Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
प्रेरितों के काम 1 प्रेरितों के काम 2 प्रेरितों के काम 3 प्रेरितों के काम 4 प्रेरितों के काम 5 प्रेरितों के काम 6 प्रेरितों के काम 7 प्रेरितों के काम 8 प्रेरितों के काम 9 प्रेरितों के काम 10 प्रेरितों के काम 11 प्रेरितों के काम 12 प्रेरितों के काम 13 प्रेरितों के काम 14 प्रेरितों के काम 15 प्रेरितों के काम 16 प्रेरितों के काम 17 प्रेरितों के काम 18 प्रेरितों के काम 19 प्रेरितों के काम 20 प्रेरितों के काम 21 प्रेरितों के काम 22 प्रेरितों के काम 23 प्रेरितों के काम 24 प्रेरितों के काम 25 प्रेरितों के काम 26 प्रेरितों के काम 27 प्रेरितों के काम 28Verse
प्रेरितों के काम 17:1 प्रेरितों के काम 17:2 प्रेरितों के काम 17:3 प्रेरितों के काम 17:4 प्रेरितों के काम 17:5 प्रेरितों के काम 17:6 प्रेरितों के काम 17:7 प्रेरितों के काम 17:8 प्रेरितों के काम 17:9 प्रेरितों के काम 17:10 प्रेरितों के काम 17:11 प्रेरितों के काम 17:12 प्रेरितों के काम 17:13 प्रेरितों के काम 17:14 प्रेरितों के काम 17:15 प्रेरितों के काम 17:16 प्रेरितों के काम 17:17 प्रेरितों के काम 17:18 प्रेरितों के काम 17:19 प्रेरितों के काम 17:20 प्रेरितों के काम 17:21 प्रेरितों के काम 17:22 प्रेरितों के काम 17:23 प्रेरितों के काम 17:24 प्रेरितों के काम 17:25 प्रेरितों के काम 17:26 प्रेरितों के काम 17:27 प्रेरितों के काम 17:28 प्रेरितों के काम 17:29 प्रेरितों के काम 17:30 प्रेरितों के काम 17:31 प्रेरितों के काम 17:32 प्रेरितों के काम 17:33 प्रेरितों के काम 17:34



प्रेरितों के काम 17:11 का अर्थ
इस वाक्य का सरल अर्थ है: थिस्सलुनीके के यहूदियों ने खुले मन से वचन को ग्रहण किया, गहराई से खोज-बीन की, हर दावे के पीछे सत्य को ढूंढ़ने की लालसा दिखाई, और देते समय उन्होंने प्रतिदिन पवित्रशास्त्रों को पढ़कर यह जाँचा कि क्या बातें सच थीं।
पृष्ठभूमि और संस्थागत संदर्भ
यह पद्य प्रेरितों के काम के अध्याय 17 में थिस्सलुनीका में पौलों और साथी यूहन्ना/स्लेक्ट के प्रचार के समय का है। वहां के यहूदियों ने नये तरीके से प्रचार को सुना, पर वे पवित्रशास्त्र से तुलना कर निर्णय ले रहे थे कि संदेश सही है या नहीं। यह दर्शाता है कि समुदायिक परामर्श, कुलीनों की मान्यता नहीं, बल्कि धर्म-संस्करण की कसौटी वे स्वयं पवित्र शास्त्र से करना चाहते थे।
व्याख्यात्मक अवलोकन
छोटे थीमैटिक बिंदु
अन्य संबंधित पद और उनके अर्थ
यूहन्ना 5:39— शास्त्रों में तुम्हें जीवन मिलता है, परन्तु तुम मुझे नहीं देखते; पवित्र शास्त्र की कसौटी सही निर्णय की तरफ इंगित करती है।
अंतिम पदार्थ 17:11 की तर्ज़ पर— प्रभु के शब्दों के सत्यापन के लिए भक्तों को पवित्रशास्त्र के ठोस प्रमाणों पर टिके रहना चाहिए।
प्रेरितों के काम 17:30–31— परमेश्वर द्वारा निर्धारित दिन का न्याय और उद्धारक का निर्णय सीधे पवित्रशास्त्र के अनुसार आता है; यह बताता है कि संदेश की जाँच होने पर भी यह परम सत्य है।
व्यावहारिक takeaway
जब भी हम किसी शिक्षण या प्रचार को सुनें, तो उसे अपनी धारणाओं से नहीं, पवित्रशास्त्र के प्रकाश में जाँचें। पाठ के पीछे प्रमाण, संदर्भ और स्पष्ट संदिग्ध शब्दों पर विचार करें। सही आस्था वही है जो तथ्य-आधार पर टिके और जीवन में परिवर्तन लाए।
संकेतित उद्धरण (public-domain टिप्पणीकारों से)
यदि आप चाहे तोMatthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke या अन्य सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणीकारों की सामान्य अंतर्दृष्टि को संदर्भित कर सकते हैं; नीचे केवल परिचयात्मक संकेत दिए गए हैं:
• Matthew Henry: “Those that have an honest desire to know the truth will search the scriptures daily.”
• Albert Barnes: “The Bereans did not dismiss the word on mere outward respect, but searched the Scriptures to verify the message.”
• Adam Clarke: “The Bereans’ diligence shows the right spirit toward divine truth—continuous examination by the light of Scripture.”