Old Testament
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प्रेरितों के काम 1 प्रेरितों के काम 2 प्रेरितों के काम 3 प्रेरितों के काम 4 प्रेरितों के काम 5 प्रेरितों के काम 6 प्रेरितों के काम 7 प्रेरितों के काम 8 प्रेरितों के काम 9 प्रेरितों के काम 10 प्रेरितों के काम 11 प्रेरितों के काम 12 प्रेरितों के काम 13 प्रेरितों के काम 14 प्रेरितों के काम 15 प्रेरितों के काम 16 प्रेरितों के काम 17 प्रेरितों के काम 18 प्रेरितों के काम 19 प्रेरितों के काम 20 प्रेरितों के काम 21 प्रेरितों के काम 22 प्रेरितों के काम 23 प्रेरितों के काम 24 प्रेरितों के काम 25 प्रेरितों के काम 26 प्रेरितों के काम 27 प्रेरितों के काम 28Verse
प्रेरितों के काम 17:1 प्रेरितों के काम 17:2 प्रेरितों के काम 17:3 प्रेरितों के काम 17:4 प्रेरितों के काम 17:5 प्रेरितों के काम 17:6 प्रेरितों के काम 17:7 प्रेरितों के काम 17:8 प्रेरितों के काम 17:9 प्रेरितों के काम 17:10 प्रेरितों के काम 17:11 प्रेरितों के काम 17:12 प्रेरितों के काम 17:13 प्रेरितों के काम 17:14 प्रेरितों के काम 17:15 प्रेरितों के काम 17:16 प्रेरितों के काम 17:17 प्रेरितों के काम 17:18 प्रेरितों के काम 17:19 प्रेरितों के काम 17:20 प्रेरितों के काम 17:21 प्रेरितों के काम 17:22 प्रेरितों के काम 17:23 प्रेरितों के काम 17:24 प्रेरितों के काम 17:25 प्रेरितों के काम 17:26 प्रेरितों के काम 17:27 प्रेरितों के काम 17:28 प्रेरितों के काम 17:29 प्रेरितों के काम 17:30 प्रेरितों के काम 17:31 प्रेरितों के काम 17:32 प्रेरितों के काम 17:33 प्रेरितों के काम 17:34



प्रेरितों के काम 17:3— यहीं अर्थ
यह पद यीशु मसीह के पदार्पण का उद्घाटन करते हुए बताता है कि प्रेरित पवित्रशास्त्र के अनुसार मसीह के दुःख, मृत्यु के बाद जी उठना—यह सब आवश्यक था, ताकि विश्वासी उसे ईश्वर द्वारा मसीह और प्रभु के रूप में ग्रहण करें।
पृष्ठभूमि और पाठ-संदर्भ
उन्हीं दिनों पौलुस बाइबल के सत्य की योजना को यहूदियों और यूनानी जनता के बीच समझाने लगे। इस विशेष भाषण में वे क्रमबद्ध ढंग से दिखाते हैं कि मसीह की पुष्टि कैसे पुरानी भविष्यवाणियों के अनुरूप है: दुःख उठाना और मरे हुओं में से जी उठना, यह परमेश्वर की योजना का भाग है। यह संदेश एसेनोपोलिस और थेसालूनिकी के प्रवास के दौरान चर्चों के लिए केंद्रीय था, ताकि लोग यीशु को मसीह के रूप में स्वीकार करें।
व्याख्यानात्मक निष्कर्ष
- दुःख उठना और जी उठना—ये दो घटक मसीह की भूमिका के केंद्र हैं: दुख वह परीक्षण है जो नबताता है कि मसीह मानवता के दर्द के साथ जुड़ा है; जी उठना उसकी परम सत्ता और जीवन की पुष्टि है।
- मसीह की यीशु identiteit—“यही यीशु जिसकी मैं तुम्हें कथा सुनाता हूँ, मसीह है”—पौलुस स्पष्ट कर रहे हैं कि यीशु में वही अभिषिक्त है, जिसका भविष्यवाणी के अनुसार आगमन हुआ था।
मुख्य थीमैटिक बिंदु
अन्य संदर्भ संबंध
- रोम 1:3-4 का संकेत: मसीह का दैवीय वंशावली तथा पवित्र आत्मा से पुष्टि।
- 1 पत 1:3-4: जी उठना जीवन की आशा देता है, और पवित्रता में भागीदारी का मार्ग खोलता है।
- लूका 24:46-47: मसीह के दुख, मरना, और जी उठना स्पष्ट रूप से समझाए जाते हैं ताकि चेलों के लिए प्रचारी प्रेरणा बने।
संक्षिप्त प्रायोगिक takeaway
ईमानदार विश्वास के लिए यीशु के दुःख-सहने और जी उठने की कहानी को स्वीकारना आवश्यक है। यह घटनाक्रम न सिर्फ ऐतिहासिक सत्य है, पर हर पीढ़ी के लिए उद्धार का मार्ग भी है—ताकि हम परमेश्वर के अधिकारी हों और प्रभु यीशु के साथ पुनर्जीवन की उम्मीद में जीयें।
उद्धृत संक्षेप उल्लेख
यदि आप Matthew Henry, Albert Barnes, या Adam Clarke के शब्दों से एक संक्षेप उद्धरण चाहते हैं, वे यह विचारनों के साथ इस अध्याय की पुष्टि करते हैं: मसीह के दुःख का अर्थ और जी उठना—यही परमेश्वर की योजना का उद्देश्य है; यीशु वही मसीह है जिसे वह घोषित करता है।
पंक्ति-दिशा
इस पद के संदेश को इसलिए याद रखें: यीशु मसीह है—जो दुःख उठाकर जीतता है और मृतकों में से जीवित होकर जीवन देता है। हमारे जीवन की दिशा इसी विश्वास पर टिकी होनी चाहिए।
क्रॉस-रेफरेंस
- रोम 10:9 के साथ संबंध: विश्वास के बोलण और मसीह को प्रभु के रूप में स्वीकार करने की मंजूरी।
- 1 कुरिन्थी 15:3-4: यदि मसीह न जी उठे होते, तो हमारा विश्वास व्यर्थ होता।
- लुक 24:46-47: मसीह के दुःख, मरना, और जी उठना क्यों आवश्यक हैं—प्रकाशन का आधार।