Old Testament
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प्रेरितों के काम 1 प्रेरितों के काम 2 प्रेरितों के काम 3 प्रेरितों के काम 4 प्रेरितों के काम 5 प्रेरितों के काम 6 प्रेरितों के काम 7 प्रेरितों के काम 8 प्रेरितों के काम 9 प्रेरितों के काम 10 प्रेरितों के काम 11 प्रेरितों के काम 12 प्रेरितों के काम 13 प्रेरितों के काम 14 प्रेरितों के काम 15 प्रेरितों के काम 16 प्रेरितों के काम 17 प्रेरितों के काम 18 प्रेरितों के काम 19 प्रेरितों के काम 20 प्रेरितों के काम 21 प्रेरितों के काम 22 प्रेरितों के काम 23 प्रेरितों के काम 24 प्रेरितों के काम 25 प्रेरितों के काम 26 प्रेरितों के काम 27 प्रेरितों के काम 28Verse
प्रेरितों के काम 10:1 प्रेरितों के काम 10:2 प्रेरितों के काम 10:3 प्रेरितों के काम 10:4 प्रेरितों के काम 10:5 प्रेरितों के काम 10:6 प्रेरितों के काम 10:7 प्रेरितों के काम 10:8 प्रेरितों के काम 10:9 प्रेरितों के काम 10:10 प्रेरितों के काम 10:11 प्रेरितों के काम 10:12 प्रेरितों के काम 10:13 प्रेरितों के काम 10:14 प्रेरितों के काम 10:15 प्रेरितों के काम 10:16 प्रेरितों के काम 10:17 प्रेरितों के काम 10:18 प्रेरितों के काम 10:19 प्रेरितों के काम 10:20 प्रेरितों के काम 10:21 प्रेरितों के काम 10:22 प्रेरितों के काम 10:23 प्रेरितों के काम 10:24 प्रेरितों के काम 10:25 प्रेरितों के काम 10:26 प्रेरितों के काम 10:27 प्रेरितों के काम 10:28 प्रेरितों के काम 10:29 प्रेरितों के काम 10:30 प्रेरितों के काम 10:31 प्रेरितों के काम 10:32 प्रेरितों के काम 10:33 प्रेरितों के काम 10:34 प्रेरितों के काम 10:35 प्रेरितों के काम 10:36 प्रेरितों के काम 10:37 प्रेरितों के काम 10:38 प्रेरितों के काम 10:39 प्रेरितों के काम 10:40 प्रेरितों के काम 10:41 प्रेरितों के काम 10:42 प्रेरितों के काम 10:43 प्रेरितों के काम 10:44 प्रेरितों के काम 10:45 प्रेरितों के काम 10:46 प्रेरितों के काम 10:47 प्रेरितों के काम 10:48



प्रेरितों के काम 10:28 – “अन्यजाति की संगति करना या उसके यहाँ जाना यहूदी के लिये अधर्म है, परन्तु परमेश्वर ने मुझे बताया है कि किसी मनुष्य को अपवित्र या अशुद्ध न कहूँ।”
संक्षिप्त अवलोकन: यह वाक्य پیटर के उस दृश्य के संदर्भ में आता है जिसमें परमेश्वर ने उसे बताए कि वह किसी जाति के प्रति पूर्वग्रह न रखे। प्रेरित इस उल्लासपूर्ण संदेश को स्वीकार करते हैं कि ईश्वर सबके साथ प्रेम और उद्धार की योजना रखते हैं, चाहे वे यहूदी हों या गैर-यहूदी। वचन हमें यह सिखाता है कि द्वैत जातीय भेदभाव चूँकि अधर्म है, परमेश्वर हर मनुष्य को पवित्र और योग्य मानते हैं जब उसका चेहरा-चपा विश्वास में लगन से जुड़ता है।
वचन का पाठ-विवेचन
पैग़म्बर के घर की सभा में पेत्रुस ने स्पष्ट किया कि यहूदियों के लिये अन्यजाति के साथ संगति करना या उनके यहाँ जाना अशुद्धि मानी जाती थी; लेकिन परमेश्वर ने उससे कहा कि किसी मनुष्य को अपवित्र न कहे जाए। इस कथन से यह स्पष्ट होता है कि भौतिक पूजा-पद्धतियाँ और जातीय सीमाएँ अब उद्धार के मार्ग का बाधक नहीं रहीं, बल्कि विश्वास का सही केन्द्र परमेश्वर की कृपा है जो हर जाति और वर्ण के लोगों को गले लगाती है।
मुख्य आध्यात्मिक पाठ
अनुशीलन और क्रिया-योग
इस वचन से व्यवहारिक पाठ यह है: दिसम्बर नहीं कि आप किसी से दूरी बनाएं, बल्कि यह कि आप प्रेम से बुलाते रहें—यही ईश्वर की इच्छा है। यदि आप किसी दूरी को तोड़ते हैं, तो उसे यीशु-प्रेम की तरह ग्रहण करें। यह संदेश समुदाय में एकता बनाये रखने के लिये आवश्यक है—एक ही उद्धारक के साथ सभी एक पिता के पुत्र हैं।
अन्य प्रख्यात टिप्पणीकारों से संगति
मार्थु थॉमी (Matthew Henry) आदि वक्ताओं ने इस दृश्य को यह दिखाने के लिये उद्धृत किया है कि ईश्वर के प्रवेश-सूत्र सभी मानवजातियों के लिए खुले हैं और कोई भी उपेक्षित नहीं।
क्रॉस-रेफरेंस (संक्षेप में)
यूहन्ना 3:16—ईश्वर ने प्रेम के कारण निर्धारण किया कि सब तक उद्धार पहुंचे; रोम 10:12—यही संदेश यहूदियों और गैर-यहूदियों के बीच भेदभाव का अंत है; एफिसी 2:11–22—आस्तीन और पवित्रता के बीच एक नया सामंजस्य बना। इन संदर्भों में दिखती है कि विश्वास ही सामूहिक एकता और परमेश्वर की योजना की कुंजी है।
संक्षेप-नोट
यह वचन दिखाता है कि पवित्रता का वास्तविक अर्थ है—परमेश्वर के प्रेम में सभी का स्वागत। जातीय सीमाओं का अतिक्रमण कर भी हम उसे उस गहराई से मानें, जिसे पवित्र आत्मा ने प्रेरित किया है।
सार: परमेश्वर हर मनुष्य को पवित्र और उद्धार के योग्य मानते हैं; हमारा दायित्व है उनकी दृष्टि में किसी को अधर्म-समझना नहीं, बल्कि प्रेम और विश्वास के साथ उन्हें सम्मान देना।
अगर आप चाहें, मैं नीचे 2-3 पंक्तियों में इस पाठ के लिए एक दृश्य-नीति भी जोड़ सकता हूँ—पर अभी संक्षेप में यही बिदा देता हूँ।