व्यवस्थाविवरण 15:3 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

परदेशी मनुष्य से तू उसे बरबस भरवा सकता है*, परन्तु जो कुछ तेरे भाई के पास तेरा हो उसे तू बिना भरवाए छोड़ देना।

व्यवस्थाविवरण 15:3 पद-दर-पद बाइबल टीका

विधान-गणना 15:3 परिप्रेक्ष्य में

वास्तविकता यह है कि परमेश्वर व्यवस्था देता है कि लोग अपने आस-पास के सामाजिक-आर्थिक सरंचनाओं में उदारता और न्याय बनाए रखें। व्यवस्थाविवरण में यह आयत एक ऐसी स्थिति की ओर संकेत है जिसमें परदेशी (अन्य देश-जाति के सदस्य) से ऋण-भराव या भोजन के बारे में कानुभाव की बात होती है, ताकि समुदाय में न कोई दुष्कर्म हो और न द्वेष। साथ ही, अपने भीतर के भाइयों के साथ व्यवहार करते समय संवेदना और दायित्व को बढ़ावा दिया गया है।

मुख्य अर्थ

यह वाक्य हमें यह सिखाता है कि: जब किसी परदेशी को एक चीज़ भरवानी हो, तो उसे भरवा देना उचित है; परन्तु अगर वह वस्तु एक तुम्हारे भाई के पास है, तो उसे तब तक सुरक्षित रखना चाहिए जब तक वह स्वयं न लौटाएं या उपलब्ध न हों। इस क्रम में समाज के भीतर असमानताओं के बीच पारस्परिक सम्मान और भाईचारा बनाए रखने पर बल है।

तीन प्रमुख विषय

  • उदारता बनाम पारसीक प्रतिस्थापन: परदेशी से सहायता लेने में हिम्मत और मुक्तता है, परन्तु अपने भाइयों के साथ लेन-देन में ईमानदारी और समानता की मानकें अधिक सख्त होती हैं।
  • न्याय और उत्तरदायित्व: समुदाय के सदस्य एक-दूसरे के माल के साथ न्यायपूर्ण व्यवहार करें, ताकि किसी भी समूह के साथ अवमानना या अन्याय न हो।
  • समुदाय के आंतरिक संबंध: यह व्यवस्था एक सुरक्षित समाज बनाने की शिक्षा देती है जिसमें बाहरी और आंतरिक दोनों प्रकार के दायित्व स्पष्ट होते हैं।

संबद्ध पंरापराएँ (Cross-references)

1) निर्गमन 22:21-24 – विदेशियों के साथ संवेदना और उनका शोषण न करना; समुदाय में दयालुता का महत्व।

2) व्यवस्थाविवर 19:17 – जो दीन-हृदय से सहायता माँगता है, उसे लाभ पहुँचाने की प्रेरणा की पुष्टि।

3) दाऊद-कलाप 14:14 – समुदाय में नफ़रत या दुराव नहीं, बल्कि क्षमा और सहयोग की अपेक्षा।

इन संदर्भों में दिखता है कि बाहरी और आंतरिक दोनों प्रकार के रिश्तों में अनुराग, न्याय और करुणा प्रमुख मानक हैं जिससे समुदाय निर्भय बना रहे।

व्यावहारिक विचार

- एक परिवार के सदस्य के वस्तु को सुरक्षित रखना और उसे लौटाने की जिम्मेदारी; जब सामने वाले के पास उपलब्ध हो, तब अपेक्षित वापसी के लिए प्रक्रिया सरल हो।

- समाज में आर्थिक-संरचना की दृष्टि से असमानताओं के बावजूद समान व्यवहार और स्पष्ट नियम बनाए रखें ताकि किसी प्रकार की गलतफहमी न रहे।

संक्षिप्त सार

यह आयत बताती है कि दयालुता की सीमा बाहरी मदद तक है, परन्तु अपने भाइयों के साथ व्यवहार में स्पष्टता, न्याय और सम्मान सबसे ऊपर रहते हैं। ऐसी व्यवस्था से समुदाय में भरोसा और स्वभाविक समरसता बनती है।

यदि आप चाहें, तो नीचे दिए गए 2-3 प्रमुख विचारों को एक-दो उदाहरणों के साथ और संक्षेप में देख सकते हैं:

  1. उदारता की परंपरा बनाये रखना, परन्तु पारिवारिक संबंधों के प्रति जिम्मेदारी स्पष्ट रखना।
  2. न्यायपूर्ण वितरण और वापसी के नियम का सम्मान—ताकि हर सदस्य सुरक्षित और सम्मानित महसूस करे।

कोटकीय नोट: इस संदेश में Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के सीधे उद्धरण आवश्यकतानुसार उल्लेखित हैं, परन्तु पूर्ण पाठ उद्धरण नहीं दिया गया है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

व्यवस्थाविवरण 15:3 समानांतर पद और संबंधित वचन

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व्यवस्थाविवरण 23:20 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
व्यवस्थाविवरण 23:20 (HINIRV) »
तू परदेशी को ब्याज पर ऋण तो दे, परन्तु अपने किसी भाई से ऐसा न करना, ताकि जिस देश का अधिकारी होने को तू जा रहा है, वहाँ जिस-जिस काम में अपना हाथ लगाए, उन सभी में तेरा परमेश्‍वर यहोवा तुझे आशीष दे।

निर्गमन 22:25 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
निर्गमन 22:25 (HINIRV) »
“यदि तू मेरी प्रजा में से किसी दीन को जो तेरे पास रहता हो रुपये का ऋण दे, तो उससे महाजन के समान ब्याज न लेना।

मत्ती 17:25 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
मत्ती 17:25 (HINIRV) »
उसने कहा, “हाँ, देता है।” जब वह घर में आया, तो यीशु ने उसके पूछने से पहले उससे कहा, “हे शमौन तू क्या समझता है? पृथ्वी के राजा चुंगी या कर किन से लेते हैं? अपने पुत्रों से या परायों से?”

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