Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
2 शमूएल 13:1 2 शमूएल 13:2 2 शमूएल 13:3 2 शमूएल 13:4 2 शमूएल 13:5 2 शमूएल 13:6 2 शमूएल 13:7 2 शमूएल 13:8 2 शमूएल 13:9 2 शमूएल 13:10 2 शमूएल 13:11 2 शमूएल 13:12 2 शमूएल 13:13 2 शमूएल 13:14 2 शमूएल 13:15 2 शमूएल 13:16 2 शमूएल 13:17 2 शमूएल 13:18 2 शमूएल 13:19 2 शमूएल 13:20 2 शमूएल 13:21 2 शमूएल 13:22 2 शमूएल 13:23 2 शमूएल 13:24 2 शमूएल 13:25 2 शमूएल 13:26 2 शमूएल 13:27 2 शमूएल 13:28 2 शमूएल 13:29 2 शमूएल 13:30 2 शमूएल 13:31 2 शमूएल 13:32 2 शमूएल 13:33 2 शमूएल 13:34 2 शमूएल 13:35 2 शमूएल 13:36 2 शमूएल 13:37 2 शमूएल 13:38 2 शमूएल 13:39

2 शमूएल 13:15 —Immediate setting and unfolding drama
इस पद में अम्नोन और तीत्थोश का दर्दभरा संघर्ष चरम पर पहुँच गया है। अम्नोन ने अपने भाई आनुरिन को मारने के क्रोध की आग को नियंत्रित न कर पाने पर उसे छोड़ दिया, परन्तु बाद में उसका क्रोध और उसकी शक्ति का दुरुपयोग उसे और भी अंधा कर देता है। यहाँ, अम्नोन अपनी ही हत्या के पथ पर चल पड़ता है और बाँहें उठाकर कहता है कि उठकर चली जा—यही उसका अंतिम, तिड़कदार आह्वान है। यह दृश्य इस बात का संकेत है कि दबे हुए घात-प्रतिशोध और दमन के भाव भड़कने पर परमेश्वर की करुणा और दया के साथ न्याय भी सामने आ जाता है।
ईश्वर और आस्थाः इस पाठ से उभरती बातें
यह पाठ मानवीय अविश्वास, दमन और क्रोध के बुरे परिणामों पर प्रकाश डालता है। परमेश्वर सीधे तौर पर यहाँ दिखाई नहीं देते, परन्तु कथानक में नैतिक परीक्षण और परिणाम स्पष्ट हैं: भयंकर बदले की भावना एक परिवार और राष्ट्र के लिए विनाशकारी हो सकती है। सही आस्था यह है कि हम अपने हृदय को क्षमताशील बनायें, न कि क्रोध के हवाले कर दें। भले ही सत्ता और स्वार्थ हमारे भीतर दबाव बनाते हों, ईश्वर की इच्छा चोरी-चुुपे क्रोध की जगह प्रेम, क्षमा और सत्य के साथ चलना सिखाती है।
महत्वपूर्ण शब्दों और चित्रों की व्याख्या
संबद्ध क्रॉस-रेफरेंस (पादरख-उद्धरण के साथ संक्षेप)
- प्रस्थानिक नेकी और दया की शिक्षा देता है: अन्यत्र भी मानव व्यवहार के परिणाम दिखाई देते हैं, जैसे नीतियों और रिश्तों में क्रोध के कारण टूट-फूट।
- निर्भरता का आह्वान: व्यक्ति अपने क्रोध पर लगाम लगाए, ताकि प्रेम और समझ के मार्ग खुलें।
क्रॉस-रेफरेंस के साथ भावार्थ स्पष्ट करें: इन उपदेशों में क्षमा और संयम की महत्ता बार-बार उभरी है, ताकि परिवार और समुदाय सुरक्षित रहें।
आज के लिए व्यावहारिक अनुप्रयोग
- क्रोध को पहचानें और उसे रोकना सीखें: जब गुस्सा आये, तो ठहरकर विचार करें, शब्दों पर नियंत्रण रखें, ताकि रिश्तों को नुकसान न पहुंचे।
- दयालुता और क्षमा को प्राथमिकता दें: दुश्मनों के साथ भी शांति और सचेत व्यवहार रखें; यह जीवन के अनेक दुखों से बचा सकता है।
- परिवार के अंदर न्याय और प्रेम को संतुलित रखें: सत्ता की और भेदभाव की प्रवृत्ति से बचें; परिवारिक रिश्तों में नैतिकता बनाए रखें।
संकेतित उद्धरणों के स्रोत
इस टिप्पणी में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के संयुक्त विचारों से समृद्धी आयातित है। नीचे उद्धरण-रेखा के रूप में उनके स्पष्ट शब्द उपलब्ध नहीं हैं, परन्तु उनकी विश्लेषणात्मक प्रवृत्ति और नैतिक विवेचना के अनुसार समेकित निष्कर्ष प्रस्तुत किये गए हैं।
संक्षेप में निष्कर्ष
2 शमूएल 13:15 का यह दृश्य यह स्मरण दिलाता है कि क्रोध और बदले की आग मनुष्य के आचरण को अंधा बना देती है। परमेश्वर के द्वारा प्रेरित नैतिक शिक्षा यह है कि हम अपने हृदय को नियंत्रण में रखें, प्रेम, क्षमा और संयम को अपनायें, ताकि परिवार और समाज में शांति बनी रहे।