Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
2 राजाओं 18:1 2 राजाओं 18:2 2 राजाओं 18:3 2 राजाओं 18:4 2 राजाओं 18:5 2 राजाओं 18:6 2 राजाओं 18:7 2 राजाओं 18:8 2 राजाओं 18:9 2 राजाओं 18:10 2 राजाओं 18:11 2 राजाओं 18:12 2 राजाओं 18:13 2 राजाओं 18:14 2 राजाओं 18:15 2 राजाओं 18:16 2 राजाओं 18:17 2 राजाओं 18:18 2 राजाओं 18:19 2 राजाओं 18:20 2 राजाओं 18:21 2 राजाओं 18:22 2 राजाओं 18:23 2 राजाओं 18:24 2 राजाओं 18:25 2 राजाओं 18:26 2 राजाओं 18:27 2 राजाओं 18:28 2 राजाओं 18:29 2 राजाओं 18:30 2 राजाओं 18:31 2 राजाओं 18:32 2 राजाओं 18:33 2 राजाओं 18:34 2 राजाओं 18:35 2 राजाओं 18:36 2 राजाओं 18:37



पाठ-सार और पादसंदेश (2 राजाओं 18:31, HINIRV)
यह पदतुवाद अंश शहज़दी अहंकार और निर्भरता के बीच की कड़ी को दर्शाता है। जब अश्शूर के राजा के अय्याशी और दुराग्रहपूर्ण अस्त्र-प्रलाप सुनाई देता है, तो वह यह आज़माइश करता है कि राजा यूचित भेंट और उकसावे के द्वारा अपने आक्रमण से हमें विचलित करे। परन्तु हिंसा में भी आत्मा की निरन्तरता और विश्वास की दृढ़ता चाहिए। इस वचन में भाषण के तीखे शब्दों के पीछे एक गहरी चेतावनी है: भरोसा करता है कि भेंटों और समझौते से भी शत्रु के कदम थम जाते हैं, यह सत्य नहीं है जब तक परमेश्वर की अनुमति न हो।
पद का अध्ययन: अध्याय के भीतर स्थान
यह पंक्ति आत्म-विश्वास के विरुद्ध एक बहाने कीIron- curtain है: अश्शूर का राजा कहता है, "मुझे प्रसन्न करो, मेरे पास निकल आओ," और हर एक अपने फल-फूल के साथ अपनी-अपनी प्यास बुझाने में लगे रहे। यह शब्द एक नाटक शैली की तरह हैं, जहाँ शत्रु की भाषा में बा-हृदय दमन के साथ दखल लेने की इच्छा है जबकि हिजकिय्याह के समय का ईश्वर-निर्भरता सर्वोपरि रहने की मांग है।
मुख्य आध्यात्मिक पाठ
1) परमेश्वर के विरुद्ध मानव-शक्ति का अंहकार: बाहरी दबाव और धमकी भी हमारे ईश्वर-आधार को हिला नहीं सकता जब हम परमसत्य को पकड़ते हैं।
2) आश्रय-स्वरूप विश्वास: भय के क्षणों में भी ईश्वर पर भरोसा बनाये रखना आवश्यक है; भेंट और समझौता केवल अस्थायी समाधान दे सकता है, परन्तु परमेश्वर की योजना स्थिर रहती है।
3) विवेकपूर्ण विनम्रता बनाम चालाकी से बचना: शत्रु की मांगों के बीच बुद्धिमानी से निर्णय लेना चाहिए; परमेश्वर के नियम और वचन संरक्षित रहते हैं।
अन्य बाइबिल उद्धरणों के तुलनात्मक संकेत
इन संदर्भों में उद्देश्य यह है कि भय-घेरा समय भी ईश्वर की संप्रभुता के भीतर आते हैं और विश्वास का व्यक्तित्व मजबूत होता है।
व्यावहारिक अनुप्रयोग
संक्षेपण
2 राजाओं 18:31 में अश्शूर के आक्रमणकारी शब्दों के मध्य हिजकिय्याह के समय के विश्वास की परीक्षा सामने आती है। यह वचन हमें याद दिलाता है कि शत्रु की धमक से डरना नहीं चाहिए, और न ही बाहरी भेंटों से शांति मिलती है; सच्चा समाधान ईश्वर की सुनी-समझी योजना में है। परमेश्वर के साथ स्थिर विश्वास ही हमारी सुरक्षा है और हमारी दिशा बनाती है।
सूत्र-उद्धरण (अगर उपलब्ध)
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