Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
2 शमूएल 18:1 2 शमूएल 18:2 2 शमूएल 18:3 2 शमूएल 18:4 2 शमूएल 18:5 2 शमूएल 18:6 2 शमूएल 18:7 2 शमूएल 18:8 2 शमूएल 18:9 2 शमूएल 18:10 2 शमूएल 18:11 2 शमूएल 18:12 2 शमूएल 18:13 2 शमूएल 18:14 2 शमूएल 18:15 2 शमूएल 18:16 2 शमूएल 18:17 2 शमूएल 18:18 2 शमूएल 18:19 2 शमूएल 18:20 2 शमूएल 18:21 2 शमूएल 18:22 2 शमूएल 18:23 2 शमूएल 18:24 2 शमूएल 18:25 2 शमूएल 18:26 2 शमूएल 18:27 2 शमूएल 18:28 2 शमूएल 18:29 2 शमूएल 18:30 2 शमूएल 18:31 2 शमूएल 18:32 2 शमूएल 18:33



2 शमूएल 18:16 का सरल अर्थ
यह पद यह दर्शाता है कि योआב ने नरसिंगा को फूँका, जिससे यह विजय के बीच भी इस्राएली सैनिक लौट गए और पलों में ही युद्ध से थकान और भय दूर हुआ। यह कर्म दिखाता है कि राजा के विरोध और सेना के भय के बीच नेता कितनी निर्णायक भूमिका लेते हैं: योआब ने प्रजा की सुरक्षा को प्राथमिकता दी।
संदर्भ-प्रसंग और पृष्ठभूमि
यदि आप पूरे प्रसंग को देखें, तो यह युद्ध के बाद की स्थिति है जहाँ योआब ने झगड़े की पूरी गंभीरता में भी प्रजा के पालनहिरासत को पहले रखा। नरसिंगा एक ऐसे क्षण में फूँका गया जब यहूदामय आक्रमण रोक रहा था; यह एक दृढ़, तेज़ कार्रवाई का संकेत है ताकि दोनों पक्ष शांत रहें और नुकसान कम हो। प्रजा की सुरक्षा के पद पर यहूद ने अपनी भूमिका निभाई।
व्याख्यात्मक बिंदु
कहानी से जुड़ी छोटी थीमैटिक सूची
अन्य संबंधित ग्रंथ - क्रॉस-रेफरेंसेस
उद्धरण 1: एक नेतृत्त्व-नैतिकता के विचार पर विचार करता है कि कैसे अधीनस्थों की रक्षा का दायित्व सर्वोपरि है।
उद्धरण 2: सुरक्षा-नीति के बारे में अन्य कथा-उद्धरण दिखाते हैं कि भय और अस्थिरता के समय कैसे निर्णय लिए जाएं।
उद्धरण 3: नेतृत्व और दायित्व के संतुलन पर प्रकाश डालते हैं कि कैसे एक सैनिक कदम प्रजा के लिए शांति ला सकता है।
पूर्व-पंक्ति संदर्भ (छोटे विवरण के साथ)
– नीचे के उद्धरणों में स्पष्ट पाठ नहीं मिलता पर उपरोक्त विचार इस संदर्भ से जुड़ते हैं: राजा/नेता की भूमिका और सुरक्षा-उद्धार के बीच संतुलन।
व्यावहारिक takeaway
जब भी खतरा सामने हो, नेता के पास एक ही लक्ष्य होना चाहिए: प्रजा की सुरक्षा और कल्याण। त्वरित, स्पष्ट और नैतिक निर्णय संकट के समय भी स्थिरता बनाते हैं।
नोट: इस टिप्पणी में Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के छोटे-चौड़े उद्धरण उपलब्ध हैं यदि आप चाहें तो मैं केवल आवश्यक स्थानों से उनके शाब्दिक कथनों को उद्धृत कर सकता हूँ। अभी के पाठ में कोई पूर्ण-पाठ उद्धरण शामिल नहीं किया गया है।