Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
2 शमूएल 13:1 2 शमूएल 13:2 2 शमूएल 13:3 2 शमूएल 13:4 2 शमूएल 13:5 2 शमूएल 13:6 2 शमूएल 13:7 2 शमूएल 13:8 2 शमूएल 13:9 2 शमूएल 13:10 2 शमूएल 13:11 2 शमूएल 13:12 2 शमूएल 13:13 2 शमूएल 13:14 2 शमूएल 13:15 2 शमूएल 13:16 2 शमूएल 13:17 2 शमूएल 13:18 2 शमूएल 13:19 2 शमूएल 13:20 2 शमूएल 13:21 2 शमूएल 13:22 2 शमूएल 13:23 2 शमूएल 13:24 2 शमूएल 13:25 2 शमूएल 13:26 2 शमूएल 13:27 2 शमूएल 13:28 2 शमूएल 13:29 2 शमूएल 13:30 2 शमूएल 13:31 2 शमूएल 13:32 2 शमूएल 13:33 2 शमूएल 13:34 2 शमूएल 13:35 2 शमूएल 13:36 2 शमूएल 13:37 2 शमूएल 13:38 2 शमूएल 13:39



2 शमूएल 13:25 — संदर्भ में संक्षेप
यह आयत राजा दाऊद के पुत्र अबशालोम के साम्राज्य-यातनाओं के बीच की तनावपूर्ण स्थिति को दर्शाती है। राजा ने अबशालोम से कहा कि वे सभी एक साथ नहीं चलेंगे, ताकि उसे अधिक कष्ट न हो। लेकिन अबशालोम ने अपने पिता के शब्दों के आगे दवाब डालकर विनयपूर्वक उसे पीछे नहीं हटाया; अंततः दाऊद ने उसे आशीर्वाद दिया, जो एक पिता-प्रेम और नीति के मिश्रण को दर्शाता है।
मुख्य अर्थ
इस verse में पिता-प्रेम, कुटुम्बीय दायित्व और राज्य-स्थिति के बीच पिता की सुरक्षा-नीति झलकती है। दाऊद चाहते हैं कि परिस्थितियाँ इतनी न बिगड़ें कि पुत्र की पीड़ा बढ़े; परंतु अबशालोम का आग्रह और दबाव यह संकेत देता है कि सत्ता और परिवार के भीतर संघर्ष कैसे आकार ले सकता है। दाऊद का आशीर्वाद एक विनम्र परिहार नहीं, बल्कि व्यक्तिगत प्रेम और दायित्व-भाव की पुष्टि है, जिससे परिवार के बंधन को टूटने से रोकने की कोशिश बनती है।
केंद्रीय तीन विषय
संबद्ध पद
– 2 शमूएल 13 के अध्याय इस कथा में अबशालोम की उठापटक और दाऊद के संयम को क्रमवार स्थापित करते हैं। उद्धृत विचारधारा-समझ के लिए ध्यान दें कि पिता का आशीर्वाद कठिन परिस्थितियों में भी सम्बल बनता है।
रचनात्मक विचार
यह verse पिता और पुत्र के बीच की दूरी को कम रखने का आह्वान है—तत्वतः एक संतुलन: आवश्यक सुरक्षा के बावजूद व्यक्तियों को स्वतंत्रता और गरिमा दी जाए। आधुनिक जीवन में यह शिक्षा परिवार के फैसलों में असहमति के समय भी सम्मान, धैर्य, और प्रेम बनाए रखने की प्रेरणा देती है।
पैगंबर-उद्धरण (नोट)
महत्वपूर्ण टिप्पणीकारों के अनुसार इस पाठ में दाऊद की नीति-चेतना और पितृ-प्रेम का मिश्रण साफ़ दिखता है; आवश्यकता पड़ने पर वे अपने पुत्र के साथ सहानुभूति दिखाते हैं, ताकि दुर्घटना-आकांक्षा से बचा जा सके। हिनिर्व में यह पाठ एक कुटुम्ब और शासन-सम्बन्ध की सूक्ष्म गतिशीलता को खोलता है।
क्रॉस-रेफरेंसे
कुल मिलाकर, इस verse में दाऊद का संयम और आशीर्वाद एक ऐसे मोड़ को दर्शाता है जहां पारिवारिक संबंध और राज्य-प्रभुरक्षा के बीच संतुलन बना रहता है।
संक्षिप्त समापन
यह अध्याय हमें सिखाता है कि कठिन समय में भी परिवार-प्रेम और जिम्मेदारी एक-दूसरे के लिए मार्गदर्शक हो सकता है। अधिकार और भावनाओं के बीच विनम्रता से चलना, पारिवारिक क्षति को रोक सकता है और आशीर्वादित रिश्तों को बनाए रख सकता है।