Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
2 राजाओं 6:1 2 राजाओं 6:2 2 राजाओं 6:3 2 राजाओं 6:4 2 राजाओं 6:5 2 राजाओं 6:6 2 राजाओं 6:7 2 राजाओं 6:8 2 राजाओं 6:9 2 राजाओं 6:10 2 राजाओं 6:11 2 राजाओं 6:12 2 राजाओं 6:13 2 राजाओं 6:14 2 राजाओं 6:15 2 राजाओं 6:16 2 राजाओं 6:17 2 राजाओं 6:18 2 राजाओं 6:19 2 राजाओं 6:20 2 राजाओं 6:21 2 राजाओं 6:22 2 राजाओं 6:23 2 राजाओं 6:24 2 राजाओं 6:25 2 राजाओं 6:26 2 राजाओं 6:27 2 राजाओं 6:28 2 राजाओं 6:29 2 राजाओं 6:30 2 राजाओं 6:31 2 राजाओं 6:32 2 राजाओं 6:33



संक्षिप्त व्याख्या — संदर्भ में आयत 2 राजाओं 6:7
यह वचन उस चमत्कार का हिस्सा है जब प्रभु ने एलिशा नबी के माध्यम से एक लोहे की कुल्हाड़ी पानी की सतह पर तैरती हुई दिखाई दी। जब शिष्य ने संभवत: आश्चर्य या भय से कहा, “उसे उठा ले,” तब उसने हाथ बढ़ाकर कुल्हाड़ी को ले लिया। यह घटना साधारण में अद्भुतता का संकेत है—पर प्रभु की सहसा व्यवस्था और नबी की मध्यस्थता के माध्यम से हुई सहायता की सटीक छवि भी है।
मुख्य अर्थ
आयत का केन्द्रबिन्दु यह है कि मार्गदर्शक/नबी के निर्देश पर विश्वासपूर्वक कार्रवाई करने से परमात्मा की कृपा दिखाई देती है। आदेश देने वाले ने कहा उठाओ, और वह जो आज्ञा पाकर चला उसने हाथ बढ़ाकर वस्तु को उठा लिया—यह दिखाता है कि ईश्वर की शक्ति अक्सर साधारण साधनों (यहाँ मानव के हाथ) के माध्यम से प्रकट होती है।
प्रमुख विषय
संबंधित प्रसंग और सहसंबंध
यहाँ तीन सहसंबंध उपयोगी हैं:
- 1 राजा 17:21–22 — एलियाह तथा इलीशा के समकालीन चमत्कारों में जीवन-दात्री शक्ति की समानता दिखती है; दोनों नबी परमेश्वर की मध्यस्थता से दैनिक आवश्यकताओं में हस्तक्षेप करते हैं।
- मरकुस 16:18 — यहां भी संकेत मिलता है कि विश्वास के साथ किए गए कार्यों में प्रभु उपस्थिति और आश्चर्यजनक परिणाम देते हैं; नया नियम चमत्कारों के उद्देश्य और प्रभाव पर प्रकाश डालता है।
- भजनसंग्रह 77:14 — परमेश्वर का मार्ग अनूठा है; उसी की महानता और चमत्कार हमारे जीवन में प्रकट होते हैं।
प्रायोगिक प्रतिबिंब
यह कथानक जीवन में छोटी-छोटी सहायता की मांग और उसे प्राप्त करने का प्रतिनिधित्व करता है। जब हम पारंपरिक सहायता न देखकर चौंकते हैं, तो याद रखें कि प्रभु साधारण कार्यों के माध्यम से भी सहायता दे सकता है—पर ज़रूरी है कि हम निर्देशों पर भरोसा रखें और कार्रवाई करें। यह पंक्ति हमें सिखाती है कि विश्वास केवल विश्वास से नहीं होता; अक्सर उसका प्रमाण कर्म से मिलता है: आदेश सुनकर कदम उठाना, हाथ बढ़ाना।
नोट: सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणीकारों के विचार
मैथ्यू हेनरी, अल्बर्ट बार्न्स, या एडम क्लार्क के पूर्ण उद्धरण यहाँ नहीं दिए गए; परन्तु उनकी व्याख्याओं से मिलता-जुलता एक विचार यह है कि इस किस्से में नबी की आज्ञा और शिष्य का पालन परमेश्वर की कृपा के द्योतक हैं। यदि इन टिप्पणीकारों का छोटा उद्धरण उपलब्ध हो तो वह संकेतों और अनुपालन के महत्व पर प्रत्यक्ष प्रकाश डालता।
संक्षेप
2 राजाओं 6:7 यह सिखाता है कि ईश्वर अक्सर हमारी रोज़मर्रा की जरूरतों में उपस्थित रहते हैं, और उनका कार्य हमारे विश्वसनीय अनुपालन और साधारण कर्मों के माध्यम से भी प्रकट होता है। नबी की कहन सुनकर उठाना दर्शाता है कि विश्वास व्यावहारिक आज्ञा पालन के साथ फलता-फूलता है।