Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
2 शमूएल 11:1 2 शमूएल 11:2 2 शमूएल 11:3 2 शमूएल 11:4 2 शमूएल 11:5 2 शमूएल 11:6 2 शमूएल 11:7 2 शमूएल 11:8 2 शमूएल 11:9 2 शमूएल 11:10 2 शमूएल 11:11 2 शमूएल 11:12 2 शमूएल 11:13 2 शमूएल 11:14 2 शमूएल 11:15 2 शमूएल 11:16 2 शमूएल 11:17 2 शमूएल 11:18 2 शमूएल 11:19 2 शमूएल 11:20 2 शमूएल 11:21 2 शमूएल 11:22 2 शमूएल 11:23 2 शमूएल 11:24 2 शमूएल 11:25 2 शमूएल 11:26 2 शमूएल 11:27



2 शमूएल 11:2 — संदर्भ में प्रविष्टि
इस पद में दाऊद राजा के जीवन की एक उजागर घटना का आरम्भ है। सांझ के समय राजा अपने महलों की छत पर टहल रहे थे और उसी समय उनकी दृष्टि एक अति सुन्दर स्त्री पर पड़ी, जो नहाते समय दिखाई दी। यह पाठ पाप के प्रवेश का क्षण है—जो बाद में एक कठिन नैतिक परीक्षा और परिणामों के कड़वे अनुभवों की ओर ले जाता है—यह दिखाता है कि सत्ता और इच्छाशक्ति के समय, नैतिक विवेक कितना महत्वपूर्ण है।
केंद्रीय अर्थ
यह पंक्ति राजा दाऊद के दैनिक जीवन के एक सामान्य समय को दर्शाती है—घुमक्कड़ी और आराम; परन्तु इसका निहित पाठ यह है कि स्थिति(java) और अवसर पाप के लिए द्वार बना सकते हैं यदि व्यक्ति सचेत नहीं। दाऊद ने अधिकार के साथ संवेदनशीलता खो दी और एक अकस्मात आकर्षण ने उसे गलत दिशा में ढकेल दिया। यह स्पष्ट करता है कि सन्तुलन, नैतिक संयम और परमेश्वर के साथ स्थिर सम्बन्ध ही पूर्ण राजकुमार की पहचान बनाते हैं।
मुख्य विषय
प्रमुख विचार और cross-reference
यह पाठ न केवल दाऊद के पाप की दिशा की शुरुआत है, बल्कि बाइबल में अन्य स्थानों पर पाए जाने वाले समान मुद्दों से भी जुड़ता है:
व्यावहारिक विचार
हमारे जीवन में भी अनेक अवसर आते हैं जिन पर हम संगत परिणाम के बारे में सोचने से चूक जाते हैं। सौभाग्य या शक्ति के भ्रम में क्षणिक आकर्षण अक्सर स्थायी दुःख दे सकता है। इसे रोकने के लिए कुछ उपाय:
छोटे से cross-connection स्पष्टीकरण
— दाऊद की भूल से प्रेरित घटनाओं के साथ सम्बंधित अन्य प्रमाणों में, यह दिखता है कि सत्ता और बाहर से दिखाई देने वाली सुरक्षा भी आंतरिक नैतिकता की कमी से प्रभावित होती है।
संक्षिप्त सार
2 शमूएल 11:2 हमें यह सिखाता है कि राजा के समय भी आत्म-नियंत्रण और नैतिक साहस आवश्यक हैं। एक क्षण की अचेतPossible नज़र-उठान से शुरू होकर एक बड़ी आपदा तक पहुँच सकता है। परमेश्वर के चरित उद्देश्य में स्थिरता और पवित्रता ही वास्तविक भलाई की कुंजी है।
सीखने योग्य संदर्भ
यह दृश्य दाऊद के जीवन के पाठों में से एक है: सत्ता के साथ संयम और ईमानदारी का पालन चाहिए। नीचे के क्रॉस-रेफरेंसेस इस विषय को और स्पष्ट करते हैं:
नोट: इस भाग में Matthew Henry, Albert Barnes तथा Adam Clarke के सुपात्र निष्कर्षों के छोटे-से उद्धरण उपलब्ध हों तो परिचय में उल्लेखित किया गया है, पर पूर्ण टेक्स्ट उद्धरण यहाँ नहीं दिया गया है।