Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
2 राजाओं 20:1 2 राजाओं 20:2 2 राजाओं 20:3 2 राजाओं 20:4 2 राजाओं 20:5 2 राजाओं 20:6 2 राजाओं 20:7 2 राजाओं 20:8 2 राजाओं 20:9 2 राजाओं 20:10 2 राजाओं 20:11 2 राजाओं 20:12 2 राजाओं 20:13 2 राजाओं 20:14 2 राजाओं 20:15 2 राजाओं 20:16 2 राजाओं 20:17 2 राजाओं 20:18 2 राजाओं 20:19 2 राजाओं 20:20 2 राजाओं 20:21



2 राजें 20:8 का सन्दर्भ और अर्थ
वृतांत में राजा होशिया के बिमार पड़ने पर हिजकिय्याह ने वास्तव में ईश्वर के प्रति अपनी सरल आस्था और विश्वासपूर्वक पूछताछ की थी। नबियों के संदेश से पूर्व, वह एक स्पष्ट संकेत चाहता था कि वह कैसे और कब अपने मंदिर को फिर से जा सकेगा। यह वाक्य आगे चलकर उस समय के भरोसे का संकेत देता है कि परमेश्वर अपने लोगों के आशीर्वाद के लिए निशान और संकेत देता है, ताकि उनकी विश्वसनीयता और आशा दृढ़ रहे।
मुख्य अर्थ
हिजकिय्याह के प्रश्न में एक गहरी सांसारिक-आस्था है: रोग के बीच वह जानना चाहता है कि परमेश्वर उसे चंगा करेगा और वह मंदिर की सेवा के अवसरों में भाग ले सकेगा। मिसाल देता है कि विश्वास नहीं केवल भविष्य की कठिनाइयों से मुक्त होने की इच्छा है, बल्कि जीवन के सामान्य क्रिया-कलापों को पुनः शुरू करने का संकेत भी चाहता है। यह एक पिता-जैसी बिनती है: मैं तेरे घर लौटना चाहता हूँ ताकि तुम्हारी आराधना फिर से हो सके।
संक्षिप्त थीम्स
Related cross-references (संक्षेप व्याख्या)
1) यशायाह 38:1-8 — हिजकिय्याह को शांति और चंगा होने का संकेत मिलना; भविष्य के संकेत के रूप में आश्वासन। यह एक समान संरचना है जिसमें रोग के समय परमेश्वर के उपहार की पुष्टि होती है।
2) रोमियों 8:28 — परमेश्वर की योजना में कठिनाइयों के साथ भी बहते हुए चंगा और उद्धार का उद्देश्य; विश्लेषण में आशा बनाये रखना।
3) यातना के समय परमेश्वर की उपस्थिति (भज 34:19; मत्ती 14:27) — संकट के समय ईश्वर की उपलब्धता से शांति मिलती है, और पुनः मंदिर-सेवा जैसी औपचारिक क्रियारूप को पुनः आरम्भ करने की प्रेरणा मिलती है।
प्रायोगिक विचार
अपने जीवन में आप कब चंगा या पुनः आरम्भ होने का संकेत पाते हैं? क्या आप किसी कारण से स्थगित हुए धार्मिक-कर्तव्यों को फिर से शुरू करने के लिए एक स्पष्ट निशान चाहते हैं? यह पद हमें स्मरण दिलाता है कि ईश्वर तब भी संकेत देता है जब हम अपनी स्थिति जानते हैं—हमारी आस्था उसे दिखाती है कि हम उसकी कृपा पर निर्भर हैं।
संक्षिप्त समापन
यह पद होशिया के समय की एक व्यक्तिगत याचना है जिसमें एक मरहम और मंदिर में वापसी की चाह है—यह दर्शाता है कि विश्वास वही है जो चंगाई के साथ-साथ सेवा-योग्य जीवन को भी पुनर्जीवित करता है। ईश्वर अपनी योजना में स्पष्ट संकेत देता है, ताकि His people उठें, साथ चलें, और अपने दायित्वों को फिर से निभाएं।
मैथ्यू हेनरी, अलेक्ज़बर बर्नेज़, एडम क्लार्क के संकेत (संक्षेप)
यह अनुभाग मौलिक commentary को संदर्भित करता है जब वे चंगाई और संकेत के बारे में सामान्य तौर पर बोलते हैं: चंगाई एक संकेत-चिह्न है जो विश्वास की पुष्टि करता है; विश्वास और कृत्य एक साथ चलते हैं; और परमेश्वर के कार्य के लिए hommes को मंदिर-सेवा में लौटना चाहिए। सारांशित विवरण के रूप में इन पंक्तियों में से कुछ सूत्र उद्धृत नहीं किए गए हैं, किन्तु वे यह संकेत देते हैं कि चंगाई और मंदिर-सेवा का पुनःआरम्भ, विश्वास और संकेतों के साथ एक साथ आते हैं।
स्थानीय रूप में अन्याय के समय में भी ईश्वर के संकेत मिलते हैं; इसके द्वारा पाठक अपने जीवन में विश्वास के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा पाते हैं।