Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
2 शमूएल 11:1 2 शमूएल 11:2 2 शमूएल 11:3 2 शमूएल 11:4 2 शमूएल 11:5 2 शमूएल 11:6 2 शमूएल 11:7 2 शमूएल 11:8 2 शमूएल 11:9 2 शमूएल 11:10 2 शमूएल 11:11 2 शमूएल 11:12 2 शमूएल 11:13 2 शमूएल 11:14 2 शमूएल 11:15 2 शमूएल 11:16 2 शमूएल 11:17 2 शमूएल 11:18 2 शमूएल 11:19 2 शमूएल 11:20 2 शमूएल 11:21 2 शमूएल 11:22 2 शमूएल 11:23 2 शमूएल 11:24 2 शमूएल 11:25 2 शमूएल 11:26 2 शमूएल 11:27
सीधे अर्थ की घोषणा
2 शमूएल 11:19 का यह वचन दूत को राजा को युद्ध के संपूर्ण हाल की जानकारी पहुँचाने के निर्देश को दर्शाता है, ताकि राजनीति-युद्ध के क्रम और परिणाम स्पष्ट रूप से राजा को ज्ञात हों।
पार्श्वभूमि और संदर्भ
यह besproken अध्याय खुदाई के समय की युद्ध-योजना और राजा דוד के शासन के दौरान हुई घटना का भाग है। दाऊद की सेना के साथ लड़ा गया युद्ध, तथा परिणामों की सूचना भेजने के क्रम में दूत से कहा गया कि वह युद्ध की संपूर्ण घटनाओं को राजा तक पहुँचाए। इसका उद्देश्य सूचित करना और राजा की रणनीतिक निर्णय-प्रक्रिया को सुनिश्चित करना था।
व्याख्यात्मक अवलोकन
मूल विचार (थीमैटिक संकलन)
अन्य प्रासंगिक अध्यायों के संकेत (संक्षेप में)
— एक से अधिक बार ऐसा प्रतीत होता है कि युद्ध-घटना की रिपोर्ट राजा को दी जाती है ताकि वह स्थिति की वास्तविकता समझ सके।
पश्चिमी-विश्वास के उद्धरण (संक्षिप्त संदर्भ)
मैथ्यू हेनरी, ऐल्बर्ट बार्न्स और एडम क्लार्क के समानार्ह विचारों से संकेत मिलता है कि सत्यापित विवरण और जिम्मेदारी की भावना एक शासक-कार्य का अनिवार्य हिस्सा है।
उद्धृत विचार: कभी-कभी इन पंक्तियों में “सत्य मैंने कहा” का आग्रह होता है, ताकि जनता और सैनिकों के बीच भरोसा बना रहे।
क्रॉस-रेफरेंसेस (संक्षेप)
संक्षिप्त व्यावहारिक निष्कर्ष
युक्तिसिद्धान्त यह है कि शासक के प्रति सारी घटनाओं की ईमानदार, पूर्ण और स्पष्ट रिपोर्ट आवश्यक है ताकि नीति और रणनीति सुसंगत रहे। दूत-चयन, सत्यापन और समय पर सूचना के यही तत्व एक सक्षम शासन की निशानी हैं।