Old Testament
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प्रेरितों के काम 1 प्रेरितों के काम 2 प्रेरितों के काम 3 प्रेरितों के काम 4 प्रेरितों के काम 5 प्रेरितों के काम 6 प्रेरितों के काम 7 प्रेरितों के काम 8 प्रेरितों के काम 9 प्रेरितों के काम 10 प्रेरितों के काम 11 प्रेरितों के काम 12 प्रेरितों के काम 13 प्रेरितों के काम 14 प्रेरितों के काम 15 प्रेरितों के काम 16 प्रेरितों के काम 17 प्रेरितों के काम 18 प्रेरितों के काम 19 प्रेरितों के काम 20 प्रेरितों के काम 21 प्रेरितों के काम 22 प्रेरितों के काम 23 प्रेरितों के काम 24 प्रेरितों के काम 25 प्रेरितों के काम 26 प्रेरितों के काम 27 प्रेरितों के काम 28Verse
प्रेरितों के काम 7:1 प्रेरितों के काम 7:2 प्रेरितों के काम 7:3 प्रेरितों के काम 7:4 प्रेरितों के काम 7:5 प्रेरितों के काम 7:6 प्रेरितों के काम 7:7 प्रेरितों के काम 7:8 प्रेरितों के काम 7:9 प्रेरितों के काम 7:10 प्रेरितों के काम 7:11 प्रेरितों के काम 7:12 प्रेरितों के काम 7:13 प्रेरितों के काम 7:14 प्रेरितों के काम 7:15 प्रेरितों के काम 7:16 प्रेरितों के काम 7:17 प्रेरितों के काम 7:18 प्रेरितों के काम 7:19 प्रेरितों के काम 7:20 प्रेरितों के काम 7:21 प्रेरितों के काम 7:22 प्रेरितों के काम 7:23 प्रेरितों के काम 7:24 प्रेरितों के काम 7:25 प्रेरितों के काम 7:26 प्रेरितों के काम 7:27 प्रेरितों के काम 7:28 प्रेरितों के काम 7:29 प्रेरितों के काम 7:30 प्रेरितों के काम 7:31 प्रेरितों के काम 7:32 प्रेरितों के काम 7:33 प्रेरितों के काम 7:34 प्रेरितों के काम 7:35 प्रेरितों के काम 7:36 प्रेरितों के काम 7:37 प्रेरितों के काम 7:38 प्रेरितों के काम 7:39 प्रेरितों के काम 7:40 प्रेरितों के काम 7:41 प्रेरितों के काम 7:42 प्रेरितों के काम 7:43 प्रेरितों के काम 7:44 प्रेरितों के काम 7:45 प्रेरितों के काम 7:46 प्रेरितों के काम 7:47 प्रेरितों के काम 7:48 प्रेरितों के काम 7:49 प्रेरितों के काम 7:50 प्रेरितों के काम 7:51 प्रेरितों के काम 7:52 प्रेरितों के काम 7:53 प्रेरितों के काम 7:54 प्रेरितों के काम 7:55 प्रेरितों के काम 7:56 प्रेरितों के काम 7:57 प्रेरितों के काम 7:58 प्रेरितों के काम 7:59 प्रेरितों के काम 7:60



Reader-friendly overview
प्रेरितों के काम 7:54 में स्टीफन के शुद्ध विश्वास, उद्धार की साक्षीता और धार्मिक अत्याचार के बीच का तीखा संघर्ष दिखता है। स्टीफन ने ख्रीस्तीय सच्चाई की गहराई से पुष्टि की, जिसके परिणामस्वरूप उनकी भीड़ क्रोध से जल उठा। इस verse में प्रेरित समूह की धार्मिक बहस की जगह एक साहसिक आस्था की चिंगारी ही दिखाई देती है, जो असत्य के सामने सच की दृढ़ता है।
Verse in its chapter: क्या घटा?
जब स्टीफन ने यहूदियों को ईसा मसीह के बारे में यह बताया कि परमेश्वर की महिमा बिना देह धारण के भी है और शास्त्र के अनुसार मसीह को क्रूस पर चढ़ाने के बजाय उनकी मृत्यु पर भी वह पवित्र आत्मा के पवित्र कामों को देखता है, तब मुलाकात में क्रोध ने जगह बना ली। यह verse दिखाता है कि सत्य की बात सुनकर झुंझलाहट बढ़ती है और फिर आक्रोश का प्रदर्शन होता है – दाँत-काटने जैसा क्रोध।
Main spiritual lesson
इस पवित्र पाठ का महत्वपूर्ण संदेश है: सत्य की घोषणा मानव-गंभीर स्थितियों में भी मूल्यवान है, परन्तु इसे सुनकर प्रतिक्रियात्मक हिंसा से बचना कठिन है। विश्वास की प्रबल रोशनी अच्छाई की सुरक्षा है, परन्तु उसके प्रकाश से घबराकर दमन और हिंसा उभरना भी संभव है। सत्य के लिए खड़े होना, पर उसका जवाब नम्रता और धैर्य से देना, यहाँ स्टीफन के अनुभव में प्रमुख पाठ बनता है।
Cross-references and connections
इन संदर्भों से दिखता है कि क्रोध कभी-कभी भावना का प्रकट रूप होता है, पर ईश्वरीय सत्य के सामने शांत रहकर भी साहसपूर्वक सत्य को प्रस्तुत करना चाहिए।
Verse in historical-commentary perspective
एडल्ट-पूर्व सार्वजनिक टिप्पणीकारों के विचार मिलते-जुलते हैं: स्टीफन ने अपने स्वयं के कथन में एक गहरी आत्म-निष्क्रियता नहीं, बल्कि ईश्वर के प्रत्यक्ष प्रमाणों के सामने एक सतर्क आस्था दिखाई।चर्च की पुरानी टीका-राय में उसे दंडित करने की जगह सच की रक्षा की प्रेरणा माना गया है। कुछ चर्चित निर्गत टिप्पणियों के अनुसार, यहाँ प्रमुख नीतिगत पाठ यह है कि बाहर की असहजता के बीच भी सत्य की रक्षा के लिए साहस आवश्यक है।
Practical application
Brief concluding summary
7:54 में क्रोधित होना दर्शाता है कि सत्य के समक्ष मानव स्वभाव कितने प्रकारी प्रतिक्रियाओं को जन्म देता है। परन्तु प्रेरितों के काम का यह भाग हमें याद दिलाता है कि साहसपूर्वक सत्य बताने के साथ, परमेश्वर के न्याय और कृपा के बीच संतुलन बनाए रखना चाहिए। स्टीफन की दृष्टि से प्रेरित पाठ यही है: सत्य के लिए खड़े होना, पर दृढ़ प्रेम और नम्रता के साथ प्रतिबिंबित करना।
यह टिप्पणी Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke की सार्वजनिक-डोमेन विचारधारा से प्रेरित समेकित समझ पर आधारित है; उनके संक्षिप्त उद्धरण नीचे उपलब्ध हैं:
उद्धृत विचार (संक्षेप):
“क्रोध के बावजूद सत्य को दृढ़ रखना चाहिए; दाँत पीसना क्रोध का प्राकृतिक प्रमाण है, पर उसका उद्देश्य नहीं।” (उद्धरण सार, विभिन्न टिप्पणीकारों के समन्वय से)
Cross-reference explanations are included to aid study, without reproducing full texts of the cross-referenced verses.