व्यवस्थाविवरण 19:16 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

यदि कोई झूठी साक्षी देनेवाला किसी के विरुद्ध यहोवा से फिर जाने की साक्षी देने को खड़ा हो,

व्यवस्थाविवरण 19:16 पद-दर-पद बाइबल टीका

reader-friendly overview

व्यवस्थाविवरण 19:16 यहोवा के कड़े नैतिक मानदंड को बताता है कि झूठी साक्षी देने की प्रवृत्ति कितनी विनाशकारी हो सकती है। किसी के विरुद्ध झूठी गवाही देना न केवल व्यक्तिगत निष्कर्षों को गलत बनाता है, बल्कि समाज की न्याय की चेन को भी विच्छेदित कर देता है। यह वचन सतर्कता, सत्यनिष्ठा और सामाजिक सुरक्षा के प्रति प्रभु की नीयत को सामने रखता है: निष्पक्ष और सत्य साक्षी बनना हर नागरिक का कर्तव्य है।

verse in its chapter

जब भी कानून का मामला सामने आए, किसी झूठे गवाह को स्थापित करना ईश्वर के सामने अवैध और दुष्कृत्य है। यह वचन व्यवस्था में पड़ी हर प्रकार की साक्षी के सत्य होने की कसौटी को रेखांकित करता है। अगर कोई झूठी साक्षी देता है, तो उसे वही दंड मिलना चाहिए जो पक्ष पर होता, ताकि समाज में न्याय की पंक्ति-lowest सुरक्षित रहे।

main spiritual lesson

सार तत्व यह है: सत्य के बिना न्याय दुर्बल हो जाता है। झूठी गवाही से निर्दोष व्यक्ति प्राणघातक दुष्प्रभाव झेल सकता है, और कटु दंड सामाजिक समरसता को बिगाड़ सकता है। ईश्वर सत्य के परमपालनकर्ता हैं; इसलिए उनके कानून में झूठ को जगह नहीं मिलती। नैतिक प्रामाणिकता, जिम्मेदारी और समुदाय के प्रति प्रेम—इन तीनों के समन्वय से ही न्यायबल मजबूत रहता है।

cross-references (संदर्भ) और उनका छोटा स्पष्टीकरण

  • प्रकाशित बाइबल के प्रमुख नियम: ठीक-ठीक गवाही देना—यह दूसरे कथनों से सामने सत्य को उजागर करता है।
  • उत्पत्ति 20:13 के समान नैतिकता—चोरी या झूठ के बगैर सत्य पर आधारित जीवन की महत्ता को रेखांकित करता है।
  • अन्तिम कानून के समय में न्याय के पूर्ण ओज के लिए सत्य की गवाही का स्थान—कानून और समाज दोनों के लिए आवश्यक।

इन संदर्भों से समझ में आता है कि झूठी साक्षी देना कैसे अन्याय की चेन बनाता है और क्यों सत्य वध करने में समर्थ बनना आवश्यक है।

careful application (व्यावहारिक अनुप्रयोग)

  • व्यक्ति के रूप में: झूठ बोलना कभी भी एक विकल्प नहीं; साफ-साफ और स्पष्ट उद्घोषणा के साथ सत्य के प्रति समर्पण बनाए रखें।
  • निर्णय-प्रक्रिया में: अदालतों या सामुदायिक मामलों में दायित्वपूर्वक साक्ष्य देना और तटस्थ रहना।
  • समुदाय के जीवन में: दूसरों के बारे में फैलाई गई गपशप या फर्जी गवाहदारी से दूर रहना, ताकि समाज में भरोसा बना रहे।

summary (सार)

झूठी साक्षी देना न केवल एक व्यक्तिगत अपराध है, बल्कि पूरे समाज की न्याय-विश्वास और सुरक्षा को खतरे में डालता है। ईश्वर के मानदंड के अनुसार सत्य सबसे बड़ी नैतिक ताकत है, जिसे हर नागरिक को बनाए रखना चाहिए। अगर हर कोई सच बोले और दूसरों की नीयत का सम्मान करे, तो न्याय की चेन मजबूत रहती है और समुदाय सुरक्षित रहता है।

नोट: इस पंक्ति के लिए Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के संक्षिप्त उद्धरण उपलब्ध हों तो केवल वे ही अंग्रेजी-स्तर के बचे छोटे कथन उद्धृत किए गए हैं।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

व्यवस्थाविवरण 19:16 समानांतर पद और संबंधित वचन

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अधर्मी साक्षी खड़े होते हैं; वे मुझ पर झूठा आरोप लगाते हैं।

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“झूठी बात न फैलाना। अन्यायी साक्षी होकर दुष्ट का साथ न देना।

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