Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
2 शमूएल 5:1 2 शमूएल 5:2 2 शमूएल 5:3 2 शमूएल 5:4 2 शमूएल 5:5 2 शमूएल 5:6 2 शमूएल 5:7 2 शमूएल 5:8 2 शमूएल 5:9 2 शमूएल 5:10 2 शमूएल 5:11 2 शमूएल 5:12 2 शमूएल 5:13 2 शमूएल 5:14 2 शमूएल 5:15 2 शमूएल 5:16 2 शमूएल 5:17 2 शमूएल 5:18 2 शमूएल 5:19 2 शमूएल 5:20 2 शमूएल 5:21 2 शमूएल 5:22 2 शमूएल 5:23 2 शमूएल 5:24 2 शमूएल 5:25



2 शमूएल 5:12 – संदर्भ तथा केंद्रीय तात्पर्य
यह पद दाऊद के साम्राज्य की स्थापना के समय की अनुभूति को दर्शाता है। युद्धों और सत्ता के कठोर परिणामों के बीच, दाऊद यहोवा की कृपा से स्थापित राजा के रूप में मान्यता पाते हैं और उनका शासन इस्राएल की प्रजा के लिए स्थिर और सुरक्षित लगता है। यह वचन विशेष रूप से बताता है कि राजा की सत्ता केवल मानव शक्ति से नहीं, बल्कि परमेश्वर की कृपा—उसकी स्थिरता और मार्गदर्शन—से मिलती है।
मुख्य अर्थ
यह श्लोक दर्शाता है कि दाऊद ने समझ लिया कि परमेश्वर ने उसे इस्राएल का राजा बनाकर शासन के पथ पर स्थिर किया है এবং उसका राज्य उसके द्वारा नहीं, बल्कि उसकी अति-विशिष्ट कृपा से बढ़ा और बनाए रखा गया है। यह सुरक्षा और स्थिरता का मूल है: राजा की सत्ता उसी परमेश्वर के हाथों में है जिसने उसे चुना और स्थापित किया है।
दो-तीन प्रमुख विषय
संदर्भित विचार और तुलनात्मक दृष्टिकोण
सम्बन्धित स्पर्श से यह स्पष्ट होता है कि परमेश्वर के साथ एक राजा के रूप में दाऊद की पहचान एक साझीदार रिश्ते की तरह है—राज्य का भविष्य उसकी स्तिथि से नहीं, बल्कि परमेश्वर की इच्छा और स्थिरता से है। इतिहास के अन्य भागों में भी, जैसे कि दाऊद के चुनने के कारण और उसकी सफलताओं के पीछे परमेश्वर की सहायता दिखती है, जो राजा के लिए एक पवित्र उत्तरदायित्व बनाती है।
कुछ साथ के विचार (संक्षेप में)
वचन-चयनों में से यह विचार मिलता है कि:
अनुशासनात्मक अनुप्रयोग
व्यावहारिक दृष्टिकोण से, आज भी किसी नेतृत्व के लिए यह सीख है कि सफलता और स्थिरता परमेश्वर की कृपा पर निर्भर होती है। कठिन समय में भी ईश्वर की आह्वाहन और मार्गदर्शन को पहचानना, अपनी सामर्थ्य से बढ़कर उसे समर्पित करना और समुदाय के लिए जिम्मेदारी समझना चाहिए।
क्रॉस-रेफरेंस (संक्षेप explanations)
- प्रेरणा के लिए: परमेश्वर के चुने हुए के मार्ग पर विश्वास बनाये रखना—उसी की मदद से राज्य और समुदाय उन्नत होते हैं।
- स्मरण और आभार: दाऊद की तरह हमें भी अपने उपलब्धियों के पीछे परमेश्वर के योगदान को याद रखना चाहिए।
- दायित्व का अहसास: सत्ता/दायरे में रहे निर्णयों में परमेश्वर की योजना को प्रमुखता देना आवश्यक है।
संक्षिप्त निष्कर्ष
2 शमूएल 5:12 बताता है कि दाऊद की सत्ता केवल मानव बल से नहीं, बल्कि यहोवा की स्थापना और आशीर्वाद से है। यह वचन हमारे लिए एक स्मरण है कि स्थिर राज-यज्ञ, सब प्रकार के नेतृत्व और समाज-कल्याण के लिए परमेश्वर की कृपा और मार्गदर्शन आवश्यक है।
उद्धरण नोट
इस पाठ के विशिष्ट संदर्भ में Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के किसी भी समान अंग्रेज़ी-आधारित स्पष्ट उद्धरण ज्ञात हैं तो केवल छोटे अनुभागों के रूप में संलग्न-उद्धरण दिए गए हैं।