Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
2 राजाओं 4:1 2 राजाओं 4:2 2 राजाओं 4:3 2 राजाओं 4:4 2 राजाओं 4:5 2 राजाओं 4:6 2 राजाओं 4:7 2 राजाओं 4:8 2 राजाओं 4:9 2 राजाओं 4:10 2 राजाओं 4:11 2 राजाओं 4:12 2 राजाओं 4:13 2 राजाओं 4:14 2 राजाओं 4:15 2 राजाओं 4:16 2 राजाओं 4:17 2 राजाओं 4:18 2 राजाओं 4:19 2 राजाओं 4:20 2 राजाओं 4:21 2 राजाओं 4:22 2 राजाओं 4:23 2 राजाओं 4:24 2 राजाओं 4:25 2 राजाओं 4:26 2 राजाओं 4:27 2 राजाओं 4:28 2 राजाओं 4:29 2 राजाओं 4:30 2 राजाओं 4:31 2 राजाओं 4:32 2 राजाओं 4:33 2 राजाओं 4:34 2 राजाओं 4:35 2 राजाओं 4:36 2 राजाओं 4:37 2 राजाओं 4:38 2 राजाओं 4:39 2 राजाओं 4:40 2 राजाओं 4:41 2 राजाओं 4:42 2 राजाओं 4:43 2 राजाओं 4:44



सार-सार नीचे: 2 राजाओं 4:43 (HINIRV पाठ)
यह वाक्य एक छोटे से चमत्कार का दृश्य है जो पवित्रता, बनी हुई कृपा और ईश्वर की आपूर्ति के विश्वास को दर्शाता है। एक तहर से यह एक सामुदायिक भोजन की दीन-सीखा है: ईश्वर जब चाहें तो कम में भी पर्याप्त दे देते हैं, और घटी हुई चीज़ों में से भी बड़ी कृपा हो सकती है। जैसे ही एक टहलुआ अपने चिठ्ठे के साथ कहता है कि मैं सौ मनुष्यों के लिए इतना कर दूँ, वह कहता है कि खाद्या दे दें, क्योंकि यहोवा यह कहता है कि भोजन के बाद बच भी जाएगा, यह दर्शाता है कि ईश्वर की इनायत सीमा से परे है।
वचन का पाठ और संदर्भ
वचन: उसके टहलुए ने कहा, “क्या मैं सौ मनुष्यों के सामने इतना ही रख दूँ?” उसने कहा, “लोगों को दे दे कि खाएँ, क्योंकि यहोवा यह कहता है, 'उनके खाने के बाद कुछ बच भी जाएगा।'”
यह संदर्भ ईश्वर की प्रेरित भविष्यवाणी/वचन के साथ जुड़ा है कि जब भी वो एक छोटी-सी निधि से भी करुणा और सहभागिता कराते हैं, तब उनमें से अधिक निकल आता है।
मुख्य आध्यात्मिक पाठ
अनुरागी तुलना: अन्य पवित्र ग्रंथों से मिलते-जुलते संकेत
• पूर्वकर्ता का महीना-राज, वास्तव में एक छोटा-सा नमूना है कि ईश्वर कम में भी abundant दे सकता है। (अन्य मोज़ुदा उल्लेखनों में भी कुछ ऐसी घटनाएं मिलती हैं जहाँ भगवान छोटी चीज़ों से बड़ी मदद करते हैं।)
• जैसा कि एक आशीर्वचन में है, ईश्वर का हृदय दयालु है और वह अपने युवाओं के लिए भी पर्याप्त रखता है।
• पवित्रशास्त्र में यह विचार बार-बार आता है कि विश्वास के कारण जो दिया गया है, वह कभी खाली नहीं लौटता।
टीका-आर्थिक विचार और अनुप्रयोग
- जब हमारे पास सीमित संसाधन हों, तब भी ईश्वर पर भरोसा रखें; कर्तव्यनिष्ठ वितरण से भागीदारी बढ़ती है।
- समुदाय के लिए भोजन या संसाधनों का बाँटना कई बार ऐसे करामाती परिणाम देता है कि जरूरतमंद लोग भी पर्याप्त पाते हैं और बाकी लोग भीBlessings में वृद्धि देखते हैं।
- प्रश्न उठता है कि हम किन परिस्थितियों में “खाने के बाद कुछ बच जाएगा” जैसी आशा को बनाए रखें? यह विश्वास की एक परीक्षा है कि क्या हम ईश्वर की निरंतर आपूर्ति में भागीदार बनते हैं।
क्रॉस-रेफ़रेंस (संक्षिप्त परिचय और तात्पर्य)
• मूसा के समय की आपूर्ति-चमत्कार: ईश्वर के द्वारा कम में भी पर्याप्त भोजन मिला। यह घटना भरोसे की परीक्षा है, और यह दिखाती है कि ईश्वर हमारी छोटी-सी इच्छा को भी कैसे देखता है।
• राजा यीशु की बातें: विभाजन में ईश्वर की कृपा का विस्तार होता है, जो समुदाय के हर सदस्य तक पहुँचता है।
• नए नियम की दयालुता का उदाहरण: संसाधनों की मात्रा चाहे जो हो, प्रेम और साझा करने का क्रम बड़ी आपूर्ति के लिए रास्ता बनाता है।
संक्षेपण
यह वचन हमें सिखाता है कि ईश्वर की देन जहां कम दिखती है, वहाँ भी पर्याप्त और बचने लायक होता है जब उसकी इच्छा को मानकर देयता निभाई जाए। भागीदारी की भावना और आस्था मिलकर समुदाय को साथ रखती है—भले ही आरम्भिक मात्रा छोटी क्यों न हो।
नोट: इस प्रविष्टि में Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के सार्वजनिक-डोमेन विचारों से मिलते-जुलते अभिप्राय का समन्वय किया गया है। जरूरी उद्धरण: “दया और पुकार के बीच से ईश्वर की आपूर्ति प्रकट होती है” (एंथोलॉजी सार).