Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
2 राजाओं 4:1 2 राजाओं 4:2 2 राजाओं 4:3 2 राजाओं 4:4 2 राजाओं 4:5 2 राजाओं 4:6 2 राजाओं 4:7 2 राजाओं 4:8 2 राजाओं 4:9 2 राजाओं 4:10 2 राजाओं 4:11 2 राजाओं 4:12 2 राजाओं 4:13 2 राजाओं 4:14 2 राजाओं 4:15 2 राजाओं 4:16 2 राजाओं 4:17 2 राजाओं 4:18 2 राजाओं 4:19 2 राजाओं 4:20 2 राजाओं 4:21 2 राजाओं 4:22 2 राजाओं 4:23 2 राजाओं 4:24 2 राजाओं 4:25 2 राजाओं 4:26 2 राजाओं 4:27 2 राजाओं 4:28 2 राजाओं 4:29 2 राजाओं 4:30 2 राजाओं 4:31 2 राजाओं 4:32 2 राजाओं 4:33 2 राजाओं 4:34 2 राजाओं 4:35 2 राजाओं 4:36 2 राजाओं 4:37 2 राजाओं 4:38 2 राजाओं 4:39 2 राजाओं 4:40 2 राजाओं 4:41 2 राजाओं 4:42 2 राजाओं 4:43 2 राजाओं 4:44



2 राजाओं 4:37 पर टिप्पणी
पसंद किया गया पाठ 2 राजा 4:37 में आप देखेंगे कि एक चिकित्सकीय उपचार के बाद एक माँ-यातना के बीच जिसने अपने बेटे को उठाने का संकेत किया, उसे दया और विश्वास से देखा गया। इस संदर्भ में यह व_DESC स्पष्ट करता है कि ईश्वर की कृपा कैसे एक पिता-परिवार के भीतर प्रभाव डालती है, जब लोग गहराई से पीड़ित होते हैं और प्रभु पर निर्भर रहते हैं।
क verse का संक्षिप्त संदर्भ
यह अध्याय रीवाह के कथानक के परिणामस्वरूप, स्मरणीय चमत्कारों के क्रम में एक और चमत्कार का चित्रण है: एक माँ ने अपने मृत पुत्र के पास लौटकर मदद माँगी; प्रश्न आता है कि बाद में वह उठकर खड़ी क्यों होती है। यह दृश्य उसकी आस्था की पुष्टि का संकेत देता है कि ईश्वर उसमें और उसके पुत्र में जीवित आत्मा डालते हैं, और वह दण्डवत् होकर लौटती है।
मुख्य विचार (central meaning)
यह पाठ विश्वास के पूरक संकेत देता है कि निराशा के क्षणों में भी परमेश्वर की कृपा तक पहुँच संभव है; माँ के व्यवहार में एक दृढ़ता और विनम्रता है जो ईश्वर के प्रति सम्मान और भरोसे को दर्शाती है। वह भीतर गई, पाँवों पर गिर भूमि तक झुककर दण्डवत् करती है—एक व्यक्ति की पूरी भक्ति और surrender का प्रतिनिधित्व—फिर अपने बेटे को उठाकर निकल जाती है; यह दिखाता है कि देवदत्त आशा के साथ जीवन की पुनर्स्थापना कैसे व्यक्त होती है।
दो-तीन प्रमुख विषय
संबंधित आयतें
- चमत्कारिक पुनर्जीवन/जीवन की आशा: पुराने नियम के अन्य chams में भी ऐसी आस्था का वर्णन मिलता है, जहाँ जीवित रहने पर विश्वासियों का आशीर्वाद और भक्ति प्रकट होती है।
- विश्वास और भक्ति के परिणाम: विश्वास के साथ जीवन में आने वाली राहत और पुनर्निर्माण की प्रक्रिया को अन्य पुस्तकों में भी समाहित किया गया है।
व्यावहारिक विचार
हमारे लिए यह पाठ एक स्मरण है कि कठिन समय में भरोसा बनाए रखना और प्रभु के सामने submissive posture अपनाना जीवन में आंतरिक शांति और वास्तविक राहत लाते हैं। चाहे स्थिति कितनी भी असह्य क्यों न हो, परमेश्वर की कृपा का विश्वास रखने से वह हमारे साथ रहता है और जीवन के कटु क्षणों में भी आशा की किरण दिखती है।
छोटा समਾਪन सार
2 राजाओं 4:37 एक ऐसी घटना है जो यह दिखाती है कि ईश्वर की शक्ति कैसे किसी परिवार के भीतर, विशेष रूप से माताओं और बच्चों के बीच, जीवन दें और श्रद्धा को प्रकट करे। यह दृश्य विश्वास की पूर्णता और दण्डवत् श्रद्धा के प्रतीक के रूप में उभरता है।
Cross-references (छोटे संकेत)
- धर्म-आस्था और जीवन के पुनर्स्थापन से संबंधित अन्य चमत्कार: कविता-यात्रा में भी ऐसे क्षण मिलते हैं जब प्रभु जीवन में नया आरम्भ करते हैं। यह अनुभूति श्रद्धा के साथ मिलती है।
- ईश्वर की दया के पुनर्निर्माण: पुराने नियम में अन्य घटनाओं में भी दया की शक्ति दिखाई देती है, जो निर्बलों के लिए आशा का कारण बनती है।
Note: नीचे दिये गये उद्धरण Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक डाक-स्वत्व commentary से सीधे शब्दों में छोटे-छोटे उद्धरण हैं, यदि उपलब्ध हों तो स्पष्ट रूप से चिन्हित किए गए हैं.