिसर राजा ह के शासन की नैतिकता का मूल्यांकन करता है। यहाँ “जैसा उसके मूलपुरुष दाऊद ने किया था” महिमा-परक इतिहास-संकेत है जिसे लेखक ने यह स्थापित करने के लिए चुना है कि राजा ने अपने दायित्वों को ईश्वर-आज्ञा के अनुरूप निभाया। दाऊद के बारे में यह मानक विपक्षी राजाओं की तुलना में अधिक कठोर है, क्योंकि दाऊद की आत्म-स्वीकृति और ईश्वर के प्रति विनम्रता बहुधा पाठ में उद्धृत है।
प्रमुख theological significance (ोचित गूढ़ार्थ)
यह-वाक्य यह दर्शाता है कि राजा के शासन का मापक यह नहीं है कि उसने कितने कार्य किए, बल्कि उसने दाऊद की नीति-निष्ठा को अपना आचरण कैसे बनाया। दाऊद के मार्ग पर चलना इंगित करता है कि ईश्वर की दृष्टि में ठीक वही है जो उसने ठीक माना था—उचित भक्ति, नैतिकता, और ईश्वर-अनुदत्त आचरण। इसका उद्देश्य पाठक के लिए यह है कि नीति-निर्णयों में व्यक्तव्य प्रबल हो जाए: धार्मिकता शासन की पहचान बनती है।
Cross-references (संक्षिप्त स्पर्श और समझ)
चिंतन के प्रश्न
संक्षिप्त निष्कर्ष
2 राजाओं 18:3 यह स्मरण कराता है कि महान नेतृत्व उन्हीं पथों पर टिक सकता है जो दाऊद ने अपनाए थे—ईश्वर की दृष्टि में जो ठीक है वही सही है। यह पाठ सरकार-नीति और व्यक्तिगत चरित्र के बीच का गहरा संगम दिखाता है: आचरण एक आदर्श नहीं, बल्कि ईश्वर के नियमों के अनुरूप जीवन-यापन की निष्ठा है।
सीधे उद्धरणों के संकेत
नीचे तीन प्रसिद्ध कॉमेंटेरों के विशिष्ट, मूल-स्वर उद्धरण-कथन (short quotes) उपलब्ध हैं। ध्यान दें कि ये संक्षिप्त उद्धरण केवल संदर्भ के लिए दिए गए हैं: