Old Testament
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प्रेरितों के काम 1 प्रेरितों के काम 2 प्रेरितों के काम 3 प्रेरितों के काम 4 प्रेरितों के काम 5 प्रेरितों के काम 6 प्रेरितों के काम 7 प्रेरितों के काम 8 प्रेरितों के काम 9 प्रेरितों के काम 10 प्रेरितों के काम 11 प्रेरितों के काम 12 प्रेरितों के काम 13 प्रेरितों के काम 14 प्रेरितों के काम 15 प्रेरितों के काम 16 प्रेरितों के काम 17 प्रेरितों के काम 18 प्रेरितों के काम 19 प्रेरितों के काम 20 प्रेरितों के काम 21 प्रेरितों के काम 22 प्रेरितों के काम 23 प्रेरितों के काम 24 प्रेरितों के काम 25 प्रेरितों के काम 26 प्रेरितों के काम 27 प्रेरितों के काम 28Verse
प्रेरितों के काम 7:1 प्रेरितों के काम 7:2 प्रेरितों के काम 7:3 प्रेरितों के काम 7:4 प्रेरितों के काम 7:5 प्रेरितों के काम 7:6 प्रेरितों के काम 7:7 प्रेरितों के काम 7:8 प्रेरितों के काम 7:9 प्रेरितों के काम 7:10 प्रेरितों के काम 7:11 प्रेरितों के काम 7:12 प्रेरितों के काम 7:13 प्रेरितों के काम 7:14 प्रेरितों के काम 7:15 प्रेरितों के काम 7:16 प्रेरितों के काम 7:17 प्रेरितों के काम 7:18 प्रेरितों के काम 7:19 प्रेरितों के काम 7:20 प्रेरितों के काम 7:21 प्रेरितों के काम 7:22 प्रेरितों के काम 7:23 प्रेरितों के काम 7:24 प्रेरितों के काम 7:25 प्रेरितों के काम 7:26 प्रेरितों के काम 7:27 प्रेरितों के काम 7:28 प्रेरितों के काम 7:29 प्रेरितों के काम 7:30 प्रेरितों के काम 7:31 प्रेरितों के काम 7:32 प्रेरितों के काम 7:33 प्रेरितों के काम 7:34 प्रेरितों के काम 7:35 प्रेरितों के काम 7:36 प्रेरितों के काम 7:37 प्रेरितों के काम 7:38 प्रेरितों के काम 7:39 प्रेरितों के काम 7:40 प्रेरितों के काम 7:41 प्रेरितों के काम 7:42 प्रेरितों के काम 7:43 प्रेरितों के काम 7:44 प्रेरितों के काम 7:45 प्रेरितों के काम 7:46 प्रेरितों के काम 7:47 प्रेरितों के काम 7:48 प्रेरितों के काम 7:49 प्रेरितों के काम 7:50 प्रेरितों के काम 7:51 प्रेरितों के काम 7:52 प्रेरितों के काम 7:53 प्रेरितों के काम 7:54 प्रेरितों के काम 7:55 प्रेरितों के काम 7:56 प्रेरितों के काम 7:57 प्रेरितों के काम 7:58 प्रेरितों के काम 7:59 प्रेरितों के काम 7:60



पैग़ंबरे प्रेरितों के काम 7:8 पर आधारित टिप्पणी
यह पद व्याख्या करता है कि परमेश्वर किस प्रकार पितरों के परमादेशों के पालन और वाचा के अनुसार आगे बढ़ने को महत्व देता है। प्रेरितों के कारणों में स्टेप-बाय-स्टेप इतिहास का यह हिस्सा अब्राहम, इसहाक और याकूब के विवाह-परिवार के आरम्भिक हिस्सों को जोड़ता है और यूं यह ईश्वर के चयनित जन की पहचान को मजबूत करता है।
पद का अध्यायगत संदर्भ और संदर्भ-संगतता
याद रहे कि प्रेरितों के काम में साक्ष्य का यह भाग पूर्वकथा की तरह भगवान के वाचा-प्रतिज्ञा के पालन की महत्ता दिखाता है—खतना की वाचा और उसके साथ इसहाक से याकूब तक की धारा, जो भविष्य के बारह कुलपतियों के जन्म की आधारशिला बनती है। उत्पत्ति 17:10-11 और 21:4 के संदर्भ इस बात की पुष्टि करते हैं कि ईश्वर ने वाचा के अनुरूप बाह्य चिन्ह के साथ आस्था के चिह्न को मान्यता दी।
मुख्य सीख का केंद्र
इस पंक्ति में तीन प्रमुख विचार उभरते हैं: वाचा की पुष्टि, पिता-पुत्री विशिष्टता, और द्योतक प्रतीक का निरन्तर पालन। खतना न केवल एक पारंपरिक रीति थी; यह परमेश्वर के लोगों के बीच एक विशिष्ट पहचान बनाती थी, ताकि आस्था और बंधुत्व के साथ उनका जीवन मार्गदर्शित हो सके। यह पाठ हमें यह याद दिलाता है कि ईश्वर अपनी वाचा के अनुरूप हर चरण में चरण-दर-चरण मार्गदर्शन करता है, और समुदाय के लिए एक स्पष्ट पहचान बनाये रखता है।
संबंधित बाइबिल अंश और उनका संक्षिप्त तुलनात्मक विचार
इन संदर्भों से स्पष्ट होता है कि परमेश्वर के लिए आस्था का बाह्य चिह्न निजी विश्वास से जुड़कर समुदाय-जीवन का हिस्सा बन जाता है, और इसी क्रम से बारह कुलों के लिए धर्मी पहचान बनती है।
जीवन-आयाम आवेदन
1) आस्था के साथ बाह्य संकेतों की भूमिका: हमारे समय में भी बाहरी चिन्हों की बजाय आन्तरिक विश्वास और जीवन-व्यवहार की भूमिका है। यदि कोई धार्मिक रीति-रivat निभाता है, तो वह आस्था की पुष्टि और समुदाय के लिए एकता बनाये रखने का माध्यम बन सकता है।
2) परमेश्वर की वाचा की निरंतरता: पूर्वजों के साथ ईश्वर की प्रतिबद्धता आज भी हमें उसका भरोसा देता है कि वह अपने कार्य में स्थिर है और भविष्य के लिए मार्ग प्रशस्त करता है।
3) पहचान और जिम्मेदारी: हर मानवीय समुदाय के लिए यह आवश्यक है कि वे अपनी पहचान में ईश्वर के निर्देशों को केंद्र में रखें और सामाजिक जीवन में एक दूसरे के लिए जिम्मेदारी निभाएं।
संक्षेप
यह छोटा-सा पाठ हमें बताता है कि ईश्वर ने वाचा के अनुरूप आस्थागत चिह्नों को मान्यता दी है और इन चिह्नों के माध्यम से अपने भक्तजन के बीच एकता और पहचान को स्थिर किया है। भविष्य की बारह कुलों के लिए यह क्रम एक ठोस धरोहर बना रहता है—कि आस्था, वाचा, और समाज-संयोजन एक साथ चलते हैं।
क्रॉस-रेफरेंसेस (संक्षेप में)
1) उत्पत्ति 17:10-11 — वाचा के निशान के रूप में खतना; आस्था और पहचान का संकेत।
2) उत्पत्ति 21:4 — इसहाक का खतना; पूर्वज-परिवार के साथ वाचा का निरन्तरता।
3) उल्लेख्य संदर्भ — अन्य इतिहास-चिह्न, जैसे कि लोगों की स्मृति और समुदाय की एकता के लिए चिन्हों का प्रयोग, जो יהודה-उत्पत्ति के प्रसंग में बार-बार देखा जाता है।
नोट: इस पाठ के संकेत Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक-डोमेन विचारों के संगत सार को समाहित करते समय आवश्यक उद्धरण-टीका नीचे नहीं दिए गए हैं, किंतु इनके विचारों से प्रेरित सामान्य विवेक और पवित्रशास्त्र के दृढ़ सिद्धांतों के अनुसार ही व्याख्या विकसित की गई है.