Old Testament
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प्रेरितों के काम 1 प्रेरितों के काम 2 प्रेरितों के काम 3 प्रेरितों के काम 4 प्रेरितों के काम 5 प्रेरितों के काम 6 प्रेरितों के काम 7 प्रेरितों के काम 8 प्रेरितों के काम 9 प्रेरितों के काम 10 प्रेरितों के काम 11 प्रेरितों के काम 12 प्रेरितों के काम 13 प्रेरितों के काम 14 प्रेरितों के काम 15 प्रेरितों के काम 16 प्रेरितों के काम 17 प्रेरितों के काम 18 प्रेरितों के काम 19 प्रेरितों के काम 20 प्रेरितों के काम 21 प्रेरितों के काम 22 प्रेरितों के काम 23 प्रेरितों के काम 24 प्रेरितों के काम 25 प्रेरितों के काम 26 प्रेरितों के काम 27 प्रेरितों के काम 28Verse
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प्रेरितों के कार्य 10:42 पर व्याख्या: प्रचार-गवाही और न्यायी ठहराव
मूल संदेश यही है: ईश्वर ने मरकर भी जी उठे और जीवन के लिए न्याय-न्याय का आधार होने के कारण यह संदेश लोगों तक पहुँचाने को हम पर रखा है। जो आज्ञा यीशु ने दिए, वह सारतः यह है कि हमें उसका प्रमाण देना है कि वह परमेश्वर की जीवित सत्ता और मर चुके लोगों के निर्णायक न्यायी के रूप में मान्य है।
कवच-प्रसंग (साहित्यिक संदर्भ)
यह वाक्य प्रेरितों के कार्य के विशिष्ट क्रम में आता है, जहाँ पहली चर्चाओं में पेत्रुस ने निष्कर्ष निकाला कि ईश्वर ने यीशु को जी उठाया और उसे जीवितों के ნაცर न्याय-कर्ता के रूप में स्थापित किया है। यह उद्घोषणा ईमानदार गवाही और सार्वजनिक प्रचार का आदर्श बनती है—यानी प्रचार में सिर्फ कीर्तन नहीं, बल्कि प्रेरणा और सत्य की पुष्टि भी है।
धर्म-तत्व और उद्देश्य
यह शिक्षण तीन बिंदुओं पर केंद्रित है: 1) प्रचार का दायित्व: हमें लोगों के बीच यह संदेश पहुँचाना है कि यीशु वही है जिसे परमेश्वर ने जीवितों और मरे हुओं के न्यायी के रूप में ठहराया है। 2) गवाही की सत्ता: यह गवाही न केवल प्रेरणात्मक है, बल्कि इतिहाससत्य और उद्धार का प्रमाण है। 3) चयन का क्षेत्र: वे जो इसे मानते हैं, उनके लिए जीवन का नया मार्ग खुलता है; जो नहीं मानते, उनके लिए न्याय का मार्ग खुला रहता है।
तीन विविध दृष्टिकोण से बोध
आध्यात्मिक प्रभाव और cross-refs
पश्चात्ताप और विश्वास के साथ जुड़ाव इस संदेश का केंद्र बनता है। नीचे दिए गए संकेत-ग्रंथों से धारणा स्पष्ट होती है:
इन संदर्भों से संकेत मिलता है कि प्रचार का उद्देश्य न केवल यहूदियों के लिए बल्कि सभी राष्ट्रों के लिए जीवन के मार्ग की स्पष्ट दिखावट है—यही युग-समय का संदेश है।
याद रखने योग्य प्रश्न
संक्षिप्त निष्कर्ष
प्रेरितों के कार्य 10:42 हमें याद दिलाते हैं कि चर्च का मुख्य काम सत्य की गवाही देना है—यह वही है जिसे परमेश्वर ने जीवितों और मर हुओं के न्यायी के रूप में स्थापित किया है। जीवन के रास्ते की बुनियाद यही है कि यीशु मसीह हमारे उद्धारक और न्याय-निर्णायक के रूप में क्रिस-आस्था का केंद्र हैं। हमारी भूमिका है सरल, स्पष्ट और निर्भीक प्रचार—ताकि हर व्यक्ति इस सच को अपने जीवन में ग्रहण करे।
महत्त्वपूर्ण उद्धरण (पश्च-निकट संदर्भ)
यदि आप मॉडर्न-पीठिका के मानक टिप्पणीकारों के शब्दों पर विचार करते हैं, तो Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के प्रकाशनों से मिलते-जुलते दार्शनिक संकेत मिलते हैं। ध्यान दें:endorsed exact short quotations उपलब्ध होने पर ही उल्लेखित हैं:
कई साक्षात्कारों में Henry का मूल विचार इसी प्रकार व्यक्त होता है कि गवाही और प्रचार के साथ विश्वास के मार्ग को खोलना परमेश्वर का काम है; Barnes भी यही कहते हैं कि यह संदेश मानव-स्वार्थ से ऊपर उठकर उद्धार के वास्तविक प्रमाण को दर्शाता है; Clarke यह बताने में समर्थ बनते हैं कि यह न्याय-तत्व का उद्घोष है, जो सभी को देखने के लिए खुला है।