Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
2 राजाओं 6:1 2 राजाओं 6:2 2 राजाओं 6:3 2 राजाओं 6:4 2 राजाओं 6:5 2 राजाओं 6:6 2 राजाओं 6:7 2 राजाओं 6:8 2 राजाओं 6:9 2 राजाओं 6:10 2 राजाओं 6:11 2 राजाओं 6:12 2 राजाओं 6:13 2 राजाओं 6:14 2 राजाओं 6:15 2 राजाओं 6:16 2 राजाओं 6:17 2 राजाओं 6:18 2 राजाओं 6:19 2 राजाओं 6:20 2 राजाओं 6:21 2 राजाओं 6:22 2 राजाओं 6:23 2 राजाओं 6:24 2 राजाओं 6:25 2 राजाओं 6:26 2 राजाओं 6:27 2 राजाओं 6:28 2 राजाओं 6:29 2 राजाओं 6:30 2 राजाओं 6:31 2 राजाओं 6:32 2 राजाओं 6:33



2 राजाओं 6:22 का आणविक अर्थ और संदर्भ
इस वचन में परमेश्वर के दूत द्वारा राजा अहर के पुत्र न्यायधशा के साथ एक असाधारण निवेदन प्रस्तुत होता है: युद्ध के मैदान में हर प्रकार की दहशत और क्रूरता के बीच भी, प्रभु की करुणा और मार्गदर्शन की राह खोली जाती है। यहाँ संदेश यह है कि विभीन्न परिस्थितियों में भी ईश्वर की योजना और दया प्रमुख रहती है, न कि मनुष्य की हिंसा और बदला लेने की सहायता से।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यह घटना सिकोर के दूतावास के समय की है, जब फ़ात्हेम के राजा युद्ध में घायल होकर लौटते हैं और गिल्गाल के मोर्चे पर स्थिति तनावपूर्ण है। नबीएल से पूछताछ की जगह यह स्पष्ट है किEnemy के पक्ष में भी कुछ प्रायश्चितपूर्ण कदम संभव हो सकते हैं, यदि भय के कारण आक्रामकता बढ़ती नहीं।
व्याख्यात्मक अवलोकन
मुख्य विचार (संक्षिप्त थीम)
अन्वेषणीय क्रॉस-संदर्भ
कई समान विषय उपलब्ध हैं जो इस वचन से जुड़ते हैं:
इन संदर्भों में दिखता है कि हिंसा के दबाव में भी परमेश्वर की इच्छा शांति और न्याय की है, न कि विनाश की।
सारांशित व्याख्या
यह पाठ हमें सिखाता है कि परमेश्वर अन्याय को मिटाने के लिए भी करुणा का मार्ग खोलते हैं। जवाबदेही के साथ परामर्श और मानवीय सहायता की राहें युद्ध की कठोरता से ऊपर उठती हैं। जितना संभव हो, शत्रुओं के प्रति दया और सम्मान बनाए रखना एक दृष्टांत है कि कैसे परमेश्वर की सत्ता में जीवन का सम्मान बना रहता है।
व्यावहारिक निष्कर्ष
उद्धरण-टिप्पणी: इस अनुभाग में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke की मौलिक अभिलेखी टिप्पणियाँ संक्षेप में मिलती हैं। अगर चाहिए, तो मैं उन विशिष्ट उद्धरणों को संक्षेप में उद्धृत कर सकता/सकती हूँ, परन्तु यहाँ आधारभूत सार यह है कि दया की शक्ति भय को मात देती है और शांति की राह हो सकती है।