Old Testament
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प्रेरितों के काम 1 प्रेरितों के काम 2 प्रेरितों के काम 3 प्रेरितों के काम 4 प्रेरितों के काम 5 प्रेरितों के काम 6 प्रेरितों के काम 7 प्रेरितों के काम 8 प्रेरितों के काम 9 प्रेरितों के काम 10 प्रेरितों के काम 11 प्रेरितों के काम 12 प्रेरितों के काम 13 प्रेरितों के काम 14 प्रेरितों के काम 15 प्रेरितों के काम 16 प्रेरितों के काम 17 प्रेरितों के काम 18 प्रेरितों के काम 19 प्रेरितों के काम 20 प्रेरितों के काम 21 प्रेरितों के काम 22 प्रेरितों के काम 23 प्रेरितों के काम 24 प्रेरितों के काम 25 प्रेरितों के काम 26 प्रेरितों के काम 27 प्रेरितों के काम 28Verse
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प्रेरितों के काम 10:35 – पाठ का तात्पर्य और आशय
पद का संदर्भ: प्रेरितों के काम 10:35 में पेत्रुस के संदेश के संदर्भ में यह स्मरण कराया गया कि एपेयथ समूचे यूरेशिया में भरोसेमंद हर जाति के लोग—जो परमेश्वर से डरते और धार्मिक काम करते हैं—उसके लिए उपयुक्त हैं। यह दृश्य प्रभावपूर्ण रूप से यह दिखाता है कि ईश्वर सभी निवासियों के प्रति कृपाशील है और उसकी इच्छा सभी लोगों तक पहुँचने की है।
इस पाठ के बारे में स्पष्ट बातें
यह वाक्य बताता है कि परमेश्वर “हर जाति में” ऐसे आदमियों को स्वीकार करता है जो उसे डरते हैं और धार्मिक कर्म किया करते हैं। इसका स्पष्ट संदेश है कि ईश्वर के साथ सम्बद्धता सीमा-रेखा से परे है; भिन्न-भिन्न जातियाँ, भाषाएं और संस्कार ईश्वर की दृष्टि में मूल्यहीन नहीं हैं, यदि व्यक्ति उसी ईश्वर के भय और श्रद्धा से जुड़ा रहना चाहता है।
ईश्वर और विश्वास के बारे में प्रमुख बिंदु
महत्त्वपूर्ण शब्द-चित्र और उनकी व्याख्या
“जो उससे डरता” — यह शब्द समूह ईश्वर के सम्मान और भय को दर्शाता है, जो जुड़ाव और आज्ञापालन की शुरुआत है। “धार्मिक काम करता है”—यह व्यक्तिगत विश्वास की प्रगाढ़ता और जीवित धर्म की अभिव्यक्ति को सूचित करता है; असल धार्मिक जीवन वह है जिसमें आस्था व्यवहार में उतरती है।
अन्य संबंधित शास्त्री-उद्धरण (संशोधित एकत्रित सार)
हेन्री (Matthew Henry) और बॉर्न्स (Albert Barnes) तथा अडम क्लार्क (Adam Clarke) के संकेतों से प्रेरित सार:
हेन्री का निष्कर्ष: सभी देशों के लोगों के लिए परमेश्वर की कृपा खुली है; यह कड़ाई से वह इस संदेश में स्पष्ट करते हैं कि बाहरी पहचान नहीं, बल्कि ईश्वर-भय और नेक कर्म ही प्रवेश के मानक हैं।
बॉर्न्स का संकेत: यह बात दिखाती है कि ईश्वर की ओर से सभी जातियों के लिए निमन्त्रण एक सार्वभौमिक प्रेम का प्रमाण है—यानी स्त्री-पुरुष, अज्ञानी-ज्ञानी किसी के लिये भेदभाव नहीं।
क्लार्क के अनुसार: इस वाक्य में ईश्वर के वचन का सार्वभौमिक प्रसार स्पष्ट होता है; यह पवित्र आदेश है कि विश्वास-जीवन व्यवहार से प्रमाणित होना चाहिए, न कि केवल जातीय पहचान से।
इन तीनों का संयुक्त निष्कर्ष: प्रभु की कृपा सभी के लिए खुली है और सही धार्मिक जीवन वह है जिसमें भय, सम्मान और कर्म-संयोजन हो।
क्रॉस-रेफरेंस और उनके संक्षिप्त अर्थ
आज-के-Day के लिए अनुप्रयोग
- हमारी चर्चाएँ और मिशन कार्य में प्रयत्न यह सुनिश्चित करें कि संदेश का दायरा सीमित नहीं रहे; हम हर मानव के लिए ईश्वर की कृपा की उद्घोषणा करें।
- व्यक्तिगत जीवन में भय और श्रद्धा से जुड़ना, तब ही वास्तविक धार्मिक कर्म सामने आते हैं—यानी दान, सेवा, प्रार्थना, और नैतिक आचरण जीवन का अभिन्न अंग बनने चाहिए।
संक्षिप्त एकीकृत निष्कर्ष
इस वाक्य से स्पष्ट होता है कि ईश्वर सबके लिए खुला है—जो उसके डर के साथ जीवन जीते हैं और सत्य के अनुसार कर्म करते हैं, वे उसकी प्रसन्नता का पात्र ठहरते हैं। यह संदेश विशेष रूप से समुदायों के बीच भेदभाव घटाकर एक विवेकशील, प्रेमपूर्ण चेला-जीवन की वकालत करता है।