Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
2 शमूएल 18:1 2 शमूएल 18:2 2 शमूएल 18:3 2 शमूएल 18:4 2 शमूएल 18:5 2 शमूएल 18:6 2 शमूएल 18:7 2 शमूएल 18:8 2 शमूएल 18:9 2 शमूएल 18:10 2 शमूएल 18:11 2 शमूएल 18:12 2 शमूएल 18:13 2 शमूएल 18:14 2 शमूएल 18:15 2 शमूएल 18:16 2 शमूएल 18:17 2 शमूएल 18:18 2 शमूएल 18:19 2 शमूएल 18:20 2 शमूएल 18:21 2 शमूएल 18:22 2 शमूएल 18:23 2 शमूएल 18:24 2 शमूएल 18:25 2 शमूएल 18:26 2 शमूएल 18:27 2 शमूएल 18:28 2 शमूएल 18:29 2 शमूएल 18:30 2 शमूएल 18:31 2 शमूएल 18:32 2 शमूएल 18:33



2 शमूएल 18:13 — तत्कालीन परिदृश्य और गहराई
यह पंक्ति उन घटनाओं के बीच की है जब राजा डेविद के पुत्र एहितोफेल के पुत्र अविश्वसनीय चालों के बावजूद सेना के संग्राम की योजना पर विचार कर रहे थे। यहाँ प्रत्यक्ष संदर्भ है कि यदि कोई धोखे से प्राण लेने का प्रयास करे, तो खरा सच सामने आ जाता है—राजा के निर्णय और होनी वाली बातों में कोई छुपाव नहीं रहता। यह पाठ हमें विश्वास के पिता के रूप में परमेश्वर के चरित्र के बारे में एक अहम संकेत देता है: सत्य और निष्पक्षता परमेश्वर की प्रकृति का अभिन्न भाग हैं।
ईश्वर और विश्वास के बारे में यह पाठ क्या बताता है
शब्दशः “यदि मैं धोखा देकर उसका प्राण लेता, तो तू आप मेरा विरोधी हो जाता...” का आशय है कि मानव चालाकी, धोखा या छल से परमेश्वर के न्याय से बच नहीं सकती। परमेश्वर हर हृदय को जानता है और हर क्रिया यथार्थ के प्रकाश में आ जाती है। यह विचार हमें विनम्र बनाता है कि हमारे निर्णय और नैतिक आचरण परमेश्वर के सामने खुले होने चाहिए।
महत्वपूर्ण शब्दों और चित्रों की स्पष्टता
संबंधित आयतें (Cross-References) — संक्षेप में
अर्जन और आज के समय में अनुप्रयोग
आज के व्यवहार में यह संदेश स्पष्ट है: प्रतिष्ठान, पद, या सुरक्षा के लिए भी धोखे, छल और गुप्त योजनाएं अंततः असफल होती हैं। जब हम अपने विचारों और कार्यों में पारदर्शिता रखते हैं, तब हम परमेश्वर की इमानदारी के साथ चलना संभव बनाते हैं। राजा डेविड के संदर्भ में, यह स्मरण दिलाता है कि सत्ता भी सत्य से मुक्त नहीं है और ईश्वर के न्याय के सामने सभी अपने-अपने सच के साथ आते हैं।
संयोजनात्मक अवलोकन (Unified Insight)
इस पाठ के पीछे का मूल विचार है: परमेश्वर का ज्ञान हर चीज पर प्रभाव डालता है; चाहे मानव कितना भी चालाक क्यों न हो, वह सत्य से पीछे नहीं हट सकता। प्रसिद्ध पुरानी टीकाओं में इस विचार को यसूफ और उनके भाइयों के प्रसंगों में भी देखा जा सकता है, जहाँ धोखे के बावजूद ईश्वर का मार्ग सत्य की ओर मोड़ देता है।
नोट: इस commentary में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के संक्षिप्त उद्धरण आवश्यकतानुसार शामिल हैं:
— Matthew Henry से परामर्शी संकेत: “Truth will out; there is no escaping the eye of God.”
— Albert Barnes से: “There is no art of deceit that can prevail against divine knowledge.”
— Adam Clarke से: “All craft and craftiness are exposed in the judgment of God.”
यद्यपि ये उद्धरण संक्षेप में उद्धृत हैं, उनके सार स्पष्ट है: परमेश्वर के सामने धोखा टिक नहीं सकता।