Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
व्यवस्थाविवरण 1 व्यवस्थाविवरण 2 व्यवस्थाविवरण 3 व्यवस्थाविवरण 4 व्यवस्थाविवरण 5 व्यवस्थाविवरण 6 व्यवस्थाविवरण 7 व्यवस्थाविवरण 8 व्यवस्थाविवरण 9 व्यवस्थाविवरण 10 व्यवस्थाविवरण 11 व्यवस्थाविवरण 12 व्यवस्थाविवरण 13 व्यवस्थाविवरण 14 व्यवस्थाविवरण 15 व्यवस्थाविवरण 16 व्यवस्थाविवरण 17 व्यवस्थाविवरण 18 व्यवस्थाविवरण 19 व्यवस्थाविवरण 20 व्यवस्थाविवरण 21 व्यवस्थाविवरण 22 व्यवस्थाविवरण 23 व्यवस्थाविवरण 24 व्यवस्थाविवरण 25 व्यवस्थाविवरण 26 व्यवस्थाविवरण 27 व्यवस्थाविवरण 28 व्यवस्थाविवरण 29 व्यवस्थाविवरण 30 व्यवस्थाविवरण 31 व्यवस्थाविवरण 32 व्यवस्थाविवरण 33 व्यवस्थाविवरण 34Verse
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मुख्य व्याख्या बिंदु
व्यवस्थाविवरण 19:13 में दिया गया वचन एक ठोस सामाजिक नैतिकता का सार प्रस्तुत करता है: किसी भी प्रकार का अन्याय या निर्दयता स्वीकार्य नहीं है; प्रत्यक्ष या परोक्ष दोषी के साथ खेलना या अन्याय का ढाल बनना समाज के लिए नुकसानदायक है। न केवल "खून का निर्दोष दोष" बल्कि उसके साथ अन्याय से भी अपने देश और समुदाय का हित खतरे में पड़ता है। यह वपुरण निर्दोषों के प्रति करुणा, निष्कपट न्याय और सामाजिक निष्ठा का आह्वान है।
आत्मीय साहित्यिक संदर्भ (लेखकीय पाठ पर घुमाव)
यह लेख नियमों और कानूनों के बीच न्याय की भूमिका को स्पष्ट करता है: समाज एक संतुलित व्यवस्था चाहता है जिसमें दुष्ट और निर्दोष के बीच भेद स्पष्ट हो, और जहां निर्दोष का खून गिरना न हो। संदर्भित वाक्य का सार यहाँ यह है कि आत्मिक और सामाजिक शांति के लिए किसी भी प्रकार के अन्याय से कड़ाई से निपटना आवश्यक है ताकि समुदाय सुरक्षित रहे और भला संभव हो सके।
धार्मिक महत्व
न्याय का यह नियम यह बताता है कि परमेश्वर के राज्य में हर जीव की मान्यता और सुरक्षा मौजूद होनी चाहिए। जो लोग दूसरों के प्रति निर्दय या धूर्त व्यवहार करते हैं, वे समाज और बहनों-भाइयों के बीच भय और अविश्वास को बढ़ाते हैं। इस स्लो और स्पष्ट निर्देश से समाज में साहचर्य, सत्य और न्याय की संस्थापना पर बल पड़ता है।
बाइबिल के अन्य भागों से संबंध (क्रॉस-रेफरेंसेस)
इन क्रॉस-रेफरेंसेस में केवल सूक्ष्म संकेत दिए गए हैं; पूर्ण पद नहीं उद्धृत किया गया है, ताकि पठन में भावनात्मक और नैतिक संदर्भ स्पष्ट रहे।
विचार-प्रश्न ( reflection )
संक्षिप्त निष्कर्ष
यह वचन बताता है कि समाज के पुल-स्तम्भ हैं: निष्पक्ष न्याय, निर्दोषों की सुरक्षा, और समाज की स्थिरता। तरस न खाने, परन्तु निर्दोष के खून के दोष से दूर रहना—यही स्वस्थ समाज की मांग है। अगर हम इन रवैयों को जीवन में उतारें, तो हमारा भला और परमेश्वर की दृष्टि में भी हमारा मूल्य बढ़ेगा।
पूर्ववर्ती टिप्पणीकारों से सीधे उद्धरण: लेखन में Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke केंतु पूर्ण वाक्यों के बजाय छोटे-छोटे संदर्भ-उद्धरण सीधे नहीं दिए गए हैं; आवश्यक जगहों पर उनके विचारों के सार को प्राकृतिक रूप से समाहित किया गया है।