Old Testament
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सभोपदेशक 9:10 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
जो काम तुझे मिले उसे अपनी शक्ति भर करना, क्योंकि अधोलोक में* जहाँ तू जानेवाला है, न काम न युक्ति न ज्ञान और न बुद्धि है।
सभोपदेशक 9:10 पद-दर-पद बाइबल टीका
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सभोपदेशक 9:10 समानांतर पद और संबंधित वचन
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कुलुस्सियों 3:23 (HINIRV) »
और जो कुछ तुम करते हो, तन मन से करो, यह समझकर कि मनुष्यों के लिये नहीं परन्तु प्रभु के लिये करते हो।

रोमियों 12:11 (HINIRV) »
प्रयत्न करने में आलसी न हो; आत्मिक उन्माद में भरे रहो; प्रभु की सेवा करते रहो।

सीधी बोध-रेखा: सभोपदेशक 9:10 का वास्तविक अर्थ
यह पद कहता है: जो काम तुझे मिले उसे अपनी शक्ति भर करना, क्योंकि अधोलोक में जहाँ तू जानेवाला है, न काम न युक्ति न ज्ञान और न बुद्धि है। सरल भाषा में इसका तात्पर्य है: जो अवसर तुम्हारे हाथ आए, उन्हें पूरी लगन और एकाग्रता से करना चाहिए, क्योंकि समय और अवसर सीमित हैं और मृत्यु के बाद स्थितियाँ बदल जाती हैं।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
सभोपदेशक (नीतिवचन लेखक की एक पुस्तक) जीवन की नश्वरता और क्षणभंगुरता पर ध्यान आकर्षित करता है। 9:10 में व्यक्ति को प्रकृत क्रम के अनुसार, काम, धैर्य और समर्पण की महत्ता दिखाई देती है- क्योंकि मरण के बाद माया-क्लेश या सक्रिय प्रयासों की महत्ता समाप्त हो जाती है। यह प्रकरण सुख-दुख के अस्थिर चक्र के बीच मेहनत की प्रासंगिकता को रेखांकित करता है।
व्याख्यात्मक अवलोकन
2-3 बहुविध cross-reference (संक्षेप)
- धार्मिक दृष्टि से: प्रेरित पवित्रता के लिए शुभ अवसरों का उपयोग—उदा. कब अगर अवसर आए तो उसे सहजता से स्वीकारना।
- नैतिक उद्देश्यों के लिए: समयानुकूल कर्म की महत्ता—जागृत विवेक और कार्य-निष्ठा की ज़रूरत।
- जीवन की नश्वरता: पृथ्वी पर रहकर मेहनत करते रहने का तात्पर्य है कि आत्म-संतुष्टि के लिए जड़ता न हो; ईश्वर के साथ वास्तविक संबंध बना रहे।
नोट: ऊपर के संदर्भ एक पाठ-सम्बन्ध बताते हैं, परन्तु पूर्ण पद के पाठ के पाठ-शास्त्र से अनुमानित व्याख्या में शब्द-सार फिक्रपूर्वक रखा गया है।
संक्षिप्त थीमैटिक बिंदु
उचित organizational notes
यहाँ संक्षेप में जीवन की स्थिरता और निरंतरता के बीच संतुलन दिखता है: कर्म-निष्ठा से ही अनुभव और उपलब्धियाँ मिलती हैं, भले ही परिस्थितियाँ कितनी भी कठोर क्यों न हों।
व्यावहारिक शिक्षा
दिन-प्रतिदिन के कार्यों में सुचारू होनहारता बनाए रखें; कठिन समय में भी अपने दायित्वों से पीछे न हटें। स्मरण रहे: समय और अवसर सीमित हैं, इसलिए प्रत्येक अवसर को ईमानदारी और विनम्रता के साथ निभाने में ही श्रेष्ठता है।
प्रेरणात्मक उपदेश इस प्रकार है: अपने हाथ जो भी लगे, उसे पूरी ताकत से करें; क्योंकि अंततः वही जीवन-यात्रा में स्थिरता और सफलता बनाते हैं।’
संदर्भ-उद्धरण: Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke से प्राप्त सामान्य-आधार विचार की झलक। अगर आवश्यक हो तो उनसे मिलते-जुलते छोटे-छोटे उद्धरण मिल सकते हैं, पर यहाँ संहितीय सन्देश पर फोकस रखा गया है।