Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
2 शमूएल 18:1 2 शमूएल 18:2 2 शमूएल 18:3 2 शमूएल 18:4 2 शमूएल 18:5 2 शमूएल 18:6 2 शमूएल 18:7 2 शमूएल 18:8 2 शमूएल 18:9 2 शमूएल 18:10 2 शमूएल 18:11 2 शमूएल 18:12 2 शमूएल 18:13 2 शमूएल 18:14 2 शमूएल 18:15 2 शमूएल 18:16 2 शमूएल 18:17 2 शमूएल 18:18 2 शमूएल 18:19 2 शमूएल 18:20 2 शमूएल 18:21 2 शमूएल 18:22 2 शमूएल 18:23 2 शमूएल 18:24 2 शमूएल 18:25 2 शमूएल 18:26 2 शमूएल 18:27 2 शमूएल 18:28 2 शमूएल 18:29 2 शमूएल 18:30 2 शमूएल 18:31 2 शमूएल 18:32 2 शमूएल 18:33



क्यों यह पद महत्वपूर्ण है
2 शमूएल 18:31 हमें राजा दाऊद के जीवन के एक अत्यन्त संवेदनशील क्षण की ओर ले जाता है—एक ऐसा क्षण जब राजा का परिवार और राज्य संकट में हैं, परन्तु अनेक घटनाएँ ईश्वर की अनुचितता और राजकीय सुरक्षा का प्रमाण देती हैं। यह पद दिखाता है कि कैसे सूचना, वफादारी और ईश्वरीय न्याय मानव इतिहास के निर्णायक मोड़ पर सामंजस्य बनाते हैं।
मूल संदर्भ
यह श्लोक उस समय का है जब दावीद का पुत्र अबीशय, अब़िनादाब, या एहीमन के साथ विरोधी संघर्ष चरम पर था—अविश्वास, बगावत और गृहयुद्ध का समय। कूशी की उपस्थिति सूचना और आशा दोनों लेकर आती है। पाठ बताता है कि कूशी ने राजा को बताया कि “यहोवा ने आज न्याय करके तुझे उन सभी के हाथ से बचाया है” — यह घोषणा केवल सैनिक सफलता का नहीं, बल्कि ईश्वरीय हस्तक्षेप और संरक्षण की पुष्टि है।
मुख्य संदेश
मुख्य रूप से यह पद दो बातों पर जोर देता है: (1) ईश्वर का न्याय और उद्धार आख़िरकार कार्य करता है; और (2) सही सूचना और वफादार समाचारवाह अक्सर संकट में आशा का स्रोत होते हैं। कूशी का संदेश न केवल युद्ध की स्थिति का वर्णन है, बल्कि यह दाऊद के लिए नयी दिलासा और आत्मिक पुष्टिकरण भी था कि परमेश्वर अभी भी उसके साथ है।
समर्थक बाइबिल विषय
क्रॉस-रेफरेंस और संक्षिप्त व्याख्या
निम्न पद समान विषयों को रेखांकित करते हैं:
निगाह: इतिहासकारों की छोटी टिप्पणी
मैथ्यू हेनरी का संक्षिप्त विचार पाठ में विश्वास और परमेश्वर की प्रवीणता पर जोर देता है; अल्बर्ट बार्न्स ने घटनाओं के व्यावहारिक पक्ष—सूचना का महत्व—को रेखांकित किया; आदम क्लार्क ने परिस्थिति के ऐतिहासिक और भाषायी विवरणों की ओर संकेत किया। (इन समीक्षकों के वाक्यांशों का सटीक उद्धरण यहाँ सम्मिलित नहीं किया गया है।)
अंतिम सार और उपासकीय चिंतन
यह श्लोक हमें याद दिलाता है कि जीवन के भयंकर कलहों में भी एक विश्वसनीय स्रोत—परमेश्वर—है जो न्याय करता और बचाता है। कूशी की भूमिका यह सिखाती है कि सच्चाई पहुँचाने वाला व्यक्ति परमप्रयोजन का सहायक बन सकता है। आज के पाठ के अनुसार, हमें कठिनाइयों में ईश्वर की ओर देखना चाहिए, सच बोलने और वफादारी दिखाने वालों का सम्मान करना चाहिए, और विजयों को केवल मानवीय उपलब्धि न समझकर परमेश्वर की कृपा का प्रमाण मानना चाहिए।