Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
2 शमूएल 5:1 2 शमूएल 5:2 2 शमूएल 5:3 2 शमूएल 5:4 2 शमूएल 5:5 2 शमूएल 5:6 2 शमूएल 5:7 2 शमूएल 5:8 2 शमूएल 5:9 2 शमूएल 5:10 2 शमूएल 5:11 2 शमूएल 5:12 2 शमूएल 5:13 2 शमूएल 5:14 2 शमूएल 5:15 2 शमूएल 5:16 2 शमूएल 5:17 2 शमूएल 5:18 2 शमूएल 5:19 2 शमूएल 5:20 2 शमूएल 5:21 2 शमूएल 5:22 2 शमूएल 5:23 2 शमूएल 5:24 2 शमूएल 5:25



शब्दार्थ का सीधा निष्कर्ष
2 शमूएल 5:21 में बताई गई घटना से यह स्पष्ट होता है कि दाऊद के नेतृत्व में वह लोग, जिन्हें वेद-प्रचलित प्रतिमाओं से मुरझा कर रहा था, कुछ प्रतिमाओं को छोड़ कर आगे बढ़े और दाऊद ने उन्हें उठा लिया। यह हमारे लिए एक संकेत है कि दाऊद के समय में प्रभु के सम्मुख प्रतिमाओं को स्वीकार न करके वह एक धार्मिक-पारदर्शी परिवर्तन चाहते थे।
तिहासिक-संदर्भ पृष्ठभूमि
यह पाठ दाऊद के शासन के पहले वर्षों से जुड़ा है जब उसने यहूदी समुदाय को राजनीतिक और धार्मिक पुनर्निर्माण की दिशा में अग्रसर किया। प्रतिमाओं से हटकर प्रभु की उपासना एक नयी नीति का भाग बनी, जिसमें दाऊद ने प्रतिमा-उत्सव से दूरी बनाए रखी। इस संदर्भ में यह पंक्ति संकेत करती है कि प्रतिमाथा से हटकर एक एकेश्वरवादी व्यवस्थित आस्था स्थापित करने की दिशा में लोग बढ़ रहे थे।
व्याख्यात्मक अवलोकन
मुख्य विचार
अनुसंधान-यथार्थ संदर्भ
उद्धृत पंक्ति कुछ पुराने टिप्पणीकारों के अनुसार प्रतिमाओं के लिए एक संकेत है कि समाज ने उनकी शक्ति और आस्था से मुक्त होकर ईश्वर की सत्य-आस्था को प्राथमिकता दी।
अनुसंग ठीक-ठीक संदर्भ
संप्रेषण में यह पाठ निम्न धार्मिक विषयों से जुड़ता है:
व्यावहारिक निष्कर्ष
अपनी आस्था में स्पष्ट और एकेश्वरी विचार बनाए रखना जरूरी है। प्रतिमा-उपासना से दूरी बनाकर परमेश्वर के साथ सीधा संबंध रखना, दैनिक जीवन में ईश्वर-निष्ठा के अभ्यास को मजबूत बनाता है।
कोर्टे-नोट्स (2-3 तुलनात्मक संदर्भ के साथ संक्षेप)
इन cross-references की संक्षिप्त व्याख्या:
उद्धृत उद्धरण: यदि उपलब्ध हो, उनके संदेशों से यह स्पष्ट किया गया है कि प्रतिमाओं से दूरी बनाकर 하나님 के साथ नये धार्मिक-रणनीति की ओर बढ़ना उचित है, और दाऊद की नीतियाँ इस दिशा में संकेत देती हैं।