2 राजाओं 21:6 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

फिर उसने अपने बेटे को आग में होम करके चढ़ाया; और शुभ-अशुभ मुहूर्त्तों को मानता, और टोना करता, और ओझों और भूत सिद्धिवालों से व्यवहार करता था; उसने ऐसे बहुत से काम किए जो यहोवा की दृष्टि में बुरे हैं, और जिनसे वह क्रोधित होता है।

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2 राजाओं 21:6 पद-दर-पद बाइबल टीका

पद का आरम्भिक संदर्भ और पाठ का सेटिंग

2 राजाओं 21:6 में कुलोधन राजमान यूत्मत का पुत्र नमहों की शाह शासना के अन्दर जो राजा बने, उनका पाप-सुख है। यह वाक्य अदीयों के अन्धकारमय दौर को उभारता है, जब मसीह के वंश के उत्तराधिकारी भी उद्धारकता से दूर रहते हैं। वह अपने बेटे को आग में होम करके चढ़ाने जैसे अति-घृणित कर्म करता है और शुभ-अशुभ मुहूर्तों को मानता रहता है। ओझा-भूत सिद्धियों के प्रति निष्ठा, और टोना-टोटका का अभ्यास भी उसकी दिनचर्या बन जाता है। इस प्रकार वह यहोवा की दृष्टि में अत्यंत बुरे कामों में जुड़ा रहा, जिससे परमात्मा क्रोधित हुआ।

ईश्वर की त्रुटिहीन निष्ठा बनाम तात्कालिक पाप

यहाँ परमेश्वर के प्रति अविश्वास और शत्रुता का गहरा चित्र उभरता है। राजा ने ईश्वर के निर्देशों और कानून के विरुद्ध कदम उठाए, और लोक-कल्याण के लिए न लौटने जैसा भयावह व्यवहार किया। यह स्पष्ट करता है कि पाप केवल व्यक्तिगत अपराध नहीं, बल्कि सामाजिक और धर्मिक टूट-फूट की स्थिति है जिसमें कर्तव्य-निष्ठा का क्षरण होता है।

महत्त्वपूर्ण शब्द और चित्र

  • — यह मूर्तिपूजा और जीवन की अर्थपूर्ण सीमा को लांघना है; वह अपने बच्चों को धार्मिक-आहुति के नाम पर sacrifice कर देता है, जो ईश्वर के प्रत्यक्ष आदेश का उल्लंघन है।
  • — समय और रीति-रिवाज के भेद-भाव को अपनी सत्ता के साधन के रूप में देखना; यह परमेश्वर के डर के बिना कर्म करने का संकेत है।
  • — आशा की जगह अंधविश्वास और मानव-यत्नों पर भरोसा; ईश्वर के साथ विश्वासघात का एक ऊँचा चिह्न।

अन्य प्रेऱक अध्यायों के संबद्ध पाठ

– कभी-कभी पूर्व राजाओं के इतिहास में यह दिखाया गया है कि परमेश्वर की चित्त-स्थिति पाप के प्रति कठोर हो सकती है, जब नेतृत्व नहीं सुधारता। 2 राजा 21 के समान संदर्भों में प्रमुख पाठ: 2 राजा 20:1–3 में मोरेन के समय राजा आहाब के जैसे पापों पर विचार, और 2 राजा 24:3–4 में यहोवा की क्रोध की दिशा स्पष्ट होती है।

आज के जीवन में अनुप्रयोग

  • ईश्वर के सामने मन को पूरी तरह से खोलना— आत्म-स्वीकृति और पश्चात्ताप से ही आस्था फिर उभरती है।
  • विश्वास के बजाय अंधविश्वास या बाहरी रीति-रिवाजों पर निर्भर रहने से बचना, क्यों कि यह परमेश्वर से दूरी बनाता है।
  • नेतृत्व-निष्ठा की आवश्यकता— यदि नेता पाप के मार्ग पर चलता है, तो यह समाज के नैतिक ढांचे को हानि पहुँचाता है; प्रभावी परिवर्तन के लिए इमानदार प्रतिज्ञा और सुधार आवश्यक है।

कथा-परिचय से जुड़ी प्रमुख शिक्षाएं

यह पाठ यह दर्शाता है कि परमेश्वर अपने लोगों के साथ एक नैतिक अनुशासन रखता है। जब राजा अपने दायित्व-भाव से दूर रहता है और ऐतिहासिक पापों को बढ़ावा देता है, तब परमेश्वर के क्रोध का कारण बनता है। इस बदलाव से यह स्पष्ट होता है कि सत्ता और शासन के सद्भाव में ईश्वर की आज्ञाओं का स्थान सर्वोपरि है।

Cross-references (संक्षिप्त उपयोगी संबंध)

– उत्पत्ति और बाइबल के अन्य भागों में पाप के परिणाम स्पष्ट होते हैं; उदाहरण के लिए पुराने नियम के पवित्र इतिहासों में पाप का समाज-परिणाम दिखाते हैं।

– कुछ पहलुओं पर “पश्चात्ताप और फिर से विश्वास” का महत्व; चर्चित उद्धरणों के साथ यह धारणा संरेखित होती है कि ईश्वर उदार नहीं, परन्तु कृपाशील भी है जब हृदय परिवर्तन होता है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

2 राजाओं 21:6 समानांतर पद और संबंधित वचन

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2 राजाओं 17:17 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
2 राजाओं 17:17 (HINIRV) »
उन्होंने अपने बेटे-बेटियों को आग में होम करके चढ़ाया; और भावी कहनेवालों से पूछने, और टोना करने लगे; और जो यहोवा की दृष्टि में बुरा था जिससे वह क्रोधित भी होता है, उसके करने को अपनी इच्छा से बिक गए।

लैव्यव्यवस्था 19:31 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
लैव्यव्यवस्था 19:31 (HINIRV) »
“ओझाओं और भूत साधने वालों की ओर न फिरना, और ऐसों की खोज करके उनके कारण अशुद्ध न हो जाना; मैं तुम्हारा परमेश्‍वर यहोवा हूँ।

लैव्यव्यवस्था 18:21 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
लैव्यव्यवस्था 18:21 (HINIRV) »
अपनी सन्तान में से किसी को मोलेक के लिये होम करके न चढ़ाना, और न अपने परमेश्‍वर के नाम को अपवित्र ठहराना; मैं यहोवा हूँ।

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