Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीसभोपदेशक 9:16 बाइबल पद की व्याख्या
सभोपदेशक 9:16 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
तब मैंने कहा, “यद्यपि दरिद्र की बुद्धि तुच्छ समझी जाती है और उसका वचन कोई नहीं सुनता तो भी पराक्रम से बुद्धि उत्तम है।”
सभोपदेशक 9:16 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
सभोपदेशक 9:16 समानांतर पद और संबंधित वचन
उन बाइबल पदों को देखें जो विषय, शिक्षा या संदर्भ के आधार पर इस अंश से जुड़े हैं। समानांतर पदों की तुलना करने से इस वचन के संदर्भ और संदेश को अधिक गहराई से समझने में सहायता मिलती है। किसी चित्र को चुनें और संबंधित पद, उसकी व्याख्या तथा पद-दर-पद बाइबल टीका देखें।

सभोपदेशक 7:19 (HINIRV) »
बुद्धि ही से नगर के दस हाकिमों की अपेक्षा बुद्धिमान को अधिक सामर्थ्य प्राप्त होती है।

नीतिवचन 21:22 (HINIRV) »
बुद्धिमान शूरवीरों के नगर पर चढ़कर, उनके बल को जिस पर वे भरोसा करते हैं, नाश करता है।

सभोपदेशक 9:16 पर व्याख्या
मुख्य अभिप्राय: दरिद्री की बुद्धि उपेक्षित हो सकती है, लेकिन परम बुद्धि की श्रेष्ठता और व्यवहारिक शक्ति (पराक्रम) उसे भी उजागर कर देती है। यह पद एक न तो आर्थिक स्थिति की महिमा पर गर्व करता है और न ही समाज के ताने-बाने में किसी एक वर्ग के संस्थापन को स्थिर मानता है; बल्कि यह बताता है कि वास्तविक प्रभावशीलता विचार की गुणवत्ता और कर्म की दृढ़ता से मापी जाती है, भले ही आवाज़ छोटी हो।
साहित्यिक संदर्भ (लिटरेरी संदर्भ-आधार)
यह विचार सभाोपदेशक(कहानी-ग्रहण) की किताब में एक सामान्य चिंतन के रूप में उभरता है: बाह्य स्थिति के विपरीत, भीतर की बुद्धि और दृढ़ परिश्रम ही समाज में स्थायी प्रभाव छोड़ते हैं। न ही दरिद्रता और न ही तानाशाही सत्ता इसे हटाती है; पराक्रम से बुद्धि की श्रेष्ठता का क्लर्की संदेश बार-बार मिलता है—कि कर्म और विवेक का संयोग वास्तविक सफलता है।
theological significance (नैतिक-धार्मिक महत्त्व)
1) पिता-युग के नैतिक न्याय के आलोक में यह शिक्षण कि ईश्वर के मन में दीन-द्वेष नहीं, बल्कि हृदय की निष्ठा और बुद्धिमत्ता मूल्यवान है।
2) शक्ति और कदर-फल व्यवहार में आता है, न कि केवल ऊँचे सामाजिक दर्ज़े में। यह संदेश ग़रीब और निर्बल के लिए आश्वस्ति है कि पराक्रम (निष्ठा, विवेक, कार्य-नीति) अंततः मान्यता पाते हैं।
पवित्रशास्त्रीय क्रॉस-रेफ़रेंसे (Cross-references)
नोट: नीचे दिए गए क्रॉस-रेफ़रेंसेस में पूर्ण पद-वचन न दें, बस संकेत दें और उनके पाठ के संकल्प-उद्धरण से बचें।
विचार-विमर्श के प्रश्न
संक्षिप्त निष्कर्ष
सभोपदेशक 9:16 एक व्यावहारिक स्मरण- Reminder देता है कि समाज की आवाज़ चाहे कितनी भी ऊँची क्यों न हो, वास्तविक प्रभाव तब आता है जब बुद्धि और पराक्रम एक साथ कार्य करते हैं। दरिद्र की बुद्धि तुच्छ समझी जा सकती है, पर बिना शब्दों के भी उसका विवेक और दृढ़ता समाज को दिशा दे सकती है।
काशी-नोट
यूज़र के लिए 2-3 स्पष्ट, व्यावहारिक निष्कर्ष: अपनी सोच को पक्का करें, छोटे अवसरों को भी बड़ी ताकत दें, और कर्म से अपनी क्षमता का प्रदर्शन करें।
यद्यपि यह स्थान Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के सीधे पूर्ण उद्धरण नहीं देता, पर उनके विचारों के सार का संयोजन इस पाठ पर एक समेकित, हिन्दी-उपयोगी स्पंदन देता है। यदि चाहें, मैं उनके शाब्दिक अंशों के संक्षिप्त उद्धरण भी दे सकता हूँ, केवल बताएं।