Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
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2 राजाओं 20:5 का Meaning और संदर्भ
यह उद्धरण युवराज हिजकिय्याह के लिए अभिमुख कर संदेश है: परमेश्वर बताता है कि उसने हिजकिय्याह की प्रार्थना सुनी और उसकी आँसू देखे। परमेश्वर कह रहा है कि वह उसे चंगा करेगा और कुछ दिन बाद यहूदियों के मंदिर (यहोवा के भवन) में जाकर शांति पा सकेगा।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
हिजकिय्याह का समय जिस संकट में वह था, वह अस्वस्थता और खतरे के बीच युगपत थी। मृत्यु के पास पहुँचे राजकुमार का सन्देश और भविष्य की उलझनों के बीच यह वचन आशा देता है कि परमेश्वर की दया सक्रिय है। यह भी दिखता है कि प्रार्थना और आँसू परमेश्वर के समीपता को स्पष्ट करते हैं—यही कारण है कि उत्तर देने में परमेश्वर ने चंगाई और templo में पूजा की राह बताई।
व्याख्यात्मक अवलोकन
क्रॉस-रेफरेंस और उनसे मिलने वाले संकेत
1) एक अन्य उद्धारक-क्रिया: दुख-सहायता के समय प्रभु अपने लोगों के लिए शीघ्र सहायता देते हैं; संदर्भ में यह विचार मिलता कि प्रभु के समक्ष दमित परिस्थितियों में भी आशा रहती है।
2) परमेश्वर की निष्ठा: पुराने नियम में कई स्थानों पर कहा गया है कि प्रभु कष्ट के समय भी अपने दयालु नागरिकों के लिए उत्तर देते हैं।
3) उत्साहपूर्ण पुनःस्थापना: मंदिर-पूजा की अनुमति और फिर जीवन के सामान्य क्रम की वापसी, विश्वास में पुनर्जीवन का संकेत देती है।
क्वाट्रों/हानि-टिप्पणियाँ
यहां के उद्धरण में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke से कोई विशिष्ट पूर्ण उद्धरण इस पेज पर नहीं दिया जा रहा; पर इन कॉमेंटेटर्स का समन्वय यह है कि प्रार्थना, दया और पुनःस्थापना एक साथ काम करते हैं, जिससे विश्वास में स्थिरता मिलती है।
संक्षिप्त मुख्य बिंदु
व्यावहारिक निष्कर्ष
कठिन समय में भी ईश्वर की दया पर भरोसा रखें; प्रार्थना और भरोसा दिखाने से उसकी कृपा प्रकट होती है। जीवन के पुनःस्थापना के लिए ईश्वर के साथ प्रार्थना-व्यक्ति का संबंध बनाए रखें, और समुदाय के साथ पूजन के अवसरों को महत्व दें।