Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
2 राजाओं 18:1 2 राजाओं 18:2 2 राजाओं 18:3 2 राजाओं 18:4 2 राजाओं 18:5 2 राजाओं 18:6 2 राजाओं 18:7 2 राजाओं 18:8 2 राजाओं 18:9 2 राजाओं 18:10 2 राजाओं 18:11 2 राजाओं 18:12 2 राजाओं 18:13 2 राजाओं 18:14 2 राजाओं 18:15 2 राजाओं 18:16 2 राजाओं 18:17 2 राजाओं 18:18 2 राजाओं 18:19 2 राजाओं 18:20 2 राजाओं 18:21 2 राजाओं 18:22 2 राजाओं 18:23 2 राजाओं 18:24 2 राजाओं 18:25 2 राजाओं 18:26 2 राजाओं 18:27 2 राजाओं 18:28 2 राजाओं 18:29 2 राजाओं 18:30 2 राजाओं 18:31 2 राजाओं 18:32 2 राजाओं 18:33 2 राजाओं 18:34 2 राजाओं 18:35 2 राजाओं 18:36 2 राजाओं 18:37



2 राजा 18:7 — क्यों यह व verse महत्त्वपूर्ण है
यह पद हमें यह दिखाता है कि परमेश्वर किस प्रकार अपने चयनित लोगों के साथ सक्रिय रूप से संगति बनाते हैं। यहाकी आत्मविश्वास नहीं; बल्कि यहुक्त दिव्य सहायता और नेतृत्व के कारण एश्शूर के विशाल साम्राज्य के विरुद्ध य्होश αντί राहर के विश्वास को बढ़ाता है। जहाँ मानवीय योजना अक्सर बदलती दिखती है, वहाँ परमेश्वर का साथ उसे सफलता और आत्म-निर्भरता दिलाता है।
परिप्रेक्ष्य और मूल विचार
पौराणिक-इतिहास की पृष्ठभूमि में यहूदियों की तत्कालीन स्थिति एक शक्तिशाली हमलावर साम्राज्य, अश्शूर के विरुद्ध है। यहोश-शासन के अंतर्गत रानी-राजाओं के सामने विभिन्न चुनौतियाँ आईं, पर हालात तब बदले जब यहोवा ने राजा के साथ अपना नाता बनाये रखा। वचन यह बताता है कि परमेश्वर इस्राइल के प्रति निष्ठावान रहा और जहाँ जहाँ वह गया, वहाँ उसका संचालन सफल रहा। साथ ही यह भी संकेत देता है कि अश्शूर के राजा के विरुद्ध उसकी अधीनता छोड़ देना ही यह बताता है कि शक्तियों के बावजूद वास्तविक विजय परमेश्वर की सहायता से मिलती है।
मुख्य संदेश
1) परमेश्वर के साथ एकाग्र विश्वास में विजय संभव है। 2) शासन-व्यवस्था में सत्ता का स्रोत परमेश्वर है, न कि मनुष्यों की στραtegy या सैन्य शक्ति। 3) कठिनाई के समय परमेश्वर अपने लोगों को आशीष और संरक्षण देता है ताकि वे भय के बजाय निर्भय होकर आगे बढ़ सकें।
पवित्र लेखन से संबद्ध नीतियाँ
- परमेश्वर के साथ रहना और उसी के आदेश से चलना, क्योंकिः वही समर्थक है।
- विश्वास के साथ साहस अधिक महत्वपूर्ण है than sheer बल; परमेश्वर ने सत्ता और स्वतंत्रता-स्थिति में भी साथ दिया है।
क्रॉस-रेफरेंस (संक्षेप में)
छोटा devotional निष्कर्ष
जीवन के हर बड़े प्रयास में कठिनाईयों के बीच भी हमें याद रखना चाहिए कि हमारा साथदाता वही है जो इतिहास में पहले भी चमत्कार दिखा चुका है। जैसे यहोवा ने अश्शूर से राजा को परास्त करने में सहायता दी, वैसे ही आज भी हमारी कमज़ोरी को उसकी ऊर्जा में बदला जा सकता है जब हम उसकी निर्देश पर चलते हैं और उसकी उपेक्षा नहीं करते। सरल विश्वास को बनाए रखना, दिन-प्रतिदिन उसकी वाणी पर निर्भर रहना और उसकी योजना के अनुसार कदम बढ़ाना—यही सही सफलता की कुँजी है।
धार्मिक संदर्भों के लिए उपयोगी पंक्तियाँ
यहेजकेल 37:14; योहशुआ 1:9; भजन 44:4-8
नोट: नीचे उद्धृत शब्दावली में लेखकगणों के स्थाई विचार हैं, किन्तु मूल विचार 2 राजा 18:7 के संदर्भ में है: यहोवा के साथ रहने पर सफलता मिलती है और सत्ता-प्रतिष्ठा परमेश्वर के हाथ में है।
मुख्य उद्धरण (नोट)
नोट: यदि उपलब्ध हो, Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के संक्षेपित विचार की एक-एक पंक्ति उद्धरण नीचे संकलित नहीं हैं; किन्तु उनके संवेदी बिंदु के अनुरूप सार-तसवीर प्रस्तुत की गयी है।