Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
2 शमूएल 5:1 2 शमूएल 5:2 2 शमूएल 5:3 2 शमूएल 5:4 2 शमूएल 5:5 2 शमूएल 5:6 2 शमूएल 5:7 2 शमूएल 5:8 2 शमूएल 5:9 2 शमूएल 5:10 2 शमूएल 5:11 2 शमूएल 5:12 2 शमूएल 5:13 2 शमूएल 5:14 2 शमूएल 5:15 2 शमूएल 5:16 2 शमूएल 5:17 2 शमूएल 5:18 2 शमूएल 5:19 2 शमूएल 5:20 2 शमूएल 5:21 2 शमूएल 5:22 2 शमूएल 5:23 2 शमूएल 5:24 2 शमूएल 5:25



मुख्य व्याख्या बिंदु
2 शमूएल 5:4 बताता है कि दाऊद प्रथम शासन-हर पुत्र के जन्म से नहीं, बल्कि बारह वर्ष के बाद राजा बना, और चालीस वर्ष तक राज किया। यह वाक्यांश हमारी समझ में राजगति के समय-क्रम और दाऊद के नेतृत्व के स्थायित्व को स्पष्ट करता है। यह बताता है कि परमेश्वर के वादा-नुस्खे और समय-चयन से राजत्व की शुरुआत और उसकी दीर्घायु कैसे जुड़ी है—न केवल वीरता या राजनीतिक कुशलता से, बल्कि परमेश्वर की योजना के अनुसार प्रस्तुत होती है।
पाठ-संदर्भ का literary-context
यह अध्याय 5 में दाऊद के राजधानी बनना और इजराइल के राज्यों की एकता के पथ को दिखाता है। 1‑3 अध्यायों में स्पष्ट होता है कि यरूशालत की राजधानी के लिए दाऊद को royaume-योग्यता कैसे मिली, और 4‑5 अध्यायों में उसका शासन स्थापित होता है। यह verse एक समय-यात्रा के संकेत देता है—राज्य स्थापित होने से पहले दाऊद की शासन-यात्रा का लंबा चरण रहा, जिसमें ईश्वर की अनुमति और सामुदायिक स्वीकृति प्रमुख थी।
theological significance
यह आयाम दिखाता है कि शासन का स्थायित्व ईश्वर की योजना के अनुरूप है, न कि मानव की सत्ता-लालसा से। दाऊद की आयु-निर्दिष्ट राज्य-काल बताता है कि परमेश्वर की चयनित प्रेरणा के अनुसार राजा का कार्य समय-समय पर पूर्ण होता है, और शुद्धता के साथ किया गया राज-कार्य चिरस्थायी बनता है। यह भी संकेत देता है कि राजा के अधिकार में समय की सीमा है—एक पार_TRANSITION_ जो परमेश्वर के नियंत्रण में रक्षित है, ताकि वह अपने उद्देश्य को पूरी तरह पूरा कर सके।
Cross-references (संक्षिप्त व्यাখ्या)
reflection questions (विचार-प्रश्न)
conclusion
2 शमूएल 5:4 में दाऊद के शासन-काल की आरम्भिक पुष्टि यह संकेत देती है कि परमेश्वर की योजना में समय-निर्धारित कदम आवश्यक हैं। दाऊद को तीस वर्ष की आयु पर राज्य-संभाल और चालीस वर्ष की दीर्घ शासन ने एक स्थिर, दृढ़्र-नियंत्रित राजयात्रा को दर्शाया। यह संदेश आज भी है: सही समय पर ईश्वर के उद्देश्य के अनुरूप आचरण ही महान और स्थाय ज्ञान देता है।
सूचना-उद्धरण (public-domain commentary)
उद्धृत विचार यदि आवश्यक हों, तो क्रेडिट के साथ मूल विचार में समाहित किए जाते हैं: Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के सार्वजनिक-डायमेंशन टिप्पणीकारों के सामान्य अंतरों के आधार पर, राजा के आर्हन और परमेश्वर की योजना के महत्त्व पर समेकित दृष्टिकोण प्रस्तुत किया गया है।