Old Testament
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प्रेरितों के काम 1 प्रेरितों के काम 2 प्रेरितों के काम 3 प्रेरितों के काम 4 प्रेरितों के काम 5 प्रेरितों के काम 6 प्रेरितों के काम 7 प्रेरितों के काम 8 प्रेरितों के काम 9 प्रेरितों के काम 10 प्रेरितों के काम 11 प्रेरितों के काम 12 प्रेरितों के काम 13 प्रेरितों के काम 14 प्रेरितों के काम 15 प्रेरितों के काम 16 प्रेरितों के काम 17 प्रेरितों के काम 18 प्रेरितों के काम 19 प्रेरितों के काम 20 प्रेरितों के काम 21 प्रेरितों के काम 22 प्रेरितों के काम 23 प्रेरितों के काम 24 प्रेरितों के काम 25 प्रेरितों के काम 26 प्रेरितों के काम 27 प्रेरितों के काम 28Verse
प्रेरितों के काम 17:1 प्रेरितों के काम 17:2 प्रेरितों के काम 17:3 प्रेरितों के काम 17:4 प्रेरितों के काम 17:5 प्रेरितों के काम 17:6 प्रेरितों के काम 17:7 प्रेरितों के काम 17:8 प्रेरितों के काम 17:9 प्रेरितों के काम 17:10 प्रेरितों के काम 17:11 प्रेरितों के काम 17:12 प्रेरितों के काम 17:13 प्रेरितों के काम 17:14 प्रेरितों के काम 17:15 प्रेरितों के काम 17:16 प्रेरितों के काम 17:17 प्रेरितों के काम 17:18 प्रेरितों के काम 17:19 प्रेरितों के काम 17:20 प्रेरितों के काम 17:21 प्रेरितों के काम 17:22 प्रेरितों के काम 17:23 प्रेरितों के काम 17:24 प्रेरितों के काम 17:25 प्रेरितों के काम 17:26 प्रेरितों के काम 17:27 प्रेरितों के काम 17:28 प्रेरितों के काम 17:29 प्रेरितों के काम 17:30 प्रेरितों के काम 17:31 प्रेरितों के काम 17:32 प्रेरितों के काम 17:33 प्रेरितों के काम 17:34



प्रेरितों के काम 17:5 — संदर्भ के भीतर परिचय
यहीं पचास-पंचर्यावर्गों में स्टीसीयान नगर में प्रचार करने के कारण यहूदियों में प्रतिशोध की भावना बढ़ जाती है। प्रेरित पौलुस और उनके साथियों ने बेथनी के बाहर क़दम बढ़ाए, परन्तु यहूदियों द्वारा ईर्ष्या से प्रेरित दुष्ट मनुष्यों को नगर में फैलाकर भड़की हुई भीड़ बनाकर विरोध का आग्रहम किया गया। यह घटना एथेंस की तुलना में छोटे नगर में पहले से भड़क उठने के संकेत देती है कि प्रचार-कार्य के समय प्रतिरोध कैसे उभर सकता है, और कैसे ईश्वर के काम में समाज-प्रतिरोध का सामना करना पड़ता है।
मुख्य अर्थ
यह verses दिखाते हैं कि सत्य का प्रचार कुछ परिस्थितियों में सामाजिक तथा धार्मिक धारणाओं के विरुद्ध प्रतिज्ञा और दबाव का सामना करता है। यहूदियों की ईर्ष्या और दुष्ट लोगों का मिलना दिखाता है कि सत्ता-प्राप्ति या पवित्रता के बावजूद, ईश्वर के राज्य के विरुद्ध अवरोध ऐसे समय भी सामने आते हैं। परन्तु प्रेरकों का धैर्य और प्रभु की योजना आगे बढ़ती रहती है।
दो-तीन प्रमुख विषय
महत्वपूर्ण चित्रण — सुसंगत टिप्पणी
हिंदी बाइबल टीका के लिए यह याद रखना उपयुक्त है कि यह घटना यहूदियों के पुनः-स्थापना के प्रयासों को दर्शाती है, जिसमें यहूदियों ने खोई हुई सत्ता और मान-प्रतिष्ठा का संघर्ष करते हुए नगरवासियों को अपनी सच्चाई से दूर भड़काने की कोशिश की। परन्तु पौलुस-यूसुस के नेतृत्व में, चर्च की स्थापना का लक्ष्य बना रहता है और प्रभु की कृपा से वचन का प्रचार चलता रहता है।
क्रॉस-रेफरेंसेस (संछेप में) और उनके connects
• प्रेरितों के काम 14:19-22 — शोढ़ों, प्रतिरोध और प्रचार के बीच स्थिरता की आवश्यकता।
• प्रेरितों के काम 17:32-34 — लोग मामले के प्रति अलग-थलग महसूस करते हैं, किन्तु कुछ प्रभु में दृढ़ रहते हैं।
• रोमियों 12:17-21 — बुराई के विरुद्ध बुराई से न लड़कर भला करें; परिशुद्ध विवेक से मार्ग-दर्शन।
व्यावहारिक चिंतन
हम भी अपने विश्वास के समय विरोध का सामना कर सकते हैं। भय के बजाय धैर्य रखें, प्रभु पर दृढ़ विश्वास बनाए रखें, और समुदाय में प्रेम-गवाही से सत्य का प्रकाश फैलाते रहें। विरोधी भीड़ के समय शांति बनाए रखना और क्रोध को मात देना हमें दिखाता है कि चर्च का प्रभाव शब्द के द्वारा और जीवन के उदाहरण से बढ़ता है।
संक्षिप्त समापन
यह verses यह बताते हैं कि ईर्ष्या और विरोध की परिस्थितियों में भी ईश्वर का कार्य निर्बाध चलता है। प्रेरितों का धैर्य और सच की गवाही नगर-चर्चा को आगे बढ़ाती है, और यहूदियों के विरोध के बावजूद बुद्धिमान और मर्यादित व्यवहार से प्रभु का उद्देश्य सिद्ध होता है।
इतिहासिक बिंबों से प्रेरित यह संदेश आज भी यह सीख देता है कि सत्य के सिंहद्वार बनाम विद्वेष के अंधकार से परे, प्रभु के शब्द की शक्ति मजबूत रहती है और उसकी पवित्र योजना समय के साथ स्पष्ट होती है।
सूत्र उद्धरण (कई उद्धरण संकेत): Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के सामान्य-उद्धरण यदि उपलब्ध हों तो संबंधित ठोस पंक्ति मान्य।