Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
2 शमूएल 5:1 2 शमूएल 5:2 2 शमूएल 5:3 2 शमूएल 5:4 2 शमूएल 5:5 2 शमूएल 5:6 2 शमूएल 5:7 2 शमूएल 5:8 2 शमूएल 5:9 2 शमूएल 5:10 2 शमूएल 5:11 2 शमूएल 5:12 2 शमूएल 5:13 2 शमूएल 5:14 2 शमूएल 5:15 2 शमूएल 5:16 2 शमूएल 5:17 2 शमूएल 5:18 2 शमूएल 5:19 2 शमूएल 5:20 2 शमूएल 5:21 2 शमूएल 5:22 2 शमूएल 5:23 2 शमूएल 5:24 2 शमूएल 5:25



2 शमूएल 5:13 का immediate setting
जब दाऊद हेब्रोन में राज कर रहा था, उस समय उसने यरूशलेम की ओर बढ़कर वहाँ कुछ पत्नियाँ बनाने का निर्णय लिया। यह कदम उस समय के सामाजिक और राजनैतिक संदर्भ में स्पष्ट था: राजा के वैवाहिक रिश्ते ძალ-प्रतिष्ठा, सुरक्षा और आशीर्वाद का एक संकेत माने जाते थे। यह आयाम दाऊद के प्रशासन में स्थिरता के पक्ष में था, पर यह भी दिखाता है कि फलस्वरूप उसने घर-परिवार की संरचना को विस्तार दिया, ताकि उसका राजस्व और परिवार सत्ता के केंद्र बनें।
ईश्वर और आस्था के बारे में टेक्स्ट से जो स्पष्ट होता है
यह पद दो गहरे विचार उठाता है: पहला, दाऊद के जीवन में सत्ता का प्रसार और परिवार का विस्तार राजा की शक्ति के प्रदर्शन का एक रूप है; दूसरा, इस विस्तारण से यह भी संकेत मिलता है कि परमेश्वर के चयनित के जीवन में मानवीय कदम कब और कैसे नैतिक दायित्वों के साथ जुड़ते हैं। शास्त्र इस संदर्भ में सीधे निषेध नहीं करता, परन्तु यह ध्यान दिलाता है कि राजा की व्यक्तिगत सिद्धि और परमेश्वर की योजना के बीच संतुलन बनना आवश्यक है।
प्रमुख शब्दों और चित्रों की स्पष्ट व्याख्या
संदर्भित पासेज़ और उनका संक्षिप्त जोड़
- दाऊद के विवाह-विस्तार से जुड़ी अन्य घटनाओं के संदर्भ: 2 शमूएल 3 के अंतर्गत दाऊद के परिवार-योजनाओं का आकलन।
- परमेश्वर की योजना और मानव स्वार्थ के टकरावों के बारे में संदर्भ: 1 इतिहास के लेखों में इन संघर्षों पर टिप्पणी उपलब्ध है।
- भविष्य के संदिग्ध राजनैतिक निर्णयों के बारे में दाऊद के आचरण का नैतिक आकलन।
पवित्र लेख के साथ आधुनिक अनुप्रयोग
- विश्वस्त जीवन में सत्ता और परिवार-निर्माण के बीच संतुलन बनाये रखना चाहिए। दाऊद के कदम न्यायसंगत प्रयोजन के बिना अधिक उन्नति की चाह में उठते दिख सकते हैं, जिससे व्यक्तिगत आचरण और सामूहिक जिम्मेदारी में फर्क आता है।
- परमेश्वर पर विश्वास बनाए रखना और नेतृत्व में नैतिकता का पालन करना अनिवार्य है; सत्ता का विस्तार केवल समय-सम्मत और दिव्य योजना के अनुरूप हो।
थोड़े-से उद्धृत विचार (एतिहासिक टिप्पणीकारों के निशान)
पहचान योग्य सार्वजनिक-डायरे से संकुचित संदर्भों का विचार करते हुए:
यहाँ Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के संक्षिप्त, अभिन्न टिप्पणीय संकेत उपस्थित हैं।
• मैथ्यू हेनरी: “रात-रात नहीं, परिश्रम करने और कार्य-निर्भरता के साथ प्रभु के मार्ग को मानना चाहिए।” (संक्षेप) उद्धृत शब्दांश का संपूर्ण पाठ नीचे नहीं दिया गया है, पर भावार्थ स्पष्ट है: राजा के जीवन में पवित्रता और उत्तरदायित्व का संतुलन आवश्यक है।
• एडवर Barnes: उसी क्रम में, सिंहासन के विस्तार के साथ व्यक्तिगत जीवन की सावधानी और परिस्थिति-प्रत्येक्षण की आवश्यकता।
• Adam Clarke: राजसी निर्णयों के साथ नैतिक विवेक का महत्त्व, और यह कि परमेश्वर की योजना में मानव गतिविधियों का समन्वय कैसे होना चाहिए।
संक्षिप्त निष्कर्ष
2 शमूएल 5:13 हमें दिखाते हैं कि दाऊद के राजनैतिक-विकास के समय आंतरिक नैतिकता और धार्मिक दायित्वों की प्राथमिकता आवश्यक है। आज भी हमारे लिए सच्चे नेतृत्व वही है जो परमेश्वर के उद्देश्य को ध्यान में रखकर, सामाजिक और पारिवारिक जीवन में न्याय और प्रेम को COMBINE करे।