2 शमूएल 18:7 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

वहाँ इस्राएली लोग दाऊद के जनों से हार गए, और उस दिन ऐसा बड़ा संहार हुआ कि बीस हजार मारे गए

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2 शमूएल 18:7 पद-दर-पद बाइबल टीका

2 शमूएल 18:7 — तुरंत संदर्भ और संकेत

पठन के तुरन्त सेटअप में, हम देखते हैं कि दाऊद के साम्राज्य के विरुद्ध संघर्ष के बीच इस्राएली सेना ने युद्ध किया और हार का सामना किया। परमेश्वर के मनोभाव और दाऊद के नेतृत्व के बीच यह घटनाक्रम स्पष्ट करता है कि भला-बरका परिणाम केवल मानव रणनीति पर नहीं, बल्कि परमेश्वर की हुकूमत की स्वीकृति पर निर्भर है। इस पाठ में दुखद संहार का विवरण है, जो युद्ध की कठिनाईयों के बीच भी आशीर्वाद-निर्णय के दायरे को समझाने का संकेत देता है।

पाठ से निकलती सीख: परमेश्वर के नियम और विश्वास की दृष्टि

इस वाक्य में देखा जाता है कि लोग किस प्रकार दाऊद के नेतृत्व के अधीन संघर्ष कर रहे थे, पर परिणाम स्पष्ट रूप से युद्ध की मानवीय प्रयासों से अधिक परमेश्वर की योजनाओं के अधीन दिखता है। यह बतलाता है कि परमेश्वर कभी भी मानव बड़ी योजनाओं/उद्देश्याओं को स्वेच्छा से नहीं छोड़ता; जब सड़क कठिन हो, तब भी वह अपने विधान के अनुसार क्रिया करता है और कभी-कभी कड़वी सच्चाइयों के माध्यम से स्पष्ट करता है कि शासन, सुरक्षा और जीवन के लिए उसकी इच्छा सर्वोपरि है।

महत्त्वपूर्ण शब्द और imagery की व्याख्या

  • हार जाना — यहाँ हार का मतलब मात्र सैनिक विजय नहीं, बल्कि यह दर्शाता है कि क्या कुछ योजनाएँ या तरीकों से वे सफल हो पाएँगे, यह परमेश्वर की इच्छा पर निर्भर है।
  • बीस हजार मारे गए — यह संख्या से अधिक एक चेतावनी का संकेत है: कठोर परिणामों के साथ चेतावनी कि बिना परमेश्वर की प्रेरणा के कोई भी अभियान असफल और नुकसानदेह हो सकता है।

हाइलाइटेड cross-रेफरेंसेस (संक्षेप में)

यहां कुछ अनुरोधित क्रॉस-रेफरेंसेस को संक्षेप में जोड़ा जाता है ताकि पाठ की गहराई समझी जा सके:

  • 2 शमूएल 11–12 — दाऊद के निर्बल आचरण और उसकी नैतिक परीक्षा के साथ ईश्वर की न्याय-व्यवस्था दिखती है; याद दिलाता है कि असफलताओं के बीच भी परमेश्वर क्षमा-मार्ग खोलते हैं।
  • 1 शमूएल 15 — राजा के निर्देशों के पालन में परमेश्वर के साथ कथन और परिणाम; अपनी योजना के अनुसार नहीं, परमेश्वर के अनुसार चलना कितना ज़रूरी है।
  • भजन 20:7 — सुरक्षा और विजय की असली आधारता विश्वास और परमेश्वर की कृपा पर है, न मानवीय सामर्थ्य पर।

पूर्व-आधार और पुराने टिप्पणीकारों के संकेत

अलबर्ट बर्न्स, एडम क्लार्क, और मैथ्यू हेनरी ने इस प्रकार के पाठों में सेनाओं के परिणामों को अक्सर परमेश्वर की योजना के प्रकाश में देखने का सुझाव दिया है। उनके विचारों के सार से यह निष्कर्ष निकलता है कि: युद्ध-परिणाम कभी भी मानवीय श्रेष्ठता का प्रमाण नहीं होते; बल्कि वे भगवान की योजनाओं और सतत विश्वास की परीक्षा होते हैं।

आज के लिए आवेदन

यह पाठ आज भी यह स्मरक देता है कि कठिन समय में भी विश्वास-आधारित नेतृत्व की भूमिका कितनी महत्त्वपूर्ण है। हमारी निजी लड़ाइयों में भी सुरक्षा परमेश्वर के मार्गदर्शन में है; परिणाम चाहे जो भी हों, हमें परमेश्वर की योजना के प्रति सुन्न और विनम्र रहना चाहिए। कठिन निर्णयों के समय प्रार्थना, नैतिकता और दया के साथ आगे बढ़ना सीखना चाहिए।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

2 शमूएल 18:7 समानांतर पद और संबंधित वचन

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उस दिन बड़ा घोर युद्ध हुआ; और अब्नेर और इस्राएल के पुरुष दाऊद के जनों से हार गए।

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परन्तु दाऊद के जनों ने बिन्यामीनियों और अब्नेर के जनों को ऐसा मारा कि उनमें से तीन सौ साठ जन मर गए।

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अतः जितने इस्राएली राजा के पास अपना मुकद्दमा लेकर आते उन सभी से अबशालोम ऐसा ही व्यवहार किया करता था; इस प्रकार अबशालोम ने इस्राएली मनुष्यों के मन को हर लिया।

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