Old Testament
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अर्थ का एक साक्ष्य-युक्त निष्कर्ष
व्यवस्थाविवरण 15:18 कहता है कि जब तुम किसी दास को मुक्त करके भेजो, तब उसे दयालुता के साथ छोड़ना, क्योंकि उसने छह वर्ष तक तेरी सेवा में एक-दो मजदूरों के बराबर काम किया है; और यहोवा तेरे सारे कामों में तुझको आशीष देगा।
पश्चात्पृष्ठभूमि
यह वचन यहूदियों के सामाजिक-धर्मीय कानून का हिस्सा है जो दास-प्रथा पर सीमा और मानवीय सम्मान दर्शाता है। हर छह वर्ष के अन्तर्गत मुक्ति वर्ष की प्रथा थी, ताकि दासों को नवीन स्वतंत्रता मिले और समाज में पुनः उन्हें समुचित स्थान दिया जा सके। इस पवित्र नियम में दास के पुनः प्रवेश के समय उसकी गरिमा की रक्षा का भाव स्पष्ट है, ताकि दास बनना स्थायी दायित्व न बने और परिवार-जनों के साथ उसका पुनः मिलन संभव रहे।
व्याख्यात्मक टिप्पणियाँ
संकेतित पाठ-सम्बन्धार्थ
1) निर्गमन 21:2-6 — दास की स्वतंत्रता का अन्यथा उल्लेख, जो व्यक्तिगत गरिमा और परिवार के पुनर्मिलन की दिशा में संकेत देता है।
2) यसयाह 58:6-7 — दयालु और सामाजिक दायित्वों के साथ समानुभूतिपूर्ण कर्म का महत्व, जो निर्गत आशीष को समर्थ बनाता है।
3) रोम 12:17-18 — दूसरों के साथ व्यवहार में शांति बनाए रखने की शिक्षा, जो सामाजिक व्यवहार को पवित्र कर देता है।
सार-सारांश
यह वचन न केवल दास-स्वतंत्रता का विधान है, बल्कि एक गहरे नैतिक निर्देश भी है: स्वतंत्रता के समय भी दूसरों के मान-सम्मान की रक्षा करें और मुक्तिदायिनी आशीषों के लिए सामाजिक-धार्मिक ड्यूटी को निभाते रहें। यह एक संतुलित जीवन की प्रेरणा है— कर्म के परिणामों में दयालुता और ईमानदारी बनी रहे।
छोटी क्रॉस-रेफरेंसेज़ (संक्षिप्त अभिज्ञान)
• निर्गमन 21:2-6 — दास की मुक्तिः छह वर्ष की सेवा पर निर्भरता की परिधि का मूल सिद्धांत।
• बाइबल की न्याय-संरचना: सामाजिक सुरक्षा और परिवारिक निर्भरता के बीच संतुलन।
• नया आज्ञापत्र: प्रेम और भलाई के व्यवहार से समाज में शांति और आशीष का वितरण।
व्यावहारिक सीख
नोट: इस प्रवचन में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के खुले उद्धरणों के विशिष्ट शब्द-चिह्न उद्धृत नहीं हैं; यदि उपलब्ध हों तो छोटे चरणों में आवश्यक संदर्भ दिए जा सकते हैं।