Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
2 शमूएल 18:1 2 शमूएल 18:2 2 शमूएल 18:3 2 शमूएल 18:4 2 शमूएल 18:5 2 शमूएल 18:6 2 शमूएल 18:7 2 शमूएल 18:8 2 शमूएल 18:9 2 शमूएल 18:10 2 शमूएल 18:11 2 शमूएल 18:12 2 शमूएल 18:13 2 शमूएल 18:14 2 शमूएल 18:15 2 शमूएल 18:16 2 शमूएल 18:17 2 शमूएल 18:18 2 शमूएल 18:19 2 शमूएल 18:20 2 शमूएल 18:21 2 शमूएल 18:22 2 शमूएल 18:23 2 शमूएल 18:24 2 शमूएल 18:25 2 शमूएल 18:26 2 शमूएल 18:27 2 शमूएल 18:28 2 शमूएल 18:29 2 शमूएल 18:30 2 शमूएल 18:31 2 शमूएल 18:32 2 शमूएल 18:33



2 शमूएल 18:7 — तुरंत संदर्भ और संकेत
पठन के तुरन्त सेटअप में, हम देखते हैं कि दाऊद के साम्राज्य के विरुद्ध संघर्ष के बीच इस्राएली सेना ने युद्ध किया और हार का सामना किया। परमेश्वर के मनोभाव और दाऊद के नेतृत्व के बीच यह घटनाक्रम स्पष्ट करता है कि भला-बरका परिणाम केवल मानव रणनीति पर नहीं, बल्कि परमेश्वर की हुकूमत की स्वीकृति पर निर्भर है। इस पाठ में दुखद संहार का विवरण है, जो युद्ध की कठिनाईयों के बीच भी आशीर्वाद-निर्णय के दायरे को समझाने का संकेत देता है।
पाठ से निकलती सीख: परमेश्वर के नियम और विश्वास की दृष्टि
इस वाक्य में देखा जाता है कि लोग किस प्रकार दाऊद के नेतृत्व के अधीन संघर्ष कर रहे थे, पर परिणाम स्पष्ट रूप से युद्ध की मानवीय प्रयासों से अधिक परमेश्वर की योजनाओं के अधीन दिखता है। यह बतलाता है कि परमेश्वर कभी भी मानव बड़ी योजनाओं/उद्देश्याओं को स्वेच्छा से नहीं छोड़ता; जब सड़क कठिन हो, तब भी वह अपने विधान के अनुसार क्रिया करता है और कभी-कभी कड़वी सच्चाइयों के माध्यम से स्पष्ट करता है कि शासन, सुरक्षा और जीवन के लिए उसकी इच्छा सर्वोपरि है।
महत्त्वपूर्ण शब्द और imagery की व्याख्या
हाइलाइटेड cross-रेफरेंसेस (संक्षेप में)
यहां कुछ अनुरोधित क्रॉस-रेफरेंसेस को संक्षेप में जोड़ा जाता है ताकि पाठ की गहराई समझी जा सके:
पूर्व-आधार और पुराने टिप्पणीकारों के संकेत
अलबर्ट बर्न्स, एडम क्लार्क, और मैथ्यू हेनरी ने इस प्रकार के पाठों में सेनाओं के परिणामों को अक्सर परमेश्वर की योजना के प्रकाश में देखने का सुझाव दिया है। उनके विचारों के सार से यह निष्कर्ष निकलता है कि: युद्ध-परिणाम कभी भी मानवीय श्रेष्ठता का प्रमाण नहीं होते; बल्कि वे भगवान की योजनाओं और सतत विश्वास की परीक्षा होते हैं।
आज के लिए आवेदन
यह पाठ आज भी यह स्मरक देता है कि कठिन समय में भी विश्वास-आधारित नेतृत्व की भूमिका कितनी महत्त्वपूर्ण है। हमारी निजी लड़ाइयों में भी सुरक्षा परमेश्वर के मार्गदर्शन में है; परिणाम चाहे जो भी हों, हमें परमेश्वर की योजना के प्रति सुन्न और विनम्र रहना चाहिए। कठिन निर्णयों के समय प्रार्थना, नैतिकता और दया के साथ आगे बढ़ना सीखना चाहिए।